चीन में 'बंधक' भारतीय छूटे

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Image caption यीवू व्यवसाय का एक बड़ा केंद्र है जहाँ बहुत भारतीय व्यापारी खरीद फरोख्त के लिए जाते हैं

भारतीय नागरिकों और एक राजनयिक के साथ चीन के यीवू में हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर भारत और चीन के बीच चल रहे कूटनीतिक विवाद का अंत हो गया है और दोनों नागरिक अब रिहा होकर शंघाई के लिए रवाना हो गए हैं.

तीन दिन पहले यीवू में दो भारतीय लोगों और एक भारतीय राजनयिक के साथ कथित ज़ोर ज़बरदस्ती के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया था और भारत ने दिल्ली में चीन के राजदूत से जवाब तलब किया था.

भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने बुधवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए इस बाबत जानकारी दी.

कृष्णा ने बताया कि यीवू में जबरन रोके गए दोनों व्यापारी दीपक रहेजा और श्यामसुंदर अग्रवाल भारतीय राजनयिकों साथ के शंघाई की ओर सुरक्षित रवाना हो गए हैं.

उनका कहना था कि चीन के राजदूत से मुलाक़ात के बाद वो पूरी तरह से संतुष्ट हैं और उन्हें लगता है कि भारत कि हर आशंका का समाधान हो गया है.

भारतीय चेतावनी

मंगलवार को चीन में भारत के दूतावास ने चीन में मौजूद भारतीय व्यापारियों को आगाह किया था कि वे देश के यीवू इलाके में व्यापार ना करें. चीन में भारतीय दूतावास की वेबसाइट में साफ़-साफ़ कहा गया था कि यीवू में भारतीय व्यापारियों को अनाधिकृत रूप से हिरासत में लिया जा सकता है और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा सकता है.

दूतावास ने कहा था, "अनुभव यह बताता है कि इस बात कि कोई गारंटी नहीं है कि इस तरह कि घटना के बाद किसी तरह कि न्यायिक मदद तुरंत हासिल हो पाएगी."

चेतावनी में भारतीय दूतावास ने भारतीय व्यापारियों को यीवू से दूर रहने को कहा था.

इसके पहले चीन में भारतीय दूतावास ने दावा किया था कि देश के यीवू इलाके में किसी यमन की कंपनी में काम करने वाले दो भारतीय लोगों को जबरन रोक लिया गया था.

भारतीय पक्ष ने यह भी दावा किया इन दोनों भारतीयों कि मदद के लिए यीवू पहुंचे एक भारतीय राजनयिक को भी दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा.

राजयनिक एस बालाचंद्रन कथित तौर पर बंधक बनाए गए भारतीय व्यापारियों को छुड़वाने के लिए बातचीत कर रहे थे. ख़बरों के अनुसार डायबिटीज़ से पीड़ित बालाचंद्रन को अदालत में पांच घंटे चली इस कार्यवाही के दौरान कुछ खाने या दवाई लेने की इजाज़त नहीं दी गई और वह बेहोश हो गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया.

चीन की सफ़ाई

इस सब के बीच बुधवार को ही चीन ने यीवू इलाक़े में भारतीय राजनयिक के साथ दुर्व्यवहार से जुड़ी मीडिया में आई ख़बरों से इनकार किया.

चीन में विदेश मंत्रालय में प्रवक्ता हॉग ली ने ये वक्तव्य इस सिलेसिले में पूछे गए सवाल पर दिया.

आख़िरकार इस विवाद का पटाक्षेप हुआ. लेकिन इस घटना से यह जाहिर होता है कि दोनों देशों के बीच में केवल हिमालय ही नहीं खड़ा दोनों देशों के बीच कटुता और अविश्वास का भी उतना ही बड़ा पहाड़ खड़ा हुआ है जिसे हटाना शायद हिमालय लांघने जितना ही मुश्किल है.

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