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 क्रिकेट वर्ल्ड कप
रविवार, 23 मार्च, 2003 को 23:04 GMT तक के समाचार
टूटा भारत का सपना
पॉंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया को तीसरी बार विश्व चैंपियन बनाया
पॉंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया को तीसरी बार विश्व चैंपियन बनाया



क्रिकेट वर्ल्ड कप अब 4 साल और ऑस्ट्रेलिया में ही रहेगा. रिकी पोंटिंग की अगुवाई में ऑस्ट्रेलिया ने लगातार दूसरी बार कप पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम क्रिकेट इतिहास में तीन बार वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली पहली टीम बन गई है.

इससे पहले उसने 1987 में एलन बॉर्डर के नेतृत्व में और 1999 में स्टीव वॉ की कप्तानी में ये ख़िताब हासिल किया था.

संभावना

2003 के वर्ल्ड कप फ़ाइनल का नतीजा बिल्कुल वैसा ही रहा जिसकी ज़्यादातर लोग संभावना जता रहे थे.


मैच की तस्वीरें देखने के लिए क्लिक करें

पूरी प्रतियोगिता में एक भी मैच न हारने वाला ऑस्ट्रेलिया शुरू से ही ख़िताब की दौड़ में सबसे आगे था.

भारत भी कप के दावेदारों में तो था लेकिन फ़ाइनल में वो ऑस्ट्रेलिया के सामने टिक नहीं पाया.

भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली ने टॉस जीत कर भी पहले ऑस्ट्रेलिया को बल्लेबाज़ी का मौक़ा दे दिया और थोड़ी देर बाद ही उन्हें अहसास हो गया कि उन्होंने कितनी बड़ी भूल कर दी है.


बाद में बल्लेबाज़ी के गांगुली के फ़ैसले पर सवाल
एडम गिलक्रिस्ट और मैथ्यू हेडन ने धुआँधार शुरुआत करते हुए 13 ओवर में ही 100 रन ठोक दिए और टीम को बड़े स्कोर के रास्ते पर डाल दिया.

श्रीनाथ, ज़हीर ख़ान और आशीष नेहरा किसी को नहीं बख्शा. ऐसे में हरभजन सिंह ने गिलक्रिस्ट को 57 पर और हेडन को 37 पर आउट कर अपने कप्तान को कुछ राहत दी.

लेकिन इन दोनों का आउट होना तो भारत के लिए और भी बुरा साबित हुआ क्योंकि पोंटिंग और डेमियन मार्टिन ने आ कर ताबड़ तोड़ बल्लेबाज़ी शुरु कर दी.

गांगुली ने सिर्फ़ ख़ुद को, द्रविड को और क़ैफ़ को छोड़ कर बाक़ी सब से गेंदबाज़ी करा कर देख ली लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ और ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में 359 रन का पहाड़ खड़ा कर दिया. पोंटिंग 140 और मार्टिन 88 रन पर नॉट आउट रहे.

मुश्किल लक्ष्य

वर्ल्ड कप जैसी प्रतियोगिता के फ़ाइनल में 360 रन का लक्ष्य हासिल करना वैसे ही लगभग नामुमकिन होता है.

और अगर ऐसे में मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट सचिन तेंदुलकर सिर्फ़ 4 रन बना कर चलते बनें तो फिर तो शायद हार से सिर्फ़ इन्द्र देवता ही बचा सकते हैं.

पर जब तक इंद्र भगवान करोड़ों भारतीय प्रेमियों की प्रार्थना सुनते कप्तान सौरभ गांगुली 24 और मौहम्मद क़ैफ़ शून्य पर आउट हो चुके थे.

ऐसे में इंद्र देवता ने भारतीयों को कुछ उम्मीद बँधाई भी लेकिन ज़्यादा देर नहीं. बारिश से खेल रुका लेकिन सिर्फ़ आधे घंटे के लिए.

