ब्रिटेन में जापानी 'कारों' का दबदबा

कार
Image caption एक सर्वेक्षण में जापान की कार कंपनियों को सबसे भरोसेमंद बताया गया है.

ब्रिटेन में हुए एक सर्वेक्षण में जापान की कार निर्माता कंपनी होंडा, टोयोटा और लेक्सस को ब्रिटेन में सबसे ज्य़ादा भरोसेमंद कार ब्रांड का दर्जा दिया गया है.

'व्हॉट कार?' और 'वॉरंटी डायरेक्ट' द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में जापान की ही सुज़ूकी और सुबारु को चौथा और पांचवां स्थान दिया गया है.

ये सर्वेक्षण तीन से 10 साल तक इस्तेमाल में रही कारों पर किया गया था.

सर्वेक्षण में दक्षिण कोरियाई कंपनी हुंडई को जापानी कंपनी माज़दा और मित्सुबिशी के साथ संयुक्त तौर पर छठा स्थान मिला है.

वहीं लैंड-रोवर को इस सर्वे में सबसे ज्यादा गैर-भरोसमंद कार कंपनी बताया गया है.

अन्य महंगी और बड़ी कारों की कंपनियों में ऑडी, जैगुआर और मर्सिडीज़ भी उन 10 कारों की सूची में शामिल है जिनकी विश्वसनियता कम पायी गई है.

'भरोसेमंद' गाड़ियां

सर्वेक्षण करने वाले व्हॉट कार के मुख्य संपादक चैस हैलट ने कहा, ''इन कारों को बाज़ार में बेहतर प्रदर्शन की ज़रुरत है. विश्वसनीयता के मामले में इनका पिछड़ना कई लोगों को सकते में ला सकती है.''

वे आगे कहते हैं, ''एक गाड़ी चलाने के लिए भरोसा बेहद ज़रुरी चीज़ है, खासकर कठिन हालातों में.''

इस सर्वेक्षण में शामिल 50,000 वॉरंटी डायरेक्ट पॉलिसी के अनुसार जिन लोगों के पास होंडा की गाड़ी है उनके कार के खराब होने के आसार 10 प्रतिशत तक हो सकते हैं.

चैस हैलट के अनुसार, ''जापानी कार कंपनियां अपनी विश्वसनीयता को बरकरार रखने की भरपूर कोशिश करती हैं और होंडा इनमें सबसे बेहतर हैं.''

होंडा कंपनी भरोसेमंद कार कंपनियों की सूची में लगातार सात साल से पहले स्थान पर बनी हुई है.

अमरीकी कार कंपनी शेवरले एशिया के बाहर की इकलौती कंपनी थी जो 10 भरोसेमंद कार कंपनियों में शामिल है.

शेवरले गाड़ियों के साल में कम से कम एक बार खराब होने की आशंका 22 प्रतिशत तक होती है.

तुलना

तुलनात्मक तौर पर इस सूची में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली जापानी ब्रांड 'निसान' रही, जिसके खराब होने का प्रतिशत 25 प्रतिशत था. ये दक्षिण कोरिया के 'किया' से सिर्फ एक प्रतिशत कम है.

सर्वेक्षण में दक्षिण कोरियाई कंपनी 'किया' की गाड़ियां 26 फीसदी तक नाकामयाब पाई गई.

हालांकि इस सर्वेक्षण में ये भी कहा गया है कि, ''अपवाद के तौर पर 'लैंड-रोवर' के हर दस कार मालिकों में से सात को किसी भी समय कार में खराबी का सामना करना पड़ सकता है.

अन्य लक्ज़री गाड़ियां 41 से 45 प्रतिशत तक नाकामयाब पाई गई, जबकि यूरोपीय ब्रांड की कार कंपनियों की विफलता का प्रतिशत 31 से 55 के बीच रहा.

वॉरंटी डायरेक्ट के प्रबंध निदेशक, डंकन मैकल्यूर फिशर के मुताबिक, ''कारें अब काफी पेचिदा होती जा रही हैं. कारों के बोर्ड में विभिन्न तरह के उपकरणों की संख्या बढ़ती जा रही है खासकर लक्ज़री और एक्जिक्युटिव गाड़ियों में. अब खरीदार भी पैसों के बदले ज्यादा से ज्यादा सुविधा चाहते हैं.''

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