चीन के पहले विमानवाहक युद्धपोत की 'तस्वीरें'

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अमरीका की एक व्यावसायिक सैटेलाइट कंपनी का दावा है कि वो चीन के पहले विमानवाहक युद्धपोत की तस्वीरें खींचने में सफल हो गई है. कहा जा रहा है कि ये तस्वीरें पीले सागर में परीक्षण के दौरान खींची गई हैं.

एपी के मुताबिक डिजिटल ग्लोब कंपनी के अधिकारी स्टीफ़न वुड ने बताया है कि विमानवाहक युद्धपोत की तस्वीरें आठ दिसंबर को कंपनी के सैटेलाइट ने ली हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि ये चीनी विमानवाहक ही था.चीन ने इस दावे का खंडन नहीं किया है.

अगर इसकी पुष्टि हो जाती है तो ये इस विमानवाहक यु्द्धपोत की पहली तस्वीर होगी जो सार्वजनिक हुई है. ये पहले वर्याग नाम का सोवियत संघ समय का यु्द्धपोत था जिसका निर्माण पूरा नहीं हो सका था. अब चीन इसमें बदलाव कर रहा है.

चीनी मीडिया के अनुसार इसके परीक्षण अगस्त में शुरु हुए थे.

ये माना जा रहा है कि इस विमानवाहक युद्धपोत को एक शक्तिशाली युद्धपोत के तौर पर इस्तेमाल करने में चीन को काफ़ी समय लगेगा लेकिन चीन की सैन्य ताकत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है.

चीनी सैन्य ताकत

चीन इस समय फ़िलीपींस, वियतनाम और जापान समेत समुद्री सीमा से जुड़े कई विवादों में उलझा हुआ है, ख़ासकर साउथ चाइना सी में.

जब 1991 में सोवियत संघ विघटित हो गया था, उसके बाद वर्याग नाम के इस पोत में यूक्रेन के डॉकयार्ड में जंग लग रहा था.

कई सोवियत युद्धपोतों को कबाड़ के लिए तोड़ा जा रहा था, तभी एक चीनी कंपनी ने वर्याग को ख़रीद लिया. इस कंपनी का संबंध चीन की पीपल्स लिबरेशन (पीएलए) आर्मी से था. शुरु में कहा गया था कि इसे तैरते कसिनो में तब्दील किया जाएगा.

कई वर्षों बाद इसे यूक्रेन से चीन लाया जा सके. जून में पीएलए ने पुष्टि की थी कि चीन अपना पहला एयरक्रफ़ाट कैरियर तैयार कर रहा है.

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