यूरोज़ोन में फिर 'आर्थिक मंदी' ?

 शुक्रवार, 24 अगस्त, 2012 को 20:01 IST तक के समाचार

ये लगातार सातवाँ महीना है जब यूरोज़ोन के निजी क्षेत्र में उत्पादन घटा है.

ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था जुलाई से सितंबर की तिमाही में 0.5 से 0.6 प्रतिशत घटेगी.

अगर ऐसा होता है तो तीन साल में ये दूसरा मौका होगा जब यूरोज़ोन में आर्थिक मंदी की स्थिति होगी.

किसी देश या अर्थव्यवस्था में जब लगातार दो तिमाही तक नकारात्मक विकास दर रहती है, तब उसे आर्थिक मंदी कहा जाता है.

ये बात एक सर्वे में सामने आई है. मार्कइट फ़्लैश यूरोज़ोन पीएमआई कॉम्पोज़िट आउटपुट इंडेक्स उत्पादन और सेवा क्षेत्रों में बाज़ार की मांग का आंकलन करता है.

सर्वे में पाया गया कि जुलाई में इस सूचकांक की 46.5 माप की तुलना में अगस्त में ये आंकड़ा घट कर 46.6 हो गया है.

सूचकांक में 50 से कम के आंकड़े का मतलब है अर्थव्यवस्था का सिकुड़ना या धीमा होना.

ये लगातार सातवाँ महीना है जब यूरोज़ोन के निजी क्षेत्र में उत्पादन घटा है.

मंदी की ओर पहला कदम?

मार्कइट कंपनी के वरिष्ठ अर्थशास्त्री रॉब डॉबसन कहते हैं, "अगस्त महीने के लिए इस सूचकांक का आंकड़ा एक बार फिर इस धारणा को बल देता है कि वर्ष 2012 की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था मंदी में जा रही है".

इस वर्ष की दूसरी तिमाही में यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था में 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी.

वैश्विक वित्तीय संस्था आईएनजी में वरिष्ठ अर्थशास्त्री जूलियन मांसो का कहना था, "कॉम्पोज़िट पीएमआई सूचकांक का आंकड़ा साबित करता है कि दूसरी तिमाही में यूरोज़ोन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट, तकनीकी तौर पर आर्थिक मंदी की ओर पहला कदम हो सकता है."

यहां तक कि जर्मनी, जो यूरोज़ोन की सबसे मज़बूत अर्थव्यस्था है, उसके उत्पादन में भी तेज़ी से गिरावट दिखी.

थायसेनक्रुप और ओपल जैसी जर्मनी की ब्लू-चिप कंपनियों ने कमज़ोर मांग की वजह से काम के घंटे कम कर दिए हैं जबकि बॉश ने घोषणा की है कि वो अपने कर्मचारियों के साथ काम के घंटे कम करने के बारे में बातचीत कर रही है.

कुछ विश्लेषकों के मुताबिक यूरोज़ोन अर्थव्यवस्था सिकुड़ने के बावजूद अर्थव्यवस्था बरबादी की कगार पर नहीं है.

लेकिन फ्रांस में उत्पादन में हो रही गिरावट धीमी पड़ी है. अगस्त में कॉम्पोज़िट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स का आंकड़ा पिछले छह महीने में सबसे ज़्यादा रहा.

आशा की किरण

कुछ विश्लेषकों को मार्कइट सूचकांक के आंकड़ों में आशा की किरण नज़र आती है.

अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी की पूर्वानुमान करने वाली संस्था में वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार मारी डिरोन कहती हैं कि ये आंकड़े यूरोज़ोन अर्थव्यवस्था में "स्थिरता के संकेतों" की ओर इशारा करते हैं और "हमारे दृष्टिकोण का समर्थन करता है कि सिकुड़ने के बावजूद यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था बरबादी की कगार पर नहीं है."

डिरोन ने कहा, "जर्मनी और फ़्रांस के उत्पादन सर्वेक्षणों में उत्पादन क्षेत्र में दोंनो ही देशों में बेहतर नतीजे दिखे."

चीन के गिरते उत्पादन आंकड़ों के बारे में कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ये दर्शाते हैं कि चीनी सरकार के अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिशें ज़्यादा असरदायक नहीं रही हैं.

उधर अमरीकी उत्पादन के आंकड़ों से लगता है कि इस क्षेत्र में इस महीने थोड़ा सुधार हुआ है.

जुलाई में पीएमआई आंकड़ा 51.4 था जो अगस्त में बढ़कर 51.9 हो गया.

लेकिन मार्कइट के मुताबिक पहले पांच महीनों में इस सुधार के बावजूद कमज़ोर निर्यात बाज़ार दिखाते हैं कि विदेश में अमरीकी उत्पादों की मांग कम रही है.

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