आरबीआई ने ब्याज दरें घटाने के संकेत दिए

रिज़र्व बैक
Image caption रिज़र्व बैंक कर सकता है कि ब्याज़ दर में कटौती

भारतीय रिज़र्व बैंक यानि आरबीआई ने अपने तिमाही नीति समीक्षा से पहले ये संकेत दिए है कि ब्याज़ दरों में कटौती हो सकती है.

आरबीआई का कहना है कि आर्थिक विकास दर में आई गिरावट और तेल के दामों में आई कमी से मौद्रिक नीति में ढील देने संभावनाएं बढ़ी हैं.

रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकरन का कहना है, ''आर्थिक विकास उम्मीद के भी कम हुआ है और इसका महंगाई पर सकारात्मक असर होगा.''

उनका कहना था तेल के दामों में उम्मीद के ज्यादा कमी आई है और यहीं दो कारण है जिससे मोद्रिक नीति में ढ़ील दी जा सकती है.

भारत के केंद्रीय बैंक वर्ष 2012-2013 के लिए मौद्रिक नीति पर पहली तिमाही समीक्षा का ऐलान जुन 18 को करेगा.

भारतीय रिजर्व बैंक ने सुस्त पड़ती आर्थिक विकास की दर को रफ़्तार देने के लिए रेपो रेट में आधे प्रतिशत की कटौती करने की घोषणा की थी.

भारत की आर्थिक विकास दर चौथी तिमाही में गिरकर 5. 3 प्रतिशत तक पहुंच गई थी जो कि पिछले नौ सालों में सबसे कम दर्ज की गई है.

इसका कारण निर्माण और कृषि क्षेत्र में खराब प्रदर्शन को बताया जा रहा है.

इसकी वजह से वर्ष 2011-2012 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की दर पिछले साल की तुलना में 8.4 प्रतिशत से गिरकर 6.5 प्रतिशत पर पहुंच गई थी.

हालांकि अप्रैल महीने के लिए मूल्य आधारित थोक मूल्य मुद्रास्फीति 6.9 से बढ़कर 7.23 प्रतिशत हो गई है.

इस बीच कच्चे तेल की कीमत पहली बार पिछले आठ महीनों में 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है, जब यूरो जोन कर्ज़ संकंट से जुझ रहा है.

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