निर्माता अब भी लटका कर रखते हैं: तापसी

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बॉलीवुड में ए-लिस्टर्स बनने की चाह किसे नहीं होती. बॉक्स ऑफिस पर कामयाब फ़िल्में इस बात को साबित करने के लिए काफी हैं कि आप एक ए-लिस्टर यानी टॉप के कलाकार हैं.

बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाने के बाद भी अगर उस लीग तक पहुँचने के लिए किसी को संघर्ष करना पड़े तो उसका दर्द समझा जा सकता है.

पिछले साल बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ 'पिंक' जैसी बेहतरीन फ़िल्म देने वाली अभिनेत्री तापसी पन्नू को दुख है तो सिर्फ इस बात का कि उन्हें आज भी फिल्मों के लिए वो पहली पसंद नहीं हैं.

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आने वाली फ़िल्म 'नाम शबाना' के लिए बात करते के दौरान तापसी कहती हैं, "अवॉर्ड और फ़िल्मों की सफलता के बाद भी मेरी ज़िंदगी नहीं बदली. मुझे तो आज भी दो और तीन हीरोइनों के विकल्प मे रखा जाता है. मैं अब भी ए-लिस्ट मे नहीं आई हूं."

सीरियस रोल

साल 2013 मे डेविड धवन की फ़िल्म 'चश्मे बद्दूर' से बॉलीवुड मे क़दम रखने वाली तापसी साल 2010 से साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में काम कर रही हैं.

अपनी पहली ही हिन्दी फिल्म 'चश्मे बद्दूर' से लोगों का दिल जीतने वाली तापसी ने साल 2015 मे अक्षय कुमार के साथ फिल्म 'बेबी' से ये साबित कर दिया कि वो कॉमेडी के साथ-साथ सीरीयस रोल भी बखूबी निभा सकती हैं.

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Image caption राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से नेशनल अवॉर्ड लेतीं तापसी पन्नू

2016 मे आई 'पिंक' ने तो उन्हें सफल हीरोइनों की फेहरिस्त मे शामिल कर दिया. अपनी हर फिल्म से ज्यादा से ज्यादा लोगों के दिलों मे जगह बनाने वाली तापसी को एक बात सताती है.

साउथ का सिनेमा

तापसी का कहना है, "आज भी मुझे लटकाया जाता है. मुझे कहा जाता है कि रुको. फ़िल्म 'नाम शबाना' रिलीज होने दो, उसके बाद देखा जाएगा कि मैं किसी बिग प्रोजेक्ट का हिस्सा भी हो सकती हूं या नहीं."

दक्षिण भारतीय सिनेमा मे उनकी दूसरी ही फ़िल्म 'आदुकलम' (तमिल) को 6 नेशनल अवॉर्ड मिले और बॉलीवुड में भी उनकी फ़िल्म 'पिंक' को लोगों के बीच खूब सराहा गया.

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अपनी हर फिल्म के साथ सफलता की सीढ़ी चढ़ने वाली तापसी की इच्छा है कि वो टॉप हीरोइनों की लीग मे शामिल हों.

सफलता का स्वाद

वो कहती हैं, "मैं टॉप पर पहुंचना चाहती हूं क्योंकि एक बार अगर आप वहाँ पहुँच गए तो आपको अच्छी फ़िल्में ऑफर होती हैं फिर इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कि आपकी उम्र क्या है."

तापसी आने वाले दिनों मे फ़िल्म 'नाम शबाना' और 'जुड़वा-2' में नजर आएंगी.

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तापसी का मानना है कि हालिया सफलताओं के बाद भले ही हिंदी फिल्मों मे उनका स्टेटस न बदला हो लेकिन लोग उनकी बातों को अब सुनने लगे हैं.

वो कहती हैं, "पहले मेरी बातों को सुन कर अनसुना कर दिया जाता था लेकिन आज अगर मैं कुछ कहती हूं तो लोग सुन ज़रूर लेते हैं. इससे इतना फर्क ज़रूर पड़ा है, लेकिन मैं टॉप लीग मे शामिल नहीं हुई हूं."

तापसी का कहना है, "क्यों नहीं हुई, नहीं पता और शायद अगर कल टॉप लीग मे शामिल हो भी गई तो भी मुझे ये पता नहीं चलेगा कि अब ऐसा क्या हो गया जो मैं शामिल हो गई हूं."

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