वियतनाम : हमारे समुद्र का चीनी ठेका कैसे

दक्षिण चीन सागर
Image caption चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर के एक विवादित इलाके में बनाई एक इमारत.

वियतनाम ने चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर से तेल निकालने के लिए बोलियाँ आमंत्रित करने का सख्त विरोध करते हुए इसे अपना क्षेत्र बताया है.

वियतनाम और चीन के संकटग्रस्त रिश्तों में इससे तनाव और ज़्यादा बढ़ गया है.

वियतनाम के विदेश मंत्रालय ने चीन के इस कदम को "गैरकानूनी" और "वियतनामी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है." मंत्रालय के अनुसार चीन ने जिन समुद्री इलाकों से तेल निकलने के लिए ठेके आमंत्रित किए हैं वो इलाके वियतनाम के ख़ास आर्थिक क्षेत्र का हिस्सा हैं और बिलकुल विवादित नहीं है."

चीनी दावा

चीन की सरकारी तेल कंपनी 'चाइना नेशनल ऑफशोर आयल कॉर्पोरेशन' ने शनिवार को कहा था कि वो इस साल दक्षिण चीन सागर के नौ क्षेत्रों से तेल निकालने के लिए निविदाएँ आमंत्रित करेगा.

चीनी कंपनी का कहना है कि यह इलाके " चीन के हैं और विदेशी सहयोग के लिए उपलब्ध हैं."

चीन के विदेश मंत्री होन्ग लेई ने मंगलवार को ठेका प्रक्रिया को "सामान्य व्यापारिक गतिविधि" करार दिया था और वियतनाम को "जटिलता ना बढ़ाने" की सलाह दी थी.

वियतनाम ने आरोप लगाया है कि चीन दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ा रहा है.

बहिष्कार की अपील

वियतनाम की सरकारी तेल कंपनी पेट्रोवियतनाम ने अंतर्राष्ट्रीय तेल कंपनियों से चीन द्वारा आमंत्रित निविदाओं का बहिष्कार करने की अपील की है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन का यह नया कदम वियतनाम द्वारा पारसल और स्पार्टली द्वीपों पर अपनी संप्रभुता जताने के बाद आया है.

ऐसा दूसरी बार हुआ है कि पेट्रोवियतनाम ने दक्षिण चीन सागर में चीन के कदमों की निंदा की हो.

साल 2011 में वियतनाम ने आरोप लगाया था कि चीनी समुद्री जहाज़ों ने इस इलाके में वियतनाम द्वारा डाले गए तारों को काट दिया था. इन आरोपों के बाद वियतनाम में चीन विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए थे.

अधिक विवाद

ऐसा माना जाता है कि दक्षिण चीन सागर के समुद्र में तेल और गैस के कई विशाल भण्डार दबे हुए हैं. यही भण्डार इस इलाके के कई देशों के बीच विवाद का कारण बन गए हैं.

चीन और वियतनाम के अलावा इस इलाके के कई टापुओं पर पर फिलिपीन्स, ब्रुनई, मलेशिया और ताइवान भी अपना अपना प्रतिस्पर्धी दावा ठोकते हैं.

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