रुपए की अस्थिरता चिंता का विषय: प्रणब

प्रणब मुखर्जी
Image caption सरकार की कथित नीति जड़ता पर मुखर्जी ने तेल के घटते दामों का हवाला दिया

भारतीय रुपए की अस्थिरता पर चिंता जताते हुए भारतीय वित्त मंत्री और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि भारतीय निर्यात बाज़ार में विविधता लाने की सख्त जरूरत है.

भारतीय बैंक एसोसिएशन की एक बैठक में उन्होंने कहा, “रुपए की अस्थिरता अभी भी चिंता का विषय है. निर्यात की धीमी रफ्तार और वर्तमान खाता घाटे को देखते हुए हमें अपने निर्यात में विविधता लाने की जरूरत है.”

हालाँकि वित्त मंत्री के मुताबिक अच्छी बात ये हुई है कि तेल के दाम में तेजी से गिरावट आई है जिससे व्यापार घाटे को संभालने में मदद मिलेगी.

पिछले वित्तीय वर्ष में तेल के बढ़े दाम और सोने के आयात के कारण भारत का व्यापार घाटा 190 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया था.

धीमी आर्थिक विकास पर सरकार की आलोचना पर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात अनुकूल नहीं हैं. उन्होंने यूरोजोन संकट पर चिंता जताई और उसे भी धीमी अर्थव्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराया.

मुखर्जी ने कहा, “हर कोई ग्रीस चुनाव के नतीजे की ओर देख रहा है कि सुधारवादियों को जनादेश मिलता है या नहीं.”

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मुद्रा नीति की होने वाली समीक्षा पर उन्होंने कहा कि बैंक को अर्थव्यवस्था की हालत और राजस्व घाटा जैसी बातों को ध्यान में रखना चाहिए.

सरकार की कथित नीति जड़ता पर हो रही तीखी आलोचनाओं पर मुखर्जी ने तेल के घटते दामों का हवाला दिया.

उन्होंने कहा, “कुछ चीज़ें सुधरना शुरू हो गई हैं. रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को घटाया है. खनन उद्योग से सुधार के संकेत मिल रहे हैं. बिजली उद्योगों को मिलने वाले कोयले पर प्रगति हुई है. तेल के दाम भी नीचे आए हैं, लेकिन रुपए की अस्थिरता चिंता का विषय है.”

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