नाराज हांगकांग में पहुँचे हैं हू जिंताओ

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चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ हांगकांग की चीन को वापसी की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर हांगकांग पहूँच गए हैं, मगर वहाँ उन्हें नाखुश लोगों और लगातार बढ़ते राजनीतिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है.

एक वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में हांगकांग के चीन से जुड़ने से चीन को लाभ भी हूआ है मगर इसने समस्याएँ भी खड़ी की हैं.

और सर्वेक्षणों और जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार अभी ये समस्याएँ सबसे अधिक गंभीर स्थिति में नज़र आ रही हैं.

हांगकांग के ग़रीब और अमीर लोगों के बीच की खाई पिछले 30 सालों में सबसे अधिक चौड़ी हो गई है, वहाँ किराए आसमान छू रहे हैं और वहाँ के निवासी आए दिन अख़बारों में चीन सरकार के भीतर वरिष्ठतम स्तर पर होनेवाले भ्रष्टाचार की ख़बरें पढ़कर परेशान हो रहे हैं.

एक स्वतंत्र सर्वेक्षण के अनुसार हांगकांग के लोगों में अभी चीन सरकार को लेकर अविश्वास चरम सीमा पर है जिसका मुख्य कारण चीन में कई राजनीतिक विवादों का सामने आना है.

इनमें चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ अधिकारी बो शिलाई की बर्ख़ास्तगी, मानवाधिकार कार्यकर्ता चेन ग्वांगचेंग की परेशानी और सबसे गंभीर, तिएन्मेन स्क्वायर के असंतुष्ट कार्यकर्ता ली वांग्यांग की जून में हूई संदिग्ध मौत जैसी घटनाएँ शामिल हैं.

हांगकांग युनिवर्सिटी के जनमत कार्यक्रम विभाग में विशेषज्ञ फ़्रैंक ली कहते हैं,”चीन में जो होता है उसका हांगकांग पर गहरा असर पड़ता है, क्योंकि हम सब जातीय चीनी हैं. इसलिए अभी बहूत सारे लोग बीजिंग सरकार पर विश्वास नहीं करते. दरअसल अभी लोगों में काफ़ी ग़ुस्सा है.“

असमानता

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Image caption हु जिंताओ पाँच साल के बाद हांगकांग का दौरा कर रहे हैं मगर अभी माहौल अलग है

एक अर्धस्वायत्त क्षेत्र हांगकांग में एक अपेक्षाकृत मज़बूत अर्थव्यवस्था होने और वहाँ के लोगों का समर्थन पाने की ख़ातिर चीन सरकार की कई वित्तीय घोषणाओं के बावजूद हांगकांग हू जिंताओ की पाँच साल पहले हूई अंतिम यात्रा के समय से अधिक अशांत है जब वो ओलंपिक से पहले शहर में आए थे.

उनकी यात्रा से पहले हांगकांग के जनगणना ब्यूरो ने आँकड़े प्रकाशित किए हैं जिनसे पता चलता है कि वहाँ असमानता पिछले तीन दशक में सबसे ऊपर जा चुकी है.

अमरीकी सरकार के अनुसार हांगकांग में असमानता किसी भी विकसित देश की तुलना में सबसे अधिक है.

हांगकांग इस मामले में कोलंबिया, हेती और सियरा लियोन जैसे देशों से भी पीछे है जहाँ असमानताएँ सबसे अधिक बताई जाती हैं.

नवीनतम आँकड़ों के अनुसार हांगकांग के निर्धनतम लोगों की मासिक आय पिछले पाँच वर्षों में 8% कम हो गई है, जबकि अमीरों की आमदनी में 25 प्रतिशत की वृद्धि हूई है.

एक सामाजिक कार्यकर्ता शे लाइ शान कहती हैं कि हांगकांग की चीन में वापसी के बाद से हांगकांग का आर्थिक ढांचा ही बदल गया है.

एक बहूत ही छोटे कमरे में रहनेवाले 57 वर्षीय सफ़ाई कर्मचारी ली ली वाई कहते हैं,"यहाँ काम मिलना बहूत मुश्किल है. अधिकतर कंपनियाँ चीन चली गई हैं. जो रह गई हैं वो अस्थायी कर्मचारियों को रखना चाहती हैं. जीवन बड़ा कठिन हो गया है."

जनगणना के आँकड़ों के आने के बाद हांगकांग के नवनिर्वाचित मुख्य कार्यकारी सी वाई लेउंग ने कहा है कि वो ग़रीबी के निराकरण के लिए एक नए टास्क फ़ोर्स का गठन करेंगे.

आज़ादी के मुद्दे

सामाजिक असमानता पर नाराज़गी के अतिरिक्त हू जिंताओ को इस सप्ताहांत दो बड़े लोकतंत्र से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का भी सामना करना पड़ेगा.

रविवार को वहाँ मानवाधिकारों को लेकर रैली होगी जो हर साल होती है. पिछले साल इसमें दो लाख लोग जुटे थे.

आयोजकों को उम्मीद है कि इस साल और ज़्यादा लोग आएँगे क्योंकि यहाँ के लोगों को लगने लगा है कि चीन सरकार और भ्रष्ट तथा दमनकारी होती जा रही है.

सिविक पार्टी के एक सदस्य क्लॉडिया मो ने कहा,”हांगकांग के लोग मुख्य चीन में हो रही घटनाओं को लेकर काफ़ी खफ़ा हैं क्योंकि इसका असर हमपर पड़ेगा. आज नहीं तो कल. “

शनिवार को एक अन्य रैली हो रही है जिसका समय हू जिंताओ के रात्रिभोज के वक्त रखा गया है.

यहाँ प्रदर्शनकारी तिएनेन्मन स्क्वायर पर आए सरकारी फ़ैसले को वापस लिए जाने की माँग करेंगे जिसे कि एक विद्रोह-विरोधी गतिविधि घोषित कर दिया गया है.

साथ ही वे विकलांग चीनी कार्यकर्ता ली की संदिग्ध मौत की पूरी जाँच की भी माँग करेंगे.

जून में उनकी मौत के बाद हांगकांग में काफ़ी असंतोष बढ़ा था और चीनी अधिकारियों ने जाँच का एलान किया मगर हांगकांग के लोगों को चीन सरकार पर संदेह है.

हू जिंताओ 2007 में भी चीन आए थे और तब भी विरोध हूए थे मगर तब चीन और हांगकांग में राजनीतिक माहौल अलग था.

पाँच साल पहले चीन सरकार लोकतांत्रिक सुधारों को लेकर काफी कुछ कह रही थी जिसके बारे में उसने ओलंपिक आयोजकों से वादा किया था.

तब विदेशी और हांगकांग के पत्रकारों पर लगी पाबंदियाँ भी ढीली की गई थी और लि शियाबाओ जैसे लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं को अपनी बातें कहने की आज़ादी दी गई थी.

मगर इस साल चीन का राजनीतिक वातावरण बदला हूआ है और हू जिंताओ समर्थन हासिल करने के लिए बस वित्तीय प्रलोभन लेकर हांगकांग पहूँचे हैं.

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