देश छोड़ रहे हैं चीन के अमीर

 बुधवार, 22 अगस्त, 2012 को 15:46 IST तक के समाचार

अमरीका में निवेश के ज़रिए वहां रहने का अधिकार लेने वाले चीनी व्यापारियों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है.

दुनिया के किसी भी कोने में चल जाइए, चीन में बना सामान लगभग हर जगह मिल जाएगा.

चीन का एक और निर्यात है जो लगता है कि इस वक्त पूरी दुनिया में फैल रहा है, वो हैं चीन के लखपति.

शंघाई में रहने वाले लुई हुआंग ने प्रॉपर्टी के कारोबार में बहुत धन कमाया है. वो मंहगी पोर्श गाड़ी चलाते हैं और अपने लिए 200 कमरों का एक विला बनवा रहे हैं. इसके अलावा दुनिया के कम से कम पांच और शहरों में उनकी संपत्ति है.

हालांकि हुआंग का ज़्यादातर कारोबार चीन में ही है लेकिन उन्होंने सिंगापुर में भी इतना निवेश कर लिया है जिससे उन्हें वहाँ रहने का अधिकार मिल सके.

हुआंग कहते हैं कि सिंगापुर में रहने के अधिकार हासिल करने की कई वजह हैं जिसमें में सबसे ख़ास ये है कि वहां रहने से भविष्य में उनके परिवार को कई मौके मिल सकते हैं.

लेकिन वो ये भी मानते हैं कि उनके कई अमीर दोस्त असुरक्षा की भावना की वजह से चीन के बाहर रहने के बारे में सोचते हैं.

हुआंग कहते हैं, "ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि मेरे पास बहुत पैसा है. लेकिन क्या पता एक दिन सरकार अपनी नीतियां बदल दे और मेरा सारा पैसा मुझसे ले ले."

नौकरियों के बदले वीज़ा

इस बात के बहुत से सबूत हैं कि चीन के धनाढ्य देश छोड़ कर जा रहे हैं. चाहे उन्होंने पैसा किसी भी तरह कमाया हो, उद्योग व्यवसाय से, संबंधों के आधार पर या फिर भ्रष्ट तरीके से.

"ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि मेरे पास बहुत पैसा है. लेकिन क्या पता एक दिन सरकार अपनी नीतियां बदल दे और मेरा सारा पैसा वापिस ले ले."

लुई हुआंग, चीनी लखपति

शंघाई में एक सेमीनार में ऐसे चीनी उद्यमियों को अमरीकी अर्थव्यवस्था में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है जिनके पास कम से कम पाँच लाख डॉलर की राशि निवेश करने के लिए उपलब्ध हो.

अमरीका की ईबी-5 वीज़ा योजना 'निवेश के बदले निवास' कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत ऐसे लोगों को ग्रीन कार्ड दिया जाता है जो ये दिखा सकें कि उनके निवेश से कम-से-कम दस लोगों को नौकरियां मिल सकती है.


इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2006 में 63 चीनी नागरिकों को अमरीका का वीज़ा मिला. लेकिन पिछले वर्ष, यानी 2011 में ये आंकड़ा 2,408 से ज़्यादा हो गया था और इस साल, अब तक 3700 का आंकड़ा पार हो चुका है.

इसका मतलब है कि इस समय अमरीकी आधारभूत ढांचे में चीनी लोगों का पैसा तेज़ी से आ रहा है.

वैसे तो ये योजना सभी देशों के नागरिकों के लिए है लेकिन फ़िलहाल इसका 75 प्रतिशत हिस्सा चीनी निवेशकों का है.

सुरक्षा की तलाश

चीन से इस तरह पैसा निकलने की एक वजह शायद वहां की सख़्त और अपारदर्शी राजनीतिक व्यवस्था है, ख़ासकर इस वर्ष जब वहां की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में कई बदलाव होने वाले हैं.

लुई हुआंग का मानना है कि विदेश में रहने का अधिकार मिलने से उनके परिवार को फ़ायदा होगा.

इसके अलावा एक वजह जीवनशैली से भी जुड़ी है. लुई हुआगं जैसे अमीर चीनी अपने लिए बेहतर जीवनशैली और अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था खोज रहे हैं. साथ ही लोगों में डर है कि एक दशक से तेज़ी से बढ़ रही चीनी अर्थव्यवस्था अब धीमी पड़ रही है.

इन सब बातों के मद्देनज़र कोई हैरानी नहीं कि अमीर चीनी देश छोड़ कर जा रहे हैं.

अमरीकी ईबी-5 स्कीम के आंकड़ों के अलावा भी पिछले वर्ष 1000 चीनी लखपतियों के एक सर्वे में पाया गया कि 60 प्रतिशत किसी और देश में बसने के बारे में सोच रहे हैं. ये वो लखपति थे जिनकी कमाई डॉलर में मापी गई थी.

ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों की बात करें तो चीन इनमें चोटी के कुछ देशों में है और अमरीकी प्रॉपर्टी एजेंटों के मुताबिक इस वर्ष वहां महंगे घर खरीदने वाले चीनी और हॉन्गकॉन्ग वासियों की संख्या में बड़ा उछाल आया है.

चीन में अमीरों की संख्या अब भी बढ़ रही है और साथ ही बढ़ रहा है इस आर्थिक अनिश्चितता के दौर में ज़्यादा सुरक्षित जगह जाने का लालच भी.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.