चीन में सोने की रिकॉर्ड माँग

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Image caption पिछले वर्ष में सोने का दाम 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक वर्ष 2012 की पहली तिमाही में चीन में सोने की मांग ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया है.

चीन में अब सोने और अन्य जेवरात को निवेष के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है.

इसकी वजह से इस तिमाही में सोने की मांग 255.2 टन तक पहुंच गई है. इस अवधि में चीनी नया साल मनाया गया और इससे भी मांग में बढ़ोत्तरी हुई.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक महंगाई और जमीन और प्रॉपर्टी में निवेष पर लगी प्रतिबंधों के चलते मांग में और तेजी आ सकती है.

लेकिन इसी समयावधि में वैश्विक स्तर पर सोने की मांग पांच प्रतिशत कम होकर 1097.6 टन पर आ गई.

भारत में मांग घटी

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने इसकी वजह सोने के बढ़ते दाम बताई.

पहली तिमाही में सोने का औसतन दाम था 1690.57 डॉलर प्रति आउंस, और ये वर्ष 2011 की पहली तिमाही से 22 प्रतिशत ज्यादा था.

अपनी त्रैमासिक पत्रिका में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कहा, “सोने में निवेष की वजह से बढ़ी मांग को जेवर, तकनीक और कॉरपोरेट उद्योग से घटी मांग ने बराबर कर दिया.”

विश्व में सोने के सबसे बड़े बाजारों में गिने जाने वाले भारत में भी मांग में गिरावट आई. भारत में इसकी एक वजह सोने पर लगा आयात शुल्क और सोने के जेवरों पर लगा उत्पाद शुल्क भी रही.

भारत सरकार के इन फैसलों के बाद जेवर व्यापारी हड़ताल पर चले गए थे और सरकार को अपने फैसले वापस लेने पड़े थे.

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