क्या मारुति 'पंचर' हुई ?

 गुरुवार, 19 जुलाई, 2012 को 19:19 IST तक के समाचार
मारुती

मारुती की कार बाज़ार में हिस्सेदारी लगातर नीचे गिरती जा रही है

भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड के मानेसर प्लांट में उपद्रव के बाद कंपनी के ऊपर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.

मारुति के मानेसर प्लांट में बुधवार को हुए हंगामे से गुरूवार सुबह शेयर बाजार का रुख अपेक्षित रूप से नकारात्मक था. सुबह जब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज खुला तो मारुति के शेयरों में तेज़ी से गिरावट देखी गई.

सुबह क़रीब 1215 रुपए पर खुला शेयर सूचकांक गिरते-गिरते 1113 रुपयों के नज़दीक पहुँच गया. लेकिन बाद में फिर कुछ संभला और करीब 1117 रुपयों के नज़दीक बंद हुआ.

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग अर्थव्यवस्था में ढीलेपन की वजह से संकट में है. पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और ऊँची हुई कार लोन दरों में उद्योग की रफ़्तार में बाधाएं खड़ी कर दीं हैं.

"मारुति के सामने मानेसर के अलावा भी चुनौतियां हैं जिन्हें अगर मारुति ने समय रहते नहीं ठीक किया तो वो संकट में पड़ सकती है."

रोनोजोय मुखर्जी, ऑटो विश्लेषक

ऐसे समय में जब डीज़ल गाड़ियों की बिक्री बढ़ती जा रही है मारुति के मानेसर प्लांट में काम का बंद होना मारुति के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं है.

ऑटोमोबाइल उद्योग पर नज़र रखने वाले विश्लेषक रोनोजोय मुखर्जी का कहना है, "मानेसर प्लांट के कारण मारुति की दुविधाएं बढ़ती जा रही हैं. यह वही प्लांट है जहाँ मारुति डीज़ल की गाड़ियां बनाती है. डीज़ल इंजन बनाती है. मारुति की गाड़ियों की वेटिंग लिस्ट और ज़्यादा बढ़ जायेगी."

क्या कम हुआ लोगों का भरोसा?

रोनोजोय का कहना है कि, "मारुति के सामने मानेसर के अलावा भी चुनौतियां हैं जिन्हें अगर मारुति ने समय रहते नहीं ठीक किया तो वो संकट में पड़ सकती है. मारुति के पास स्विफ्ट, ऑल्टो और ऐन्डिगा जैसी कुछ ही गाड़ियां हैं जो अच्छा कर रही हैं बाकि सभी साबित करती हैं कि कहीं ना कहीं कंपनी को दिक्कत तो है ही."

"लोग अभी भी किसी भी मारुति के लिए आठ लाख से ऊपर देने के लिए तैयार नहीं दिख रहे. किजाशी और ग्रैंड विटारा जैसे इसके मॉडल लोगो के बीच कोई जगह ही नहीं बना पा रहे."

श्रीराम नारायणन, एसोसिएट एडिटर, टॉप गियर

मुंबई से निकलने वाली ऑटो पत्रिका टॉप गियर में एसोसिएट एडिटर श्रीराम नारायणन का कहना है, "लोग अभी भी किसी भी मारुति के लिए आठ लाख से ऊपर देने के लिए तैयार नहीं दिख रहे. किज़ाशी और ग्रैंड विटारा जैसे इसके मॉडल लोगों के बीच कोई जगह ही नहीं बना पा रहे."

लेकिन श्रीराम को लगता है कि मारुति की गाड़ी को अभी भी कोई बड़ा ख़तरा नहीं है. बावजूद तमाम समस्याओं के श्रीराम के अनुसार आज भी मारुति का डीलर नेटवर्क सबसे बेहतर है और इस पर लोगों का भरोसा बना हुआ है. उनके हिसाब से ग्राहकों को सर्विस देने के मामले में आज भी मारुति बेहद अच्छा काम कर रही है.

वहीं रोनोजोय मुखर्जी का साफ़ मानना है कि अगर मारुति ने जल्द ही कुछ और ऐसे मॉडल बाज़ार में नहीं उतारे जो बेहद लोकप्रिय हों तो कंपनी की गाड़ी पंचर हो सकती हैं.

मुखर्जी का कहना है, "जब मारुति बाज़ार के 80 फ़ीसदी हिस्से पर काबिज़ थी तब इन्हें लगता था कि इन्हें कभी कोई चुनौती दे ही नहीं सकता इन्होने डीज़ल इंजन के ऊपर नए मॉडलों को लाने के ऊपर ध्यान दिया नहीं और गिरते-गिरते इनका बाज़ार में हिस्सा 50 फ़ीसदी के नीचे पहुँच गया."

यानी मारुति का पेट्रोल ख़त्म भले ना हुआ हो लेकिन रिज़र्व में तो आ ही गया है.

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