कपिल शर्मा कहें तो ठीक, हम कहें तो अश्लील!

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Image caption वरुण ग्रोवर

मशहूर गीतकार वरुण ग्रोवर को इलाहाबाद में अश्लीलता के नाम पर लोगों के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा.

'दम लगा के हईशा' और 'गैंग ऑफ वासेपुर' जैसी फ़िल्मों से मशहूर हुए वरुण ग्रोवर ने कहा, "ये वही दर्शक हैं जो कपिल शर्मा के शो में अश्लील जोक्स पर सबसे ज्यादा ताली पीटते हैं."

उन्होंने कहा, "कपिल शर्मा के शो में लड़कियों के ख़िलाफ़ कितना कुछ बोला जाता है. उनकी खिल्ली उड़ाई जाती है लेकिन वहां कोई नहीं खड़ा होता. पर जहां हम दोनों लिंग को समानता से पेश कर रहे हैं, हम पर अश्लीलता का आरोप लगा दिया जाता है."

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Image caption मसान की कहानी वरुण ग्रोवर ने लिखी थी. तस्वीर में निर्देशक नीरज घेवान के साथ वरुण.

'मोह मोह के धागे', 'ओ वुमनिया' और 'हंटर' जैसे गीत लिखकर राष्टीय पुरस्कार जीत चुके वरुण ग्रोवर कहते हैं, "भारतीय लेखन समुदाय में भी ब्राह्मणवाद है. लेखकों का सम्मान लेखक समुदाय में भी नहीं होता. ख़ासकर जब कोई लेखक व्यावसायिक यानी फ़िल्मी गाने लिखता है तो उसे साहित्यिक बिरादरी में हीन नज़रिए से देखा जाता है."

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा,, "भारत में साहित्यकार की दुनिया में भी पदक्रम है. जिसमें उपन्यास लिखनेवाले पदक्रम में सबसे ऊपर है, फिर छोटी कहानियां लिखनेवाले और सबसे नीचे हैं बॉलीवुड के लेखक. इतिहास गवाह है कि शुद्धतावादियों की हमेशा हार हुई है."

साहित्यकारों के पदक्रमण से वरुण ग्रोवर को कोई ईर्ष्या नहीं है और उनके मुताबिक़ यह साहित्यकारों के निजी हीनता है.

'ऐ दिल है मुश्किल' के बैन के संदर्भ में बात करते हुए वरुण कहते हैं कि, "अगर इंडस्ट्री एकजुट हो जाए तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. मगर इसी तरह सब अपना-अपना हित देखते रहें तो यह इंडस्ट्री और ये देश ऐसे ही गुंडागर्दी के लायक़ है."

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