चीन में सभी वेब वीडियो होंगे सेंसर

चीन
Image caption चीन में पहले से ही प्रकाशन-प्रसारण को लेकर काफी सख्ती है.

चीन की प्रसारण नियामक संस्था ने देश में चल रहे सभी वेबसाइट कंपनियों के लिए नए सेंसरशिप नियम जारी किए हैं. इस नए नियम के अनुसार किसी भी वीडियो को वेबसाइट पर लगाने से पहले संचालकों को उनकी जांच करनी होगी.

चीन में रेडियो, फिल्म और टेलीवीजन की राजकीय प्रबंधन संस्था 'एसएआरएफटी' ने ये जानकारी पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में दी है जिसकी एक श्रंखला हाल में ही प्रकाशित की गई है.

इसमें कहा गया है कि वेबसाइट संचालकों से ये उम्मीद जा जाती है कि वे अपनी साइट पर हिंसा, अश्लीलता और दुर्भावना फैलाने वाली सामग्री लगाने पर खुद ही रोक लगाएंगे.

इसमें कहा गया है कि सरकारी अधिकारी इस मामले में उनकी मदद करेंगे. हालांकि इसपर किसी तरह की विस्तृत जानकारी नहीं मुहैया करवाई गई है.

नियामक संस्था का ये बयान हाल में प्रकाशित हुआ था. लेकिन इसकी तरफ लोगों का ध्यान तब गया जब टेक्नालाजी से संबंधित वेबसाइट 'द रजिस्टर' ने इस संबंध में खबर छापी.

वबसाइट पर प्रकाशित लेख में ये संकेत दिए गए कि 'अश्लील' सामग्रियों पर नज़रिया स्पष्ट ना करने से ये खतरा बना रहेगा कि नियामक संस्था इन्हें लागू करने में मनमानी कर सकती है.

वीडियो की जांच

एसएआरएटी के अनुसार नए दिशा-निर्देश ऑनलाइन कार्यक्रमों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर तैयार किया गया है. कहा गया है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों का आग्रह था कि ऊंचे दर्ज के कार्यक्रमों को बढ़ावा दे जिससे युवाओं का बेहतर मानसिक विकास हो पाए.

चीन की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली ऑनलाइन वीडियो साइट 'योकू' ने कहा है उसपर इन नियमो का असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसने पहले से ही वीडियो चेक की व्यवस्था कर रखी है.

योकू की प्रवक्ता के अनुसार, ''हमारी साइट पर कोई भी अश्लील या हिंसक सामग्री मौजूद नहीं होगी.''

उनका कहना था, "अगर कोई भी सामग्री पार्टी-विरोधी या समाज-विरोधी हुई तो उसे किसी भी हालत में पास नहीं किया जाएगा. कोई भी वेबसाइट इस तरह की सामग्री नहीं प्रकाशित करेगा."

वृहत संसाधन

चीन में पहले से ही यूट्यूब जैसे कई विदेशी साइटों पर प्रतिबंधित लगा रखे हैं. लेकिन फिर भी वहां कई लोग ऐसे हैं जो वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल कर इन प्रतिबंधित साइटों पर जाते हैं.

हॉन्गकांग विश्वविद्यालय के जर्नलिज्म और मीडिया स्टडीज सेंटर के डेविड बांदूर्सकी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, ''इस नियम में साफ है कि सरकारी नजरिए के प्रचार-प्रसार के खिलाफ जाने वाले किसी भी विडियो प्रोग्राम के प्रसारण के लिए वेबसाइट को जिम्मेदार ठहराया जाएगा.''

''ये देखने वाली बात होगी की इन दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए नियामक संस्था किस तरह के कदम उठाती है, खासतौर पर उन मामलों में जहां सामग्री यूजर्स जेनरेट करते हैं.''

''अगर इस आदेश को सख्ती से लागू करने का प्रयास किया गया तो इसके लिए व्यापक संसाधनों की जरुरत होगी.''

संबंधित समाचार