चीन की अंतरिक्ष क्षमताओं से अमरीका चिंतित

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Image caption तेजी से उभरता हुआ चीन अंतरिक्ष में अपनी मौजूदगी को मजबूत कर रहा है

अमरीका ने अंतरिक्ष में चीन की बढ़ती क्षमताओं पर चिंता जताई है. उसका कहना है कि इनके चलते अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं.

उपग्रहों पर अमरीकी निर्यात नियंत्रणों की समीक्षा पर राष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्ट में कहा गया है, “चीन की आधुनिक सेना और विशेष तौर पर उसकी अंतरिक्ष संबंधी क्षमताओं का इस्तेमाल चीन के राजनयिक फायदे, और संभवतः अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के खिलाफ किया जा सकता है.”

अमेरिकी विदेश और रक्षा मंत्रालय की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन नई और कई तरह की “आक्रामक” मिसाइलें तैयार कर रहा है, अपने मिसाइल तंत्र को उन्नत बना रहा है और अमरीका व उसके सहयोगियों के उपग्रह रोधी (एसैट) हथियारों समेत बैलेस्टिक मिसाइल प्रतिरोध की काट के लिए अंतरिक्ष-आधारित तरीके विकसित कर रहा है.

चीन से उपजी चिंता

रिपोर्ट कहती है कि चीन की मिसाइलें हवा से हवा में और जमीन से हवा में बखूबी मार कर सकती हैं. इसके अलावा विदेशी और स्वदेशी सिस्टमों के जरिए चीन के पास साझा उपग्रह संचार बैंड्स और ग्लोबल पॉजिशनिंग सैटलाइट्स (जीपीएस) रिसीवर को “जाम” करने की क्षमता है.

अमरीकी रिपोर्ट में 2007 में चीन के उपग्रह-रोधी परीक्षण को गैर जिम्मेदाराना कदम बताते हुए कहा गया है कि सभी के लिए इसके खतरनाक परिणाम होंगे. चीन के परीक्षण का मलबा हाल के बरसों में कई बार चीन के ही उपग्रहों के नजदीक आ चुका है.

इस वक्त अंतरिक्ष में 60 देशों के अलावा कई व्यावसायिक उद्यमों और अकादमिक संस्थानों की गतिविधियां चल रही हैं.

चीन की सेना देश की अंतरिक्ष और अंतरिक्ष रोधी क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए नई नई तकनीक हासिल कर रही है

रिपोर्ट में ताइवान जलडमरूमध्य की मिसाल देते हुए बताया गया है कि कैसे अंतरिक्ष क्षमताओं में चीन की प्रगति अमरीकी राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है. इसके मुताबिक चीन सरकार ताइवान के खिलाफ सीमित कार्रवाई में “बाधा कारक, दंडात्मक और विनाशकारी” अंतरिक्ष क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकता है.

अमरीका की चिंता इस बात को लेकर है कि चीन की अंतरिक्ष क्षमताएं सिर्फ ताइवान पर लक्षित नहीं हो सकतीं, बल्कि यह अमरीका और उनके सहयोगियों के लिए भी चिंता का विषय है.

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