भारत रंग महोत्सव में दिखा जिन नाटकों का जलवा

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Image caption तमिल नाटक - द्रौपदी वास्थिरबारणं

दिल्ली में 19 वां भारत रंग महोत्सव समाप्त हो गया है. 21 दिनों तक चलने वाले भारंगम में देशी, विदेशी और लोक व पारंपरिक नाटकों का मंचन हुआ. भारंगम में प्रसिद्ध दिवंगत नाट्य निर्देशकों कावालम नारायण पणिक्कर,कन्हैयालाल और प्रेम मटवानी की नाट्य प्रस्तुतियों का मंचन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी.

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Image caption हिंदी नृत्य नाटक - राम की शक्तिपूजा

19 वें भारत रंग महोत्सव में विदेशी और लोक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया. इस वर्ष 10 पारंपरिक लोक प्रस्तुतियां भी भारंगम का हिस्सा रहीं. लोक रंगमंच में मोगल तमाशा, दशावतार, ताल मद्दले, रामलीला ,भांड पत्थर और छत्तीसगढ़ के नाचा की प्रस्तुतियां सम्मिलित थी.

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Image caption छत्तीसगढ़ी नाटक-परसादी लाल (नाचा)

इस साल कैंपस परफॉरमेंस में बीहू, थांगटा,छऊ,ढोल चोलम, लद्दाख नृत्य, मणिपुरी मार्शल आर्ट,बीहू,नौटंकी, हरियाणवी फाग,भवई, गरबा, कालबेलिया, लावणी, कच्ची घोड़ी व अन्य क्षेत्रीय प्रस्तुतियां शामिल रही. नाटकों के मंचन के अलावा लिविंग लीजेंड सीरीज, मास्टर क्लासेज, यूथ फोरम और डायरेक्टर्स मीट भी भारत रंग महोत्सव का अभिन्न अंग रही.

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Image caption मणिपुरी नाटक - उरुभंगम

लोकप्रिय भास के नाटकों पणिक्कर के 'मध्यमव्यायोग' और रतन थियाम के 'उरुभंगम' को दर्शकों ने खूब पसंद किया. रतन थियाम आज के सबसे महत्वपूर्ण रंग - रचनाकार के रूप में जाने जाते हैं. उनका नाटक 'उरुभंगम' भास द्वारा लिखा गया संस्कृत नाटक है जो महाभारत के प्रसंग दुर्योधन और भीम के बीच शुरू होने वाले युद्ध से प्रेरित है.

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Image caption बघेली नाटक - आनंद रघुनन्दन

संजय उपाध्याय निर्देशित मध्यप्रदेश के स्कूल ऑफ़ ड्रामा के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाटक 'आनंद रघुनंदन' हिंदी का प्रथम नाटक है, जिसमें संस्कृत की शास्त्रीय परंपरा के पुनरूत्थान की कोशिश देखी जा सकती है. नाटक की कथावस्तु रामकथा है. पर इसके पात्रों का नाम मूल न होकर समानार्थी है. नाटक का आरंभ नट-नटी से होता है और कहानी आगे बढ़ती है.

कन्नड़ नाटक 'अक्षयम्बरा' एक प्रयोगवादी नाटक है. नाटक की निर्देशिका शरण्या रामप्रकाश कहती हैं, "यह रचना उन व्यक्तिगत टकरावों के माध्यम से हुई जिनका अनुभव मुझे एक पुरुष प्रधान कला विधा में एक स्त्री के रूप में हुआ." इस नाटक में दिखाया गया है की पिछले 800 सालों से पुरुषों द्वारा स्त्री चरित्र प्रदर्शित की जा रही विधा में जब एक स्त्री कौरव के प्रधान पुरुष का वेश चुनती है, तब द्रौपदी की भूमिका करने वाले पुरुष अभिनेता के उस स्त्री से क्या व्यक्तिगत टकराव होते हैं.

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Image caption कन्नड़ नाटक - अक्षयम्बरा

विदेशी नाटकों में तुर्की की प्रस्तुति 'द ड्रीम्ज़ ऑफ़ फ़ीनिक्स' गैर शाब्दिक प्रस्तुति है जिसमें मुख्य किरदार एक चित्रकार है जिसकी चेतना में हमेशा द्वन्द बना रहता है. इस नाटक के निर्देशक मोहम्मद ख़जीली ने कुछ प्रसिद्ध भारतीय गीतों को प्रस्तुति का हिस्सा बनाया जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया.

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Image caption तुर्की नाटक - द ड्रीम्ज़ ऑफ़ फ़ीनिक्स (गैर शाब्दिक )

युवा निर्देशक हिमांशु कोहली और प्रशांत कुमार के नाटक 'ब्लैक बर्ड' में अभिनेत्री सलोनी लूथरा और अभिनेता स्वानंद किरकिरे मुख्य भूमिका में थे. जिसमें एक 27 वर्ष की महिला जिसके साथ 15 साल पहले यौन शोषण हुआ था अचानक उस इंसान के सामने कुछ सवाल लेकर आती है जिसने उसका शोषण किया था और उनका जवाब मांगती है.

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Image caption हिंदी नाटक - ब्लैक बर्ड
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Image caption हिंदी नाटक - तुम्हारा विन्सेन्ट

हैदराबाद के नाटककार सत्यब्रत राउत का नाटक 'तुम्हारा विन्सेन्ट' मशहूर चित्रकार विन्सेन्ट वॉन गॉग़ की कला यात्रा और अपने भाई थीओ को लिखे पत्रों पर है. सत्यब्रत कहते हैं, "राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के दिनों से ही दृश्य माध्यम को समझने और ये नाटक लिखने में वॉन गॉग़ मेरी प्रेरणा रहे हैं."

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Image caption हिंदी नृत्य नाटक - राम की शक्तिपूजा

लोक प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ की 'परसादी लाल (नाचा)' मनोरंजक प्रस्तुति रही जिसे दर्शकों ने खूब सराहा. नाचा छत्तीसगढ़ में मनोरंजन का एक प्रमुख स्रोत रहा है, जिसमें महिला पात्र भी पुरुषों द्वारा निभाया जाता है. 'रावत नाचा' छत्तीसगढ़ की विविध नृत्य विधाओं में से एक है, यह नृत्य यादव समुदाय द्वारा किया जाता है.

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Image caption छत्तीसगढ़ी नाटक - परसादी लाल (नाचा)

महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की कालजयी रचना 'राम की शक्तिपूजा' को निर्देशक व्योमेश शुक्ल ने नृत्य - नाट्य के रूप में प्रस्तुत किया. बनारस में रची - बसी प्राचीन रामलीला शैली और संगीतबद्ध कविता की प्रस्तुति रोचक और आकर्षक रही. रावण से युद्ध जीतने के लिए राम शक्ति की आराधना करते हैं और देवी को 108 नीलकमल अर्पित करने का संकल्प लेते हैं.

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Image caption कन्नड़ नाटक - अक्षयम्बरा

राम की परीक्षा लेने के लिए देवी आखिरी फूल चुरा लेती है. तब राम अपना नेत्र अर्पित करने के लिए तीर उठाते हैं क्योंकि बचपन में माँ उनके नेत्रों को नीलकमल समान कहा करती थी. देवी प्रकट हो उन्हें युद्ध जीतने का वरदान देती है.

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