गूगल, चीन और फायरवाल

 बुधवार, 2 मई, 2012 को 17:20 IST तक के समाचार

गूगल की कई सुविधाओं पर चीन में प्रतिबंध लगा हुआ है.

गूगल अगले हफ्ते अपना स्टोरेज गूगल ड्राईव ला रहा है लेकिन चीन में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले पचास करोड़ लोगों को शायद ही इसका इस्तेमाल करने का मौका मिले.

चीन ने अपने यहां आने वाले इंटरनेट कनेक्शनों में एक फायरवाल लगा रखा है जिसके कारण गूगल ड्राइव चीन के लोगों की पहुंच से बाहर रहेगा.

इसके साथ ही क्लिक करें गूगल ड्राइव यूट्यूब, गूगल प्लस, ड्रॉपबॉक्स, फेसबुक और फोरस्कवायर की श्रेणी में शामिल हो गया है जो चीन में इस्तेमाल नहीं हो सकेगा.

गूगल के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, ‘‘ अगर लोग गूगल ड्राईव का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं तो हमें चीन के अधिकारियों से इस बाबत विचार करना होगा.’’

डंकन क्लार्क

"चीन की सरकार पश्चिमी वेबसाइटों और ऑनलाइन सर्विसेस के प्रति अच्छी राय नहीं रखती है. सोशल मीडिया साइटों को टारगेट किया जाता है और वीडियो साझा करने वाली साइटों को भी क्योंकि इनका असर पूरे समुदाय पर होता है"

विशेषज्ञों के अनुसार ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि चीन ने गूगल ड्राईव को अपने यहां आने न दिया हो.

बीजिंग में एक कंसल्टेंसी फर्म के डंकन क्लार्क कहते हैं, ‘‘ चीन की सरकार पश्चिमी वेबसाइटों और ऑनलाइन सर्विसेस के प्रति अच्छी राय नहीं रखती है. सोशल मीडिया साइटों को टारगेट किया जाता है और वीडियो साझा करने वाली साइटों को भी क्योंकि इनका असर पूरे समुदाय पर होता है.’’

क्लार्क कहते हैं, ‘‘ यह नियंत्रण की बात है. चीन की सरकार वेब पर कंट्रोल चाहती है और उसकी कोशिश रही है कि स्थानीय इंटरनेट सेवा प्रदान करने वालों के साथ काम करे.’’

इस तरह के नियंत्रण के लिए चीन इंटरनेट ट्रैफिक पर भी नज़र रखता है और इसके लिए वो एक फायरवाल का इस्तेमाल करता है.

चीन में इंटरनेट पर जानकारियों का आदान प्रदान कुछ चुनिंदा गेटवे से गुज़र कर जाता है जिस पर सरकार नज़र रखती है.

कभी कभी सरकार उन वेबसाइटों को ब्लॉक भी कर देती है जो सरकार को पसंद नहीं होते. सरकार ने डोमेन नाम भी ब्लॉक किए हैं जिसके बाद ये साइटें खोजना असंभव हो जाता है.

हामिद सिरहन

"चीन में इंटरनेट यूजर्स प्रौक्सी साइटों का इस्तेमाल करते हैं. और भी कई तरीके हैं जिससे प्रतिबंधित साइटों का कंटेल इस्तेमाल किया जा सकता है"

लेकिन फायरवाल को भी तोड़ा जा सकता है.

जैसे कि फरवरी महीने में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा गूगल प्लस अकाउंट में चीन से उस समय अचानक हज़ारों संदेश आने लगे थे जब चीन के लिए लगे फायरवाल को कुछ समय के लिए हटाया गया.

लंदन में सोशल मीडिया से जुड़ी एजेंसी फ्रेशनेटवर्क्स के हामिद सिरहन कहते हैं, ‘‘ फायरवाल एकदम परफेक्ट नहीं होता है. इसमें भी रास्ते निकल आते हैं.’’

वो कहते हैं, ‘‘ चीन में इंटरनेट यूजर्स प्रौक्सी साइटों का इस्तेमाल करते हैं. और भी कई तरीके हैं जिससे प्रतिबंधित साइटों का कंटेल इस्तेमाल किया जा सकता है.’’

जॉनडोनिम, टोर और अल्ट्रासर्फ जैसे सॉफ्टवेयर तो सिर्फ चीनी सरकार के प्रतिबंधों को तोड़ने के लिए ही बनाए गए हैं.

हालांकि जो इंटरनेट का लंबे समय से इस्तेमाल कर रहे हैं वो इन तकनीकी सॉफ्टवेयरों का इस्तेमाल कर लेते हैं लेकिन आम चीनी अपने देश में उपलब्ध सामग्री से ही संतुष्ट दिखते हैं.

इसके कई उदाहरण हैं. चीन ने वर्ल्ड वाइड वेब की तर्ज पर अपना वेब बनाया है जो स्थानीय नियमों के आधार पर चलता है.

बीडीए के क्लार्क कहते हैं कि विदेशी सामग्री पर प्रतिबंध से चीन के स्थानीय फर्मों को फायदा होता है.

ट्विटर की तर्ज पर चीन में शुरु किया गया माइक्रोब्लॉगिंग साइट सीनो वीबो के अभी ही 30 करोड़ यूजर्स हैं जो कि ट्विटर की तुलना में दुगुने हैं.

अब चूंकि गूगल का इस्तेमाल नहीं हो सकता चीन में तो वहां का लोकल सर्चिंग इंजन बायदू तीबा इस्तेमाल होता है.

इसी तरह यूटयूब के स्थान पर इस्तेमाल होता है यूकू. इन वीडियो साइट और सर्च इंजनों पर चीनी सरकार के ख़िलाफ कोई सामग्री नहीं होता है.

इतना ही नहीं गूगल ड्राईव से एक हफ्ता पहले चीन ने अपने स्टोरेज साइट वांगपान की घोषणा भी कर दी है. गूगल क्लाउड जहां 25 जीबी स्टोरेज की सुविधा देता है वहीं वांगपान 30 जीबी स्टोरेज की सुविधा दे रहा है.

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