फिल्म रिव्यू: अंडरवर्ल्ड सीरिज़ की पांचवी कड़ी निराश करती है

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फ़िल्म - अंडरवर्ल्ड: खूनी जंग

रेटिंग - **1\2

निर्देशक - एना फ़ॉरेस्टर

साल 2003 में जब अंडरवर्ल्ड नाम से एक काल्पनिक दुनिया (डार्क वर्ल्ड) में वैंपायर और मानव भेड़ियों के बीच की जंग को दिखाती फ़िल्म रिलीज़ हुई थी तो फ़िल्म समीक्षकों ने इसे ख़ारिज कर दिया था.

लेकिन कमाल के एक्शन और एक काल्पनिक दुनिया में भेड़ियो और वैंपायरो में होती लड़ाई को दर्शकों ने इतना पसंद किया कि स्टूडियो को भारी मुनाफ़ा हो गया और इस फ़िल्म का यह पाँचवा भाग है.

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इस फ़िल्म ने ब्रिटिश अभिनेत्री केट बेकिंस्ले को एक एक्शन अभिनेत्री की ऐसी इमेज दी की इसके बाद उन्हें कई एक्शन फ़िल्मों में रोल निभाने का मौका मिला.

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अब बात करते हैं फ़िल्म की, अगर आप इस फ़िल्म के बारे में पहली बार सुन रहे हैं और इस फ़्रेंचाईज़ी से अनभिज्ञ हैं या पिछले पाँच भागों में से कोई भाग छूटा भी है, तो भी आपको यह फ़िल्म निराश नहीं करेगी क्योंकि फ़िल्म की शुरुआत में ही मुख्य किरदार सेलीना (केट) आपको इस पूरी फ़्रेंचाइज़ी का रिकैप बताती है.

सो आपको पता चल जाता है कि यह कहानी एक वैंपायर योद्धा सेलीना की है जो वैंपायर समाज की रक्षा मानव भेड़ियों से करती है.

मानव भेड़िये, वो काल्पनिक जीव हैं जिनके बारे में माना जाता है कि चाँद की रोशनी में वो मनुष्य रूप से निकल कर भेड़िये का रूप धारण कर लेते हैं.

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दोनों ही निशाचर प्रजाति हैं और सदियों से एक दूसरे के खून के प्यासे हैं.

पिछली पाँच फ़िल्मों में इन दोनों प्रजातियों के बीच खून खराबा होता रहा है और हर बार सेलीना किसी महाजंग को रोकने की कोशिश करती है और दोनो ही प्रजातियों का सर्वनाश होने से रोक लेती है.

यह एक हॉरर-एक्शन फ़िल्म है और इसमें आप ज़्यादा दिमाग़ न लगाएं बल्कि सिर्फ कल्पना के सहारे फ़िल्म के एक्शन सीन्स का लुत्फ़ उठाएं.

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हॉलीवुड में हर फ़िल्म फ़्रेंचाइज़ी की नई फ़िल्म पिछली फ़िल्म से कुछ बेहतर करने की कोशिश करती है लेकिन पाँचवे भाग के तौर पर 'ब्लड वॉर्स' उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाती.

वैंपायर योद्धा सेलीना का सामना इस बार एक ऐसे लाइकन (मानव भेड़िए) से है जो पूरी लाइकन प्रजाति को संगठित कर रहा है, ताकि वो वैंपायरो पर हमला बोल सकें.

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यह लाइकन अन्य मानव भेड़ियों से अलग है क्योंकि न सिर्फ़ यह सोच सकता है बल्कि यह मानव भेड़िए के रुप में और भी बलशाली हो जाता है.

वहीं वैंपायर समाज में किसी भी मुखिया के न रह जाने के कारण बगावत हो रही है और अपने राजा की खोज में भटकते वैंपायर संगठित नहीं होने के कारण कमज़ोर हो गए हैं.

अब इस सारे झगड़े में आपको कई बार यह लग सकता है कि आपकी सहानुभूति किसे मिले ?

क्योंकि वैंपायर हो या लाइकन बाद में वो तो मनुष्य को खा ही जाएंगे, ऐसे में हमारे साथ फ़िल्म देख रहे सज्जन ने सुझाव दिया कि अच्छा हो यह लोग आपस में ही लड़ मरें.

इस फ़िल्म में खून खराबा और एक्शन दृश्य पिछली फ़िल्मों से कम है लेकिन कहानी पर काफ़ी मेहनत की गई है और किरदारों को इस तरह गढ़ दिया गया है जिससे इस फ़िल्म का एक और भाग बनाया जा सकता है.

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फ़िल्म में एक नीली रोशनी हर समय छाई रहती है जो फ़िल्म की थीम को 'डार्क' बनाने के लिए किया गया एक प्रयास है, लेकिन यही नीली रोशनी हम पिछली चार फ़िल्मों से देखते आ रहे हैं और अब यह फ़िल्म को बोझिल बनाता है.

फ़िल्म की निर्देशक है एना फ़ॉरेस्टर जो कई बड़ी फ़िल्मों में सहायक रही हैं लेकिन बतौर एकल निर्देशक यह उनकी पहली फ़िल्म है.

निर्देशक का नयापन पर्दे पर दिखता है, कई दृश्य ऐसे हैं जिन्हें आप हॉल में बैठे बैठे ही ठीक करने लगेंगे और उन्हें और बेहतर बनाने की सोचने लगेंगे.

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फ़िल्म में थ्रीडी इफ़ेक्ट का इस्तेमाल बहुत ज़्यादा नहीं हुआ है ऐसे में अगर आप इस फ़िल्म को कम पैसे में बिना थ्री डी के भी देखें तो नुकसान नहीं होगा.

फ़िल्म को हमारी ओर से ढाई स्टार, पहला इस फ़्रेचाइज़ी की कहानी को नया और रोचक मोड़ देने के लिए, दूसरा केट के एक्शन अवतार के लिए और आधा फ़िल्म के ग्राफ़िक्स के लिए जो हॉलीवुड फ़िल्मों की जान होते हैं.

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