मैदान पर वापस आ कर सहवाग ने थोड़ी देर और डूबती नैया को बचाए रखा लेकिन बेचारे वीरू भी 82 पर रन आउट हो गए.

फिर जुझारू राहुल द्रविड भी अकेले क्या करते. वो भी 47 पर आउट हो गए.

युवराज सिंह ने भी 24 रन बनाए लेकिन 360 का लक्ष्य उनकी पहुँच से काफ़ी दूर था.

भारत की पूरी टीम 234 पर ऑल आउट हो गई और 125 रन से मैच हार गई.

मैकग्रा ने 3, ब्रेट ली और सायमंड्स ने 2-2 विकेट लिए.

सीखने को मिला

मैच के बाद सौरभ गांगुली ने माना कि 360 रन का लक्ष्य पाना वाक़ई मुमकिन नहीं था लेकिन उन्होंने पूरी कोशिश की.


मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट घोषित हुए सचिन
उन्होंने कहा कि टीम को काफ़ी कुछ सीखने को भी मिला है. गांगुली ने कहा, हम इस वर्ल्ड कप में अच्छा खेले हैं और फ़ाइनल में ऐसी टीम से हारे हैं जो वर्ल्ड चैंपियन है और आज हम से अच्छा खेली.

हमने इस प्रतियोगिता में काफ़ी कुछ सीखा है. हमने एक टीम की तरह खेलना सीखा है. हमारे कई युवा खिलाड़ियों का ये पहला वर्ल्ड कप था और जिस तरह से उन्होंने दबाव को झेला है, वो क़ाबिले तारीफ़ है.

सचिन निराश

वर्ल्ड कप के सबसे अच्छे खिलाड़ी चुने गए सचिन तेंदुलकर इस हार से काफ़ी निराश थे.

सचिन ने कहा, मुझे बहुत निराशा हुई है. टॉस जीतने के बाद मुझे काफ़ी उम्मीद बँधी थी क्योंकि ये पिच बल्लेबाज़ों के लिए स्वर्ग थी पर हमारे गेंदबाज़ों के लिए आज का दिन ख़राब रहा.

मेरे मैन ऑफ़ द टूर्नामेट होने के साथ साथ मेरी टीम वर्ल्ड कप जीतती तो मुझे ज़्यादा ख़ुशी होती.

पोंटिंग की राय

वहीं मैन ऑफ़ द मैच और विजेता कप्तान रिकी पोंटिंग ने माना कि भारत की टीम कमज़ोर नहीं है.

पोंटिंग ने कहा, भारत और ऑस्ट्रेलिया दुनिया की दो सबसे अच्छी टीमें साबित हुई हैं और तभी वर्ल्ड कप के फ़ाइनल तक पहुँचीं.

भारत ने बहुत बढ़िया क्रिकेट खेलते हुए फ़ाइनल तक आते आते कई दिग्गज टीमों को धूल चटाई और लगातार 8 मैच जीते.

लेकिन जैसा मैं पहले भी कह चुका हूँ, बड़े मैचों में हमारी टीम अपने खेल को नई ऊँचाइयों तक ले जाती है. फ़ाइनल में हमने यही किया और जीत हमारी हुई.

ग़लत फ़ैसला

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने संकेत दिया कि टॉस जीत कर पहले फ़ील्डिंग करने का गांगुली का फ़ैसला ग़लत था.

उन्होंने कहा कि अगर वो टॉस जीतते तो पहले बल्लेबाज़ी ही करते. ख़ैर भारत की हार की वजह चाहे जो हो, ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड कप जीतने का पूरा श्रेय जाता है.

जिस तरह उसने कई अहम खिलाड़ियों के बग़ैर भी, बिना कोई मैच हारे वर्ल्ड कप पर क़ब्ज़ा किया उससे साफ़ है कि वही इस समय क्रिकेट दुनिया के बादशाह हैं.

सलाम ऑस्ट्रेलिया.
 
 
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