सैन्य नीति पर चीन के निशाने पर अमरीका

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चीन के अगले राष्ट्रपति बनने के सबसे प्रबल दावेदार शी जिनपिंग ने अमरीका की अहम यात्रा से ठीक पहले एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमरीका के सैन्य रुख़ को लेकर उसे आगाह किया है.

एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमरीका की सैन्य मौजूदगी और ताइवान को हथियार बेचने के मुद्दे पर चीन अमरीका से नाराज़ है.

दरअसल वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखित प्रश्न भेजे थे जिसके बाद चीन सरकार ने अनुवादित जवाब भेजे जो अख़बार ने प्रकाशित किए हैं.

शी जिनपिंग ने कहा है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र के देश वहाँ बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ नहीं देखना चाहते.

माना जा रहा है कि 58 वर्षीय शी जिनपिंग राष्ट्रपति हू जिंताओ की जगह लेंगे. हू जिंताओ को इस साल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख पद से सेवानिवृत्त होना है और राष्ट्रपति पद उन्हें 2013 में छोड़ देना पड़ेगा.

शी जिनपिंग मंगलवार को व्हाइट हाउस में अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिलेंगे .व्हाइट हाउस में वे वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाक़ात करेंगे.

शी जिनपिंग ने ये भी कहा है कि पिछले 40 साल में जो कुछ हुआ है वो दर्शाता है कि मज़बूत और स्थाई चीन-अमरीका रिश्ते दोनों देशों के लिए ज़रूरी हैं.

मतभेद

संवाददाताओं के मुताबिक़ सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों को लेकर चीन और अमरीका के रिश्ते नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं.

अमरीका चीन पर दबाव डालता रहा है कि वे अपनी मुद्रा की विनिमय दर कम करे और उस पर पक्षपातपूर्ण व्यापारिक नीतियाँ अपनाने का आरोप लगाता रहा है.लेकिन शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए क़दम उठाए हैं.

उनका कहना था, “एशिया प्रशांत में दोनों देशों के हित जुड़े हुए हैं लेकिन दोनों के बने रहने के लिए लिए यहाँ पर्याप्त जगह है.”

तिब्बत में बढ़ी सुरक्षा और प्रदर्शनों को लेकर भी चीन और अमरीका के बीच तनाव चल रहा है.

मानवाधिकार संगठन तिब्बत के मुद्दे पर व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन करने वाले हैं. अमरीका के बाद शी जिनपिंग आयरलैंड और तुर्की भी जाएँगे.

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