फ़िल्म रिव्यू: रईस देखनी है तो दिमाग घर छोड़िए, डेयरिंग साथ लाइए

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Image caption फ़िल्म रईस का पोस्टर

रेटिंग - **1\2 स्टार

फ़िल्म - रईस

निर्देशक - राहुल ढोलकिया

अभिनेता - शाहरुख़ ख़ान, नवाज़ुद्दीन सिद्दिक़ी, माहिरा ख़ान, ज़ीशान अयूब

शाहरुख़ की पिछली दो फ़िल्में 'दिलवाले' और 'फ़ैन' बॉक्स ऑफ़िस पर धराशायी हो गई थी और इसलिए उनकी इस फ़िल्म 'रईस' से निर्माताओं को ढेरों उम्मीदें हैं.

रईस इन उम्मीदों पर खरी भी उतरती है लेकिन थोड़ी-थोड़ी, क्योंकि फ़िल्म में ढेरों कमियां भी हैं.

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Image caption फ़िल्म रईस का पोस्टर

कहानी

रईस कहानी है गुजरात के एक शराब माफ़िया रईस की जो भारत के "ड्राई स्टेट" गुजरात में अपना साम्राज्य बनाता है और शराब के इस खेल का सबसे बड़ा व्यापारी बन जाता है.

लेकिन एक गलती से रईस ऐसी मुसीबत में फ़ंसता है जो उसकी जान ले लेती है.

फ़िल्म की कहानी बस इतनी ही है और फ़िल्म के मुख्य किरदार रईस के ईर्द-गिर्द घूमते हैं.

रईस के किरदार को गुजरात के शराब माफ़िया अब्दुल लतीफ़ के जीवन पर आधारित बताया जा रहा है लेकिन फ़िल्म की निर्माता कंपनी ने इस फ़िल्म के किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से जुड़ा होने से इंकार किया है.

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Image caption फ़िल्म रईस का पोस्टर

अभिनय

फ़िल्म की जान है रईस यानि शाहरुख़ ख़ान जो न सिर्फ़ मुख़्य किरदार निभा रहे हैं.

वो इस फ़िल्म के निर्माता भी हैं और शायद इसलिए उन्होनें अपने रोल पर मेहनत की है.

शाहरुख़ एक एंटी-हीरो के किरदार में शुरू से ही जंचते रहे हैं, फिर चाहे वो 'बाज़ीगर', 'डर', 'डॉन' या फिर 'रईस' हो.

फ़िल्म में शाहरुख़ के अपोज़िट काम करने वाली पाकिस्तानी अदाकारा माहिरा ख़ान दिखती बेहद ख़ूबसूरत हैं लेकिन अपने अभिनय से प्रभावित नहीं कर पाती.

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Image caption फ़िल्म रईस में शाहरूख़ और माहिरा

वैसे भी पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर हुए विवाद के बाद से माहिरा को इस फ़िल्म की पब्लिसिटी से दूर रखा गया है और निर्माता कंपनी के मुताबिक फ़िल्म से उनका रोल भी कम किया गया है.

फ़िल्म में छोटा लेकिन कमाल का रोल किया है नवाज़ुद्दीन सिद्दिक़ी ने. वो जितनी बार और जितने समय के लिए स्क्रीन पर आते हैं, फ़िल्म को गति देते हैं.

हालांकि नवाज़ एक सख़्त मिज़ाज आईपीएस के किरदार में हैं, वो लोगों को गुदगुदा जाते हैं.

फ़िल्म में रईस के जिगरी दोस्त सादिक़ के किरदार में अभिनेता ज़ीशान अयूब हैं और वो फ़िल्म में शाहरुख़ के साथ अच्छा तालमेल बिठाते हैं.

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कैमरा और निर्देशन

फ़िल्म की कमज़ोर कड़ी फ़िल्म का कैमरावर्क माना जा सकता है. क्रोमा तकनीक से बने कई दृश्य बड़े पर्दे पर ख़राब दिखते हैं और शाहरुख़ के अलावा बाकि लोगों पर फ़िल्माए गए दृश्य काफ़ी जल्दबाज़ी में शूट किए लगते हैं.

फ़िल्म की एडिटिंग भी कुछ अटपटी लगती है और शाहरुख़ के अलावा बाकि सभी किरदारों का रोल ख़त्म होने की जल्दबाज़ी में लगता है. शायद यह फ़िल्म को गति देने के लिए किया गया हो.

लेकिन इस गति देने के चक्कर में कुछ एक चीज़े छूटती सी लगती हैं.

ऐक्शन दृश्यों में राहुल ने अच्छा काम किया है और शायद इसलिए ही ऐक्शन दृश्यों को थोड़ा लंबा खींचा गया है.

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Image caption फ़िल्म 'रईस' का पोस्टर

गीत संगीत

फ़िल्म का संगीत बेहद औसत है और अरिजीत सिंह और हर्षदीप कौर के गाए गाने 'ज़ालिमा...' को छोड़कर आप किसी और गाने को शायद ही पसंद कर पाएं.

राम-संपत के संगीत में वो बात नहीं है जो अक्सर शाहरुख़ की फ़िल्मों की जान होती है.

फ़िल्म में सनी लियोन पर फ़िल्माया गाना 'लैला ओ लैला' असल में क़ुर्बानी फ़िल्म का गीत है, ऐसे में इस गीत के अच्छे लगने का क्रेडिट राम-सपंत को नहीं दिया जा सकता.

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Image caption शाहरूख़ और माहिरा

यह फ़िल्म एक साल से बनकर तैयार है और पहले 'सुल्तान' के साथ आने वाली यह फ़िल्म अब ऋत्तिक रोशन की 'काबिल' के साथ रिलीज़ हो रही है.

माहिरा ख़ान को लेकर हुए विवाद के बाद इस फ़िल्म को रिलीज़ के लिए भी काफ़ी मशक़क़्त करनी पड़ी है, लेकिन बॉलिवुड मसालों की छौंक से बनाई गई यह फ़िल्म शाहरुख़ के फ़ैन्स के लिए है और उन्हें पसंद आएगी.

लेकिन अगर आप इसे एक सधी हुई क्राईम थ्रिलर के तौर पर देखने जा रहे हैं तो आपको मज़ा नहीं आएगा.

रईस का लुत्फ़ उठाना है तो दिमाग घर पर छोड़कर और डेरिंग साथ में लेकर जाइए.

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