रिजर्व बैंक ने निकाली शेयर बाजार की हवा

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Image caption बाजार को उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में तबदीली कर सकता है.

ग्रीस संसदीय चुनावों में सुधारवादियों की जीत से जहां एशिया के बाजारों में सोमवार को बढ़त देखी गई, वहीं ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव न करने के रिजर्व बैंक के फैसले के बाद भारतीय शेयर बाजार में गिरावट हावी हो गई है.

रिजर्व बैंक की घोषणा के बाद 30 शेयरों वाला सेंसेक्स जहां 84 अंकों की गिरावट के साथ 16,866 पर आ गया वहीं 50 शेयरों वाले निफ्टी ने 31 अंकों का गोता खाया और 5,108 अंकों पर पहुंच गया.

सबसे ज्यादा गिरावट आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और एचडीएफसी के शेयरों में देखी गई.

मुद्रास्फीति का दबाव

रिजर्व बैंक की नीति समीक्षा घोषणा से पहले भारतीय बाजार बढ़त के साथ खुले जिसे ग्रीस के चुनावों में राहत पैकेज समर्थक न्यू डेमोक्रेसी पार्टी की जीत के बाद एशियाई बाजारों में आई बढ़त के रुझान के तौर पर देखा जा रहा था.

लेकिन जब भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को आठ प्रतिशत और कैश रिजर्व रेशियो यानी सीआरआर को 4.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा है, तो ये बढ़त जाती रही.

रेपो रेट उस दर को कहते हैं जिस पर केंद्रीय बैंक दूसरे बैंकों को कर्ज देता है जबकि सीआरआर वो राशि होती है जिसे बैंक अपनी नकदी जमा में से एक निश्चित राशि निकालकर रिजर्व बैंक में जमा करते हैं.

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि रेपो रेट और सीआरआर को यथावत रखने के बारे में विचार करते समय रिजर्व बैंक पर बढती हुई मुद्रास्फीति का दबाव रहा होगा.

ग्रीस ने दी राहत

इससे पहले ग्रीस के संसदीय चुनाव में दक्षिणपंथी न्यू डेमोक्रेसी की जीत की संभावना का एशिया के बाजारों ने सोमवार को स्वागत किया और जापान के निक्केई से लेकर ऑस्ट्रेलिया के एसेक्स सूचकांक तक में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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Image caption ग्रीस में यूरोपीय राहत पैकेज का समर्थन करने वाली न्यू डेमोक्रेसी पार्टी को मामूली बढ़त हासिल हुई है.

न्यू डेमोक्रेसी के नेता ने यूरोजोन में बने रहने को लेकर बयान दिया है.

वामपंथी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के पहले आए बयानों और सरकारी खर्च में कटौतियो को लेकर जनता में उभरे गुस्से को लेकर समझा जा रहा था कि वहां वामपंथी दलों को बढ़त मिलेगी और ग्रीस यूरोजोन से बाहर चला जाएगा.

इससे ये चिंता जताई जा रही थी कि जो धन उसे कर्ज संकट से उबारने के लिए दिया गया था, वो वापस नहीं मिल पाएगा जिसका असर यूरोप के दूसरे देशों पर भी पड़ेगा.

लेकिन न्यू डेमोक्रेसी ने कहा है कि यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने जो मदद मुहैया करवाई थी, वो उसका समर्थन करता है.

संभले बाजार

सोमवार को जापान का निक्केई और दक्षिणी कोरिया के कोप्सी सूचकांक में 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई जबकि ऑस्ट्रेलियाई सूचकांक डेढ़ प्रतिशत ऊपर गया.

शेयर बाजार विश्लेषक मायासुकी दोशिदा का कहना था कि हर कोई राहत की सांस ले रहा है और ये भावना दूसरे बाजारों में भी पहुंचेगी.

मुद्रा बाजार में, यूरो में डॉलर के मुकाबले एक फीसदी की मजबूती देखी गई और वो एक माह के सबसे ऊंचे के स्तर 1.27 के स्तर पर जा पहुंचा.

कच्चे तेल का बाजार ये समझ रहा है कि यूरोजोन में स्थायित्व के बाद मांग में बढ़ोतरी आएगी, जिसके बाद कच्चे तेल के भाव में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछाल देखा जा रहा है.

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