रेटिंग पर धमकी: 'निवेशकर्ता तो पहले ही चला गया है'

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Image caption स्टैंडर्ड एंड पुअर्स पहले भी भारत की रेटिंग गिरा चुकी है

अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स की भारत की पूँजी निवेश रेटिंग गिराने की चेतावनी कोई आश्चर्य की बात नहीं है और संभवत: उसका बहुत अधिक असर नहीं पड़ने चाहिए. ये कहना है आर्थिक मामलों के जानकार प्रणजय गुहा ठाकुरता का.

ठाकुरता कहते हैं कि भारतीय बाज़ार से विदेशी निवेशकर्ता पहले ही चले गए हैं और अब अगर रेटिंग गिरती है तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि ब्रिक देशों (चीन, भारत, ब्राज़ील और रुस) में भारत पहला देश हो सकता है जिसकी क्रेडिट रेटिंग नेगेटिव में जा सकती है.

हालांकि भारत सरकार ने कहा है कि सरकार क्रेडिट रेटिंग ठीक करने के लिए कड़े कदम उठा रही है.

'छवि पर भी ज्यादा असर नहीं'

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार वित्त सचिव आरएस गुजराल ने कहा, ‘‘हम प्रयास कर रहे हैं और कई कदम उठा रहे हैं जिससे वित्तीय घाटे को कम किया जा सकेगा.’’

प्रणजय कहते हैं कि ऐसा लगता नहीं है कि सरकार कुछ भी कर रही है. वो कहते हैं कि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स द्वारा क्रेडिट रेटिंग गिराने से भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी छवि को बहुत नुकसान नहीं होने वाला है क्योंकि पूरा विश्व ही आर्थिक सुस्ती के दौर से गुज़र रहा है.

वो कहते हैं, ‘‘ये रेटिंग विदेशी निवेशकों के लिए एक गाइड होती है. लेकिन भारत में हालात खराब हैं तो दुनिया के अन्य देशों में भी हालात उतने ही खराब हैं. ग्रीस को देखिए..स्पेन को देखिए.. इटली के भी हालात खराब हैं. दुनिया के 192 देशों में से कुछ ही देश ऐसे हैं जहां हालात अच्छे होंगे. हो सकता है कि आने वाले दिनों में दुनिया एक बड़ी मंदी के दौर से गुजरे.’’

प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने भी चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में पूरी दुनिया में भयंकर मंदी का दौर आ सकता है.

ठाकुरता कहते हैं, ‘‘सकल घरेलू उत्पाद कम होकर 5.3 प्रतिशत तक आ गया है. औद्योगिक उत्पादन गिरा है. एक बात ये है कि चीन की भी स्थिति कोई खास अच्छी नहीं है. रुपए का भाव डॉलर के मुकाबले में कम हो गया है. पूरा माहौल ही मंदी का बन पड़ा है. दूसरी बात ये है कि राजनीतिक स्तर पर भी कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है भारत में. गठबंधन की राजनीति हो या जो भी कारण हो, नीतिगत लाचारी तो दिखती ही है.’’

ठाकुरता से जब ये पूछा गया कि क्या सरकार कोई कदम उठा रही है जिससे स्थिति को सुधारा जा सके, तो उनका कहना था कि ऐसा लगता नहीं है.

उनका कहना है, "आर्थिक सलाहकार बोल रहे हैं कि विश्व स्तर पर आर्थिक सूनामी आ सकती है. यूपीए-2 की सरकार बहुत कमजोर लगती है. गठबंधन ही नहीं, कांग्रेस पार्टी में एक बड़ा तबका है जो आर्थिक सुधारों का विरोध करता है. तो स्थितियां खराब हैं राजनीतिक दृष्टि से भी.’’

ठाकुरता कहते हैं कि मंदी के दौर में एक ही अच्छी खबर आ रही है और वे कच्चे तेल की कीमत गिर रही रही है और तेल की खपत के लिए तेल आयात करने वालों को कम पैसा देना पड़ेगा.

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