क्या है "राज़-रीबूट" के भूत का राज़?

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फ़िल्म - राज़ रीबूट

कलाकार - इमरान हाशमी, कृति खरबंदा और गौरव अरोड़ा

निर्देशक - विक्रम भट्ट

रेटिंग - ** स्टार

राज़ फ़िल्म फ़्रेंचाईज़ी के साथ समस्या यह है कि यह फ़्रेंचाईज़ी इतनी पुरानी हो चुकी है कि अब इसमें वो डर और थ्रिल नहीं बचा जो लोगों को डरा सके.

2002 में आई राज़ सीरीज़ की पहली फ़िल्म ने हॉरर फ़िल्मों के बिज़नेस का रिकॉर्ड बनाया था और फिर इस फ़िल्म की फ़्रेंचाईज़ी रही राज़: दि मिस्ट्री कन्टिन्यू (2009). राज़ 3 डी (2012) ने भी भट्ट कैंप के बैंक बैलेंस को बढ़ाया.

भट्ट कैंप ने एक नए तरीके से लोगों को डराना शुरू किया था. कंप्यूटर ग्राफ़िक्स, प्रोस्थेटिक मेकअप के बल पर भारतीय हॉरर फ़िल्मों में रामसे ब्रदर का काल ख़त्म हुआ और राज़ स्टाईल हॉरर का दौर शुरू हुआ.

लेकिन हर फ़िल्म और हर आइडिया की एक एक्सपाइरी डेट होती है और राज़ स्टाईल हॉरर की एक्सपाइरी डेट भी आ चुकी है.

1920, लंदन 1920, फूंक, अलोन, एक थी डायन जैसी फ़िल्मों ने राज़ के स्टाइल को अच्छे से भुना लिया है. फिर हॉलीवुड की कॉन्जयुरिंग जैसी फ़िल्मों को देख लेने के बाद भारतीय दर्शक अब राज़ जैसी फ़िल्मों के कुछ दृश्यों पर उबासी भी ले लेते हैं.

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किसी भी राज़ फ़िल्म की तरह इस फ़िल्म की कहानी में एक भूत है जो किसी राज़ के चलते मुख्य नायिका के पीछे है, यह राज़ क्या है? यह भूत कौन है? और वह क्यों नायिका के पीछे है? इस बात को तो हम नहीं बता सकते.

लेकिन यह ज़रूर बता सकते हैं कि आपको यह सारे राज़ फ़िल्म के पहले भाग में ही समझ में आ जाएंगे.

यह हमारी समझ से बाहर है कि क्यों हिंदी हॉरर फ़िल्मों में बेवजह अंतरंग दृश्य और रोमांटिक गाने घुसाए जाते हैं. लोग डरें या प्रेम में डूबें या वो कामुक हो जाएं?

ख़ैर, फ़िल्म शुरू होती है रोमेनिया के मशहूर ट्रांसिलवेनिया शहर से. ट्रांसिलवेनिया, ड्रैकूला का शहर है. इसे देखते ही आपको लगता है कि ओह! कुछ बुरा होने वाला है. लेकिन नहीं, ऐसा नहीं होता !

ड्रैकुला का नाम बस एक मिनट के लिए आता है और उसके बाद रोमेनिया की ख़ूबसूरती से आपको परिचित करवाया जाता है और यह भी कि यहां कितनी सुविधाएं और घूमने की जगह हैं.

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भूत लैपटॉप के साथ एंट्री करता है. लैपटॉप से खून निकल रहा होता है. फिर कुछ ऐसे दृश्य आते हैं जिनमें अचानक से आते डरावने चेहरे आपको चौंका सकते हैं. लेकिन अगर आप हॉरर फ़िल्में देखते रहे हैं तो यह दृश्य आपको डरा नहीं सकता.

हम बॉलीवुड के भूतों को एक जैसी चीज़ें करते हुए इतनी बार देख चुके हैं कि एक समय तो मुझे भी लगा कि अरे, भूत को ऐसे नहीं, वैसे भगाओ.

कुल मिलाकर इस फ़िल्म में सब कुछ आपको देखा दिखाया सा लगता है. ऐसे ही सेट, बैकड्रॉप और म्यूज़िक साथ आपको पहले भी डराया जा चुका है, कई मायनों में तो फ़िल्म 6 मई को रीलीज़ हुई भट्ट कैंप की ही फ़िल्म 1920 लंदन की याद दिलाती है.

एक्टिंग के मामले में कृति को छोड़कर कोई प्रभावित नहीं करता. इमरान का अभिनय पिछली भूतिया फ़िल्मों में किए गए अभिनय जैसा है और भट्ट कैंप की नई खोज गौरव अरोड़ा अभी अभिनय में कच्चे हैं, उनकी आवाज़ को भी डब किया गया है.

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वैसे इस फ़िल्म का नाम राज़ रीबूट, यानि राज़ का पुनर्जीवन है. लेकिन इसमें लीड पेयर के अलावा कुछ भी नया नहीं मिला. वहीं इस हफ़्ते पिंक जैसी मज़बूत फ़िल्म भी रीलीज़ हुई है जिसकी हर ओर तारीफ़ हो रही है.

ऐसे में लैपटॉप के ज़रिए हिरोइन के शरीर में प्रवेश करने वाला यह हाइटेक और कामुक भूत, अमिताभ बच्चन को टक्कर दे पाएगा, कह नहीं सकते.

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