'रॉबिन्सन क्रूसो' एक नए अंदाज में

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फ़िल्म: रॉबिन्सन क्रूसो

निर्देशक: बेन स्टासेन, विंसेट केत्सेलूत

रेटिंग - **1/2

पश्चिमी देशों में रॉबिन्सन क्रूसो की कहानी किसी किंवदंती से कम नहीं है. इसे अक्सर सुना और सुनाया जाता है.

लेखक डेनियल डिफ़ो के इस उपन्यास की कहानी एक ऐसे आदमी की कहानी है जो एक समुद्री जहाज़ के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद उसके मलबे के साथ बहता-बहता एक द्वीप पर पहुंच जाता है.

द्वीप पर इस आदमी के अलावा सिर्फ़ एक आदिवासी रहता है. उसे रॉबिन्सन 'फ़्राईडे' नाम देता है. फिर फ़िल्म में इस द्वीप पर उनके जीने की कहानी दिखाई गई है.

रॉबिन्सन क्रूसो की कहानी पर कई फ़िल्में बनी हैं. इनमें कास्टअवे और रॉबिन्सन क्रूसो का नाम लिया जा सकता है.

लेकिन अंतर ये है कि इस बार इस कहानी पर एक एनिमेशन फ़िल्म तैयार हुई है और उसका नाम है 'रॉबिन्सन क्रूसो'.

बच्चों के लिए बनाई गई इस फ़िल्म को फ़्रेंच और बेल्जियन फ़िल्म निर्माताओं ने मिल कर बनाया है.

फ़िल्म का असल नाम 'दि वाइल्ड लाइफ़' है. लेकिन भारत में इस नाम को बदल दिया गया है और इसे 'रॉबिन्सन क्रूसो' के नाम से रिलीज़ किया गया है. क्योंकि यह नाम भारतीय महाद्वीप में ज़्यादा लोकप्रिय है.

अब बात फ़िल्म की. तो फ़िल्म का सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि इस बार कहानी रॉबिन्सन के एंगल से नहीं बल्कि द्वीप पर पहले से रह रहे जानवरों के नज़रिए से कही गयी है.

फ़िल्म में रॉबिन्सन एक दयालु नाविक है जो अपने कुत्ते के साथ द्वीप पर आ गया है.

द्वीप पर पहले से ही एक तोता, एक मादा सुअर, एक बकरी और आर्माडिलो मौजूद हैं. वे द्वीप पर आए इस नए 'दो पाए' को देखकर हैरान हैं.

इस फ़िल्म की सबसे अच्छी बात यही है कि कहानी को द्वीप पर मौजूद जानवरों की नज़रों से कहा गया है जो नहीं जानते की द्वीप से बाहर की दुनिया कैसी है.

बच्चों के लिए इस फ़िल्म में वाकई बहुत कुछ है. हां, बड़ों के लिए कहानी बोझिल और प्रेडिक्टिबल हो जाती है. लेकिन भारत में इसे रिलीज़ करने वाले एऩएफ़डीसी का भी यही कहना था कि इस फ़िल्म को बच्चों के लिए ही रीलीज़ किया गया है.

फ़िल्म का 3 डी एनिमेशन काफ़ी अच्छा है और ऐसा एनिमेशन अभी भी भारतीय फ़िल्मों में नज़र नहीं आता.

मूल रुप से बेल्जियन फ़िल्म होने के कारण कुछ दृश्यों से भारतीय माता पिता को आपत्ति हो सकती है लेकिन एक हल्की फ़ुल्की बच्चों की फ़िल्म में थोड़ा बहुत एडल्ट ह्यूमर यूं ही निकल जाता है.

अगर आप एनिमेशन के दीवाने हैं, या फिर आपके साथ बच्चे हैं तभी इस फ़िल्म को देखने जाएं वरना आप इसे स्किप करेंगे तो भी मुश्किल नहीं होगी.

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