चीन के सेवा क्षेत्र पर भी पड़ी मार

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Image caption कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इस साल की दूसरी तिमाही में चीन की सालाना विकास दर गिरकर 7.9 प्रतिशत पर आ सकती है

चीन के सेवा क्षेत्र में विकास की गति लगातार दूसरे महीने मई में भी सुस्त बनी हुई है. एक आधिकारिक सर्वेक्षण में ये तथ्य सामने आया है.

'चाइना फेडरेशन ऑफ लॉजिस्टिक्स एंड पर्चेसिंग' (सीएफएलपी) के इन आंकड़ों से चंद रोज पहले ही दो सर्वेक्षणों से पता चला था कि चीन का निर्माण क्षेत्र अपनी रफ्तार खो बैठा है जिसकी वजह से कारखानों से उत्पादन कम हो रहा है.

इससे घरेलू और विदेशों में होने वाले माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इससे उम्मीद जगी है कि सरकार अपनी नीतियों को शिथिल कर सकती है.

सीएफएलपी का गैर-निर्माण क्षेत्र का पर्चेसिंग मार्केट इंडेक्स (पीएमआई) अप्रैल के 56.1 के मुकाबले लुढ़ककर 55.2 पर आ गया है.

पीएमआई 50 से ऊपर होता है तो इसका मतलब होता है कि सेवा क्षेत्र में विस्तार हो रहा है. लेकिन 50 से नीचे जाने पर इसका आशय होता है कि सेवा क्षेत्र सिकुड़ रहा है.

निवेशकों की चिंता

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Image caption हाल के वर्षों में चीन ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में योगदान दिया है

चीन ने सेवा क्षेत्र की बेहतरी और निजी निवेश को बढ़ाने के लिए कुछ सुधारों की घोषणा की है लेकिन पीएमआई पर इसका असर दिखने में समय लगेगा.

कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इस साल की दूसरी तिमाही में चीन की सालाना विकास दर गिरकर 7.9 प्रतिशत पर आ सकती है.

यदि ऐसा हुआ तो वर्ष 2009 के बाद ऐसा पहली बार होगा जब चीन की विकास दर आठ प्रतिशत से नीचे चली जाएगी.

चीन की अर्थव्यवस्था में मई में पहले से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है क्योंकि देश के कारखानों से उत्पादन कम हुआ है जिससे घरेलू और विदेशों में आपूर्ति पर असर पड़ा है.

निवेशक इस गिरावट से खासतौर पर चिंतित हैं क्योंकि हाल के वर्षों में चीन ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में योगदान दिया है.

वहीं भारत की वार्षिक विकास दर भी इस साल की पहली तिमाही में नौ साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है.

भारत के निर्माण क्षेत्र में बेहद नुकसान के साथ-साथ रुपए की कीमत घटने के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है और विकास दर मात्र 5.3 प्रतिशत रही है.

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