झोपड़पट्टी से हॉलीवुड तक सनी का सफ़र

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मुंबई की कलीना की झोपड़पट्टी में रहने वाला आठ साल का सनी पवार ऐसी उम्र में ऑस्कर समारोह में शामिल हुआ जब उसे शायद इस पुरस्कार की कोई समझ भी ना हो.

छह नामांकन पाने वाली फ़िल्म 'लायन' भले ही ऑस्कर न जीत पाई हो, लेकिन फ़िल्म का अहम हिस्सा रहे सनी ने सभी का दिल ज़रूर जीत लिया.

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झोपड़ी से ऑस्कर तक

ऑस्कर पुरस्कार में शामिल होकर अमरीका से वापस मुंबई लौटे सनी पवार ने बताया, ''मैं और देव पटेल लुका-छिपि का खेल खूब खेलते थे. मुझे वहां लोगों से मिलकर बहुत मज़ा आया.''

पसंदीदा अभिनेता के सवाल पर सनी ने कहा कि रजनीकांत, ऋतिक रोशन और अजय देवगन का वो फ़ैन हैं.

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सनी ने कहा कि वो रियल्टी शो में नहीं जाना चाहते हैं. लेकिन एक्टिंग और पढ़ाई साथ-साथ करते रहना चाहते हैं.

बिना अंग्रेज़ी जाने ऑस्कर तक पहुंचे सनी पवार

ऑस्कर की गलती, 'ला ला लैंड' बन गई थी बेस्ट फ़िल्म

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ऑस्कर के रेड कार्पेट पर सूट बूट में अपने बेटे को चलते देख उनकी माँ की आँखें खुशी से भर आई थीं

दुनिया पर छाने की तमन्ना

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वो कहती हैं, "ऑस्कर के लिए सूट-बूट में बहुत हैंडसम लग रहा था सनी. बचपन से ही उसे 'सिंघम' और 'छोटा भीम' जैसी फिल्मों का शौक था. बचपन में बोलता था कि मैं पूरी दुनिया पर छा जाना चाहता हूं. एक छोटा बच्चा अपनी बात को जल्दी पूरी कर देगा, ऐसा मैंने नहीं सोचा था."

आठ साल की उम्र में अपने माँ-बाप का सिर फ़ख़्र से सिर ऊँचा करने वाले बच्चे के साथ हॉलीवुड के कई सितारों ने तस्वीरें खिंचवाईं. फ़िल्म में उनके को-स्टार देव पटेल और निकोल किडमैन शूटिंग के दौरान सनी के दीवाने हो गए.

छोटी उम्र में बड़ी कामयाबी

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पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और हॉलीवुड के कई चहेते कलाकारों से मिल चुके सनी ने सफलता का स्वाद छोटी उम्र में ही चख लिया. हॉलीवुड की चकाचौंध का हिस्सा बने सनी की ज़़िंदगी मुंबई में आसान नहीं रही.

मुंबई के उपनगर सांताक्रुज़ के कलीना इलाक़े की छोटी चाल में रहते सनी का घर भले छोटा हो. लेकिन उहोंने सपने बड़े ही देखे नहीं. एक छोटी सी संकरी गली से होकर ही सनी के घर का रास्ता गुजरता है. लेकीन यह छोटी सी संकरी गली सनी को हालीवुड तक ले जाएगी, यह किसी ने नहीं सोचा था.

आँखों के तारे सनी पर उसके दादा जान छिड़कते हैं. क़रीब 40 साल से शिवसेना से जुड़े रहे सनी के दादा भीमा पवार 1992 में कॉरपोरेटर का चुनाव लड़ चुके हैं. वे क़रीब 20 साल तक बाल ठाकरे के अंगरक्षक रहे.

सब जगह सम्मान

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इसलिए सनी के मुंबई लौटते ही मातोश्री में उद्धव ठाकरे ने भी उन्हें सम्मानित करने का कार्यक्रम रखा. सनी के पिता पहले एयर इंडिया में कुली थे. वो बाद में मुंबई महानगर पालिका में सफ़ाई कर्मचारी का काम करने लगे.

फ़िल्म की शूटिंग और उनके प्रोमोशन के लिए इधर-उधर घूमने वाले सनी की पढ़ाई कई बार छूट जाती है. लेकिन अपनी पढ़ाई को तवज्जो देने वाले सनी अपने स्कूल में भी सब के चहेते हैं.

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उनकी टीचर कहती हैं, "वो बहुत ही सीधा-सादा बच्चा है, क्लास में सबका दोस्त है. जिस साल उसका ऑडिशन हुआ, वो पहली कक्षा में था. मैं ही उसकी क्लास टीचर थी और आज वो तीसरी में है तो भी मैं ही हूं. उसके व्यवहार से ऐसा बिल्कुल नहीं लगता है कि वो बहुत बड़ा बन गया हो."

कहानी 'लायन' की

फ़िल्म 'लायन' में अहम किरदार निभाने वाले सनी की भूमिका एक ऐसे बच्चे की है जो 5 साल की उम्र में अपने माँ बाप से अलग हो जाता है, ग़लती से जिस ट्रेन में बैठ जाता है, वह उसे कोलकाता ले जाती है. वहां एक आस्ट्रेलियन दंपति उसे गोद ले लेता है. जब वो 25 साल का हो जाता है तो वापस अपने माँ बाप की खोज में निकल पड़ता है.

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सनी की सफलता जहाँ काबिले तारीफ़ है, उसका सफर कई लोगो को 'स्लमडॉग मिलियनेयर' का हिस्सा रही रूबीना और अज़हर की याद दिला देता है. लेकिन वे आज गुमनामी के अंधेरों में हैं.

डर इसी बात का है कि कहीं सनी भी उसी कड़ी का हिस्सा बन कर न रह जाए. उम्मीद यही है कि इस 'लायन' की दहाड़ लोगों के कानों तक ज़रूर जाएगी.

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