'दर्शक जानते है कि उन्हें क्या देखना है,क्या नहीं'

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प्रकाश झा की नई फ़िल्म 'लिपस्टिक अंडर माई बुर्का' को उनकी अस्सिटेंट अलंकृता श्रीवास्तव ने डायरेक्ट किया है, जिसको केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने किसी भी तरह का सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया है.

प्रकाश झा कहते हैं कि दर्शक समझदार है और उन्हें पता है कि क्या देखना है क्या नहीं .

प्रकाश झा की ज्यादातर फ़िल्में विवादों का शिकार हो ही जाती है इस बात पर प्रकाश झा कहते हैं "सामाजिक फ़िल्में करता हूँ जिनका विषय काफी विस्तृत होता है ,जहाँ हर तरह के विचार होते , लोग चर्चा करते है लेकिन जब फ़िल्म लोगों के बीच आती है तब सब पसंद की जाती है तब कोई झमेला नहीं होता सब परेशानी रिलीज पहले ही होती है'

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प्रकाश झा कहते है,'लिपस्टिक अंडर माई बुर्का' का वर्तमान और फ्यूचर दोनों अच्छा है इसको कई पुरस्कार मिल चुके है ग्लासगो इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में ऐनुअल ऑडियंस अवॉर्ड से नवाज़ा गया है. साथ ही साऊथ एशियाई फेस्टिवल में इस फ़िल्म का प्रीमियर होगा इसकी अलावा कई जगह ये दिखाई जा चुकी है ,सब जगह इस फ़िल्म को वाहवाही मिली है दूसरी तरफ भारतीय सेंसर बोर्ड का संकीर्ण नज़रिया है जिसकी ख़िलाफ़ ट्रिब्यूनल में जा चुके हैं ,जहाँ सुनवाई की तारीख मिलेगी तब जाकर मामला साफ़ होगा .

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प्रकाश झा कहते हैं कि ये चार औरतों की कहानी है, जो समाज के उस वर्ग की हैं, जहाँ वो कभी अपनी बात बयां नहीं कर पाई , कभी उनकी बात सुनी नहीं गयी.

सेंसर बोर्ड की चिठ्ठी पढ़ने के बाद प्रकाश झा का कहना है, "औरते भला अपनी फैंटिसी की बात कैसे कर सकती है ख़ासकर अपनी सेक्सुअल फैंटिसी की बात ,इन बातों को मर्द करे तो अच्छा है कोई दिक्कत नहीं होती लेकिन औरतें नहीं कर सकती है ,इस वजह से समाज ख़राब हो जायेगा यही मतलब है सेंसर बोर्ड का"

''लिपस्टिक अंडर माई बुर्का'' फिल्म में रत्ना पाठक शाह, कोंकणा सेन शर्मा, विक्रांत मैसी, अहाना कुमरा और शशांक अरोड़ा ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं.

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