चीनी अंतरिक्ष यान कक्ष में स्थापित

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Image caption शेनज़ू-8 अंतरिक्ष यान उड़ान भरते हुए.

चीन ने पहली बार दो अंतरिक्ष यानों को एक साथ पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सफलता पाई है.

इस सप्ताह के शुरू में भेजा गया मानवरहित अंतरिक्षयान शेनज़ू-8 ग्रीनिच मानक समयानुसार गुरूवार को पांच बजकर 29 मिनट पर वहां पहले से मौजूद तियांग्यांग से जुट गया.

उन दोनों का संपर्क चीन के ठीक ऊपर लगभग 340 किलोमीटर की ऊंचाई पर हुआ था लेकिन पृथ्वी पर बीजिंग ऐरोस्पेस फ़्लाईट कंट्रोल सेंटर पर लोगों ने उसे लाईव देखा था.

चीन अगर इस दशक के अंत तक अंतरिक्ष स्टेशन बनाना शुरू करना चाहता है तो उसके लिए दो अंतरिक्ष यानों को एक साथ कक्ष में भेजने की क्षमता पैदा करना आवश्यक था.

फ़िलहाल शेनज़ू-8 अंतरिक्ष यान में कोई अंतरिक्ष यात्री नहीं है लेकिन भविष्य में उस यान में अंतरिक्ष यात्रियों को भी भेजा जाएगा.

शेनज़ू-8 और तियांग्यांग दो सप्ताह तक एक साथ पृथ्वी का चक्कर लगाएंगे और उसके बाद शेनज़ू-8 ज़मीन पर वापस आ जाएगा.

चीन एयरोस्पेस के प्रोफ़ेसर यांग युगुआंग ने चीन के राष्ट्रीय टीवी को बताया, ''लगभग 12 दिनों के संयुक्त उड़ान के बाद दोनों यान अलग होंगे. उसके बाद वे दोनों दोबारा कक्ष में दाख़िल होंगे. उसके बाद दोनों दो दिनों तक उड़ान भरेंगे. उसके बाद दोनों एक दूसरे से पांच किलोमीटर की दूरी पर चले जाएंगे. उसके बाद शेनज़ू-8 अंतरिक्ष यान पृथ्वी में दाख़िल होगा.''

जर्मनी स्पेस एजेंसी ने प्रयोग के लिए यान के साथ एक बक्सा भेजा है जिसमें मछली, पौधे, बैक्टेरिया, मानव कैंसर कोशिकाएं शामिल हैं.

अगर शेनज़ू-8 की उड़ान योजना अनुसार होती है तो उम्मीद है कि चीन 2012 में अंतरिक्ष यात्रियों के साथ दो और अंतरिक्ष यान भेजेगा.

अंतरिक्ष स्टेशन की तैयारी

इनमें से एक में उम्मीद है कि चीन की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री भी हो सकती है.

चीन का मानना है कि ये उड़ान उसके लिए सीखने का अच्छा मौक़ा है जिससे उसे अंतरिक्ष स्टेशन बनाने में मदद मिलेगी.

आशा है कि 2020 से पहले उसकी शुरूआत हो सकती है.

लगभग 60 टन वज़न वाला ये चीनी अंतरिक्ष स्टेशन अमरीका, रूस, जापान, कनाडा और यूरोप के ज़रिए संचालित 400 टन वज़न वाले अंतरिक्ष स्टेशन से काफ़ी छोटा होगा.

चीन अपने अंतरिक्ष परियोजना में अरबों डॉलर ख़र्च कर रहा है. इससे पहले वो चंद्रमा पर दो उपग्रह भेज चुका है और तीसरा जाने वाला है.

अगले सप्ताह मंगल ग्रह पर भी चीन अपना एक उपग्रह भेजने की तैयारी कर रहा है.

इस तरह की ख़बरें आ रहीं हैं कि यूरोपीय देश चीन से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन परियोजना में शामिल होने को कह सकते हैं लेकिन चीन और अमरीका के बीच मौजूदा संबंधों को देखते हुए ऐसा होने की संभावना कम है.

अमरीका अंतरिक्ष में चीन की गतिविधियों को लेकर काफ़ी चिंतित है ख़ासकर सैन्य क्षेत्र में.

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