विश्व की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में: मनमोहन

इमेज कॉपीरइट AFP

जी 20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मेक्सिको गए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि विश्व की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है पर उन्होंने उम्मीद जताई कि इस संकट से निकलने के लिए जी 20 देशों का समूह सकारात्मक प्रस्तावों के साथ सामने आएगा.

पीटीआई के मुताबिक मनमोहन सिंह ने कहा कि विकास को बढ़ावा देने के लिए जी 20 देशों को आधारभूत ढाँचे में निवेश पर जोर देना चाहिए.

जी 20 की बैठक यूरोजोन संकट के परिदृश्य में हो रही है. ग्रीस में भी उथल पुथल मची हुई. माना जा रहा है कि इस सम्मेलन में भारत अहम भूमिका निभाएगा. विश्व जीडीपी का 80 प्रतिशत हिस्सा जी 20 देशों से आता है.

यूरोप पर चिंता

सम्मेलन के लिए अन्य देशों के नेताओं ने भी यूरोपीय देशों से आग्रह किया है कि वे यूरोजोन संकट के हल के लिए हर संभव कदम उठाएँ. अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने धीमी होती आर्थिक विकास की गति पर चिंता जताई. जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल का कहना था कि यूरोप ये बताना चाहता है कि वो आर्थिक संकट से निपटने के कदम उठा रहा है.

वहीं यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष होजे मेनुएल बरोसो ने कहा है कि वैश्विक मंदी के लिए केवल यूरोप ही जिम्मेदार नहीं है और यूरोपीय नेता मेक्सिको में लेक्चर सुनने के लिए नहीं आए हैं.

दो दिन के इस सम्मेलन से पहले बराक ओबामा और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने भी मुलाकात की. सीरिया से निपटने को लेकर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हैं. जब मई में जी-8 देशों का अमरीका में सम्मेलन हुआ था तो पुतिन नहीं आए थे और उन्होंने प्रधानमंत्री दिमित्रि मेदवेदेव को भेज दिया था.

जी 20 से पहले दोनों नेताओं ने सीरिया पर बातचीत की. पुतिन ने कहा कि कई मुद्दों पर राय एक जैसी है. वहीं ओबामा का कहना था कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि सीरिया में हिंसा खत्म होनी चाहिए. ओबामा ने उम्मीद जताई कि सीरिया पर जो भी मतभेद हैं वो दूर कर लिए जाएँगे.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वॉकर के मुताबिक एक जहाँ यूरोप चिंता का बड़ा कारण है वहीं अमरीका और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं को लेकर भी समस्या है. उन्होंने कहा कि भारत में विकास की धीमी हुई गति भी चिंता की बात है.

इस बीच ब्रिक्स देशों के नेताओं ने भी अलग से मुलाकात की है.इन देशों ने कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को दिया जाने वाला आर्थिक योगदान बढ़ा सकते हैं लेकिन उन्हें संस्था पर ज्यादा नियंत्रण चाहिए. ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका को ब्रिक्स के तौर पर जाना जाता है.

संबंधित समाचार