वीबो से चीन में सामाजिक बदलाव

 गुरुवार, 12 जुलाई, 2012 को 02:23 IST तक के समाचार

सीना विबो की मदद से ये समूह तेजी से फला-फूला

चीन में आई संचार क्रांति से वहां के समाज की रुपरेखा तेजी से बदल रही है. ट्विटर के चीनी संस्करण 'सीना वीबो' के करीब 30 करोड़ सदस्य बन चुके हैं.

ये सेवा समाज में लोगों के एक दूसरे से जोड़ने और उसे जीवंत करने में महत्वपूर्ण मदद कर रही है.

इसी तकनीक से मदद लेकर पश्चिमी चीन के चेंगडू में महिलाएँ एक समूह बनाकर नवजात बच्चों को मां का दूध पिलाने के पक्ष में जागरूकता अभियान चला रहीं हैं. पिछले कुछ महीनों में चीन में बच्चों को दिए जाने वाले पाउडर के दूध में खतरनाक मिलावट पाई गई थी.

चीन के इस शहर में स्थित एक इमारत के दफ्तर में महिलाएं जमा होती हैं, जो ब्रेस्ट फीडिंग के फायदों के बारे में चर्चा करती हैं. इस बैठक में शामिल कई महिलाएं गर्भवती भी होती हैं जिन्होंने अपने होने वाले बच्चों को अपना ही दूध पिलाने का निश्चय किया होता है.

ये समूह दो साल पहले शुरू किया गया था जिसके बाद सीना वीबो की मदद से ये तेजी से फला-फूला. अब ये समूह हर सप्ताह कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें सैकड़ो लोग शिरकत करते हैं.

इसी समूह की एक सदस्य दीना कहती हैं, ''मुझे इस समूह के बारे में वीबो से पता चला और चूंकि मैं अपने बच्चों को अपना ही दूध पिलाती थी इसलिए इससे संबंधित अनुभव दूसरे के साथ बांटना चाहती थी. यहां आने से पहले इन अनुभवों को बांटने का मौका नहीं मिल पाता था.''

चुनौतियां

"मुझे इस समूह के बारे में वीबो से पता चला और चूंकि मैं अपने बच्चों को अपना ही दूध पिलाती थी इसलिए इससे संबंधित अनुभव दूसरे के साथ बांटना चाहती थी. यहां आने से पहले इन अनुभवों को बांटने का मौका नहीं मिल पाता था. मुझे लगता है कि जो माएं यहां आती हैं, वो काफी भाग्यशाली हैं."

दीना, सदस्य

हालांकि इस समूह के आगे कई चुनौतियां बहुत सी हैं. चीन की महिलाओं को पिछले करीब दो दशकों से अपने बच्चों को मिल्क पाउडर या कृतिम दूध दिए जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था.

चीन में डॉक्टर और परिवारजन औम तौर पर महिलाओं को बताते रहे हैं कि मांए खुद से उतना दूध पैदा नहीं कर पाएंगी जिससे बच्चे का पेट भरे. इसके अलावा तमाम विज्ञापनों में बताया जाता रहा है कि फॉर्मूला दूध में कई पोशक तत्व होते हैं जो बच्चों के लिए मां के दूध के ज्यादा फायदेमंद है.

किछ समय पहले तक जो महिलाएं मां बनने वाली थीं उनके पास बच्चों के प्राकृतिक पोषण पर निर्णय के लिए कोई ठोस आधार नहीं था, खास तौर पर तब अगर वो विकसित पूर्वी चीन के तटवर्ती इलाकों में रहते हों.

समूह की एक सदस्या ने कहा, ''चेंगडू में हो रहा ये कार्यक्रम काफी मददगार साबित हो रहा है. आम तौर पर चेंगडू में ऐसे क्लब या डॉक्टर नहीं मिलते जो इस तरह की महत्वपूर्व जानकारियां देती हों. आम स्थानीय मांए जो घर से ज्यादा बाहर नहीं निकलतीं, वो तो टीवी देखकर ही महंगे फार्मूला दूध खरीद लेती हैं.''

पाउडर दूध का प्रचलन

वहीं समूह की संस्थापिका यूशी का कहना था, ''अभी भी कई ऐसे परिवार हैं जिसमें फॉर्मूला दूध को बढ़ावा दिया जाता है. माताओं के आगे आसान तरीका होता है परिवार की बात मान लेना.''

चीनी महिला

चीन की माताओं के बीच पाउडर वाला दूध प्रचलित है.

यूशी जैसी महिलाएं जो विदेशों में रहकर बच्चों के पोषण के बारे में बाहर से भी जानकारी जुटा कर लौटी हैं, वही इस जागरूकता अभियान की प्रमिख स्रोत है. यूशी इस समूह के संस्थापकों में से एक है. उनका कहना है कि चीन में हुए मिल्क पाउडर घोटालों के बाद भी चीन के लोग महंगे पाउडर दूध खरीदते हैं.

यूशी मानती हैं कि एक सौ तीस करोड़ की आबादी वाले देश में इनका अभियान काफी छोटा है, लेकिन वो उम्मीद करती है कि समय के साथ स्थितियां सुधरेंगी. यूशी एक छोटा व्यवसाय भी शुरू करने वाली हैं जिसके तहत वो अस्पतालों में जाकर महिलाओं को ब्रेस्ट फीडिंग के बारे में बताएंगी.

यूशी मानतीं है कि सीना वीबो से उनके अभियान को काफी मदद मिली है. कुछ इसी तरह के सूक्ष्म अभियान भारत में भी फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से चलाए जाते हैं, हालांकि इनमें से ज्यादातर की तादाद और पहुंच बेहद कम हैं.

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