दक्षिण चीन सागर से दूर रहे भारत: चीन

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Image caption इस क्षेत्र में कई देशों से चीन का विवाद बना हुआ है.

चीन ने वियतनाम पर अपनी संपूर्ण संप्रभुता का दावा करते हुए भारत और दूसरे देशों से कहा है कि वे दक्षिणी चीन सागर में वियतनाम की ओर से प्रस्तावित समुद्री इलाक़ों में तेल की खोज से दूर रहें.

गुरूवार को चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जियांग यू ने एक बयान जारी कर कहा, ‘‘मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहती हूं कि दक्षिणी चीन सागर पर चीन की पूरी संप्रभुता है. चीन का पक्ष ऐतिहासिक तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय क़ानून पर आधारित है.’’

यह पूछे जाने पर कि भारत का यह क़दम वियतनाम के उस दावे पर आधारित है जिसमें वियतनाम 1982 के एक संयुक्त राष्ट्र समझौतै का हवाला देते हुए दो तेल क्षेत्रों पर अपना दावा करता है, जियांग ने कहा कि इस इलाक़े में चीन के संप्रभु अधिकारों की बात चीन सरकार की ओर से एक लंबे समय से कही जाती रही है.

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने भारतीय कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड की वियतनाम के दो तेल क्षेत्रों में तेल की खोज की योजना से जुड़ी ख़बरों पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए ये बातें कहीं.

हनोई में शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्री एस एम कृष्णा और उनके वियतनाम के समकक्ष के बीच होने वाली बातचीत के दौरान भी यह मुद्दा उठ सकता है.

जियांग ने कहा कि उन्होंने मीडिया में आई ख़बरों के बारे में नहीं सुना है लेकिन साथ ही उन्होंने ये बात फिर दोहराई कि दक्षिणी चीन सागर पर चीन का अधिकार ऐतिहासिक तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय क़ानून पर आधारित है.

उन्होंने कहा, ‘‘इस आधार पर चीन क्षेत्रीय संप्रभुता एवं समुद्री अधिकार से जुड़े मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए मित्रवत बातचीत को तैयार है.’’

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम आशा करते हैं कि संबंधित देश चीन के पक्ष का सम्मान करेंगे और इस मुद्दे पर एकतरफ़ा क़दम उठाने से परहेज़ करेंगे.’’

प्रवक्ता ने आगे कहा, ''जहां तक तेल और गैस की खोज का सवाल है चीन हमेशा से अपने अधिकार क्षेत्रवाले समुद्री इलाक़ों में किसी भी देश के ज़रिए तेल और गैस की खोज के कार्यक्रम के ख़िलाफ़ रहा है. हमें उम्मीद है कि अन्य देश दक्षिण चीन सागर विवाद में हस्तक्षेप नहीं करेंगें.''

भारत-वियतनाम

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने एक बयान जारी कर कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत वियतनाम के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प है.

उन्होंने कहा कि वियतनाम या किसी भी देश के साथ भारत का संबंध हमेशा से अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़ रहा है.

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर भारत की स्थिति को स्पष्ट करते हुए विष्णु प्रकाश ने कहा, ''भारत दक्षिण चीन सागर में जहाज़ो की आवाजाही की आज़ादी का समर्थन करता है और आशा करता है कि इस विवाद से जुड़े सभी पक्ष 2002 में की गई घोषणा का पालन करेंगे.''

पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपने अधिकार का दावा करने के कारण उस इलाक़े में चीन का वियतनाम, जापान और फ़िलिपीन्स समेत कई देशों के साथ विवाद बना हुआ है.

अमरीका, चीन के दावों को ख़ारिज करते हुए दूसरे देशों के अधिकारों का समर्थन करता है और ये पहली बार है जब भारत भी इस विवाद में शामिल हो गया है.

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