चीन: जबरन गर्भपात मामले में अधिकारी बर्खास्त

चीन के सरकारी मीडिया ने कहा है कि देश और विदेश में छाए रहे जबरन गर्भपात मामले में स्थानीय परिवार योजना अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया है.

चीन के एक प्रांत में सात महीने की गर्भवती महिला का जबरन गर्भपात कर दिया गया था.

इस महिला और उसके भ्रूण की तस्वीरें इंटरनेट पर जारी कर दी गई जिससे इस मामले पर चीन ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी गुस्सा देखा गया.

सरकारी मीडिया की खबरों में कहा गया है कि अधिकारी के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी इस मामलो में दंडित किया गया है.

समाचार ऐजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक फेंग जियानमेई नाम की इस महिला को गर्भपात के लिए राजी़ करने के लिए उस अधिकारी ने क्रूर तरीकों के इस्तेमाल किया.

फेंग जियानमेई को उस समय गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया गया जब वो सात माह की गर्भवती थीं.

चीन के कानून के मुताबिक छह महीने से अधिक समय के गर्भ को गिराया नहीं जा सकता है. महिला के भ्रूण की फोटो ऑनलाइन व्यापक चर्चा का विषय रही और लोगों ने इस घटना की व्यापक स्तर पर निंदा की थी.

एक शिशु नीति

Image caption महिला के भ्रूण की फोटो ऑनलाइन व्यापक चर्चा का विषय रही और लोगों ने इस घटना की व्यापक स्तर पर निंदा की थी.

दरअसल फेंग जियानमेई ने चीन की 'एक शिशु' नीति का उल्लंघन किया था.

चीन की 'एक शिशु' नीति परिवार नियोजन के तहत बनाई गई थी जिसका मकसद देश की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करना था.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस कानून के चलते महिलाओं को जबरन गर्भपात कराना पड़ता है. हांलाकि चीन इसका खंडन करता है.

बीजिंग में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि फेंग जियानमेई का मामला एक ऐसा उदाहरण है जिससे ये पता चलता है कि अधिकारी किस तरीके से जनसंख्या नियंत्रण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्रूर तरीके अपनाते हैं.

गर्भपात का दबाव

सरकारी अधिकारियों के हवाले से समाचार ऐजेंसी शिन्हुआ का कहना है कि इस अधिकारी को इसलिए दंडित किया गया है क्योंकि उन्होंने न सिर्फ स्थानिय बल्कि केंद्रीय स्तर पर परिवार नियोजन के कानून का उल्लंघन किया है.

समाचार ऐजेंसी के मुताबिक जेन्पिग काउंटी के परिवार नियोजन ब्यूरो के प्रमुख जियांग नेघई को बर्खास्त किया गया और इस मामले से जुडे़ अन्य अधिकारियों को भी दंडित किया जाएगा.

समाचार ऐजेंसी का ये भी कहना है कि स्थानिय सरकार ने फेंग से दूसरे बच्चे की अनुमति देने संबंधी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 40 हज़ार युआन की मांग की. इस मांग का कोई कानूनी आधार नही है.

इस घटना के बाद अब फेंग जियानमेई को मुआवजा दिया जाएगा.

रिश्तेदारों का कहना है कि इस घटना के बाद फेंग के पति को कहीं छुपने के लिए विवश किया गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया क्योंकि उन्होंने इस मामले को उजागर कर दिया था.

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