25 साल की हुई 'धक-धक' गर्ल

  • 3 अप्रैल 2017
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'धक-धक गर्ल' 25 साल की हो गई हैं. चौंकिए मत! जिस गीत से माधुरी दीक्षित को "धक धक गर्ल" का नाम मिला वो आज से 25 साल पहले आया था.

साल 1992 मे तीन अप्रैल को फ़िल्म 'बेटा' की रिलीज़ से पहले वो 'माधुरी दीक्षित' थीं, लेकिन गीतकार समीर के 'धक-धक करने लगा' गीत ने उन्हें 'धक-धक गर्ल' बना दिया.

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अपने को-स्टार अनिल कपूर को रिझाती माधुरी के गीत धक-धक ने लोगों के दिल को कुछ ऐसा धड़काया की आज भी वो हिंदी सिनेमा के चंद कामुक अपील वाली गीतों में से एक है.

दरअसल इस गीत का जन्म श्रीदेवी के गाने 'काटे नहीं कटते' को टक्कर देने के लिए हुआ था.

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साल 1987 में आई श्रीदेवी और अनिल कपूर की फ़िल्म मिस्टर इंडिया के 'काटे नहीं कटते' गीत के हिट होने के बाद फ़िल्म बेटा के निर्देशक इंद्र कुमार अपनी फ़िल्म में कुछ ऐसा ही गीत चाहते थे जो उस गीत को टक्कर दे सके और उनकी फ़िल्म को हिट करा सके.

उन्हें पूरा विश्वास था कि उनकी फ़िल्म की हीरोइन माधुरी ही ऐसे किसी गाने को टक्कर दे सकती हैं.

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फ़िल्म के सारे गीतों के साथ-साथ गीत "धक-धक" लिखने वाले समीर को आज भी याद है कि कैसे फ़िल्म के निर्देशक इंद्र कुमार ने उन्हें हिदायत दी, "फिल्म के निर्देशक इंद्र कुमार मेरे पास आए और कहने लगे कि हमें एक ऐसा गीत चाहिए जो श्रीदेवी की मिस्टर इंडिया के 'काटे नहीं कटते' को टक्कर दे सके."

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वो कहते हैं, "उन्होंने ये भी बताया कि उन्होंने एक साउथ की फ़िल्म का संगीत सुना है जिसकी बीट उन्हे पसंद आई है और वो उसी धुन पर गाना चाहते हैं. जिस धुन का उन्होंने ज़िक्र किया, उस धुन पर धक-धक शब्द ही फ़िट हो रहा था और इस तरह धक-धक गीत बना, मैंने श्रीदेवी का वो गीत देखा था और मुझे भी इस बात पर विश्वास था कि सिर्फ़ माधुरी ही उस टक्कर का गीत कर सकती हैं."

ख़ास बात ये है कि श्रीदेवी को टक्कर देने के लिए जिस दक्षिण भारतीय फ़िल्म के गीत से प्रेरणा ली गई वो भी श्रीदेवी की ही थी.

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"धक-धक" 1990 में आई तमिल फिल्म "अब्बा नी तियानी" की हुबहू कॉपी थी.

इस तमिल फ़िल्म का संगीत इलैयाराजा ने दिया था, वहीं हिन्दी फ़िल्म बेटा के लिए संगीतकार आनंद मिलिंद ने संगीत दिया था.

इस गीत को फ़िल्म की रिलीज़ से एक हफ्ते पहले ही फिल्म में शामिल किया गया था.

फ़िल्म के निर्माता अशोक ठाकरिया बताते हैं, "फ़िल्म की एक हफ्ते बाद रिलीज़ थी और हमने ये गीत फ़ाइनल किया. अनिल कपूर और माधुरी दोनों के ही पास डेट्स नहीं थे, लेकिन फिर भी ये गाना इन दोनों को इतना पसंद आया कि दोनों ने इस गीत की शूटिंग के लिए रात का समय निकाला. चार से पांच दिन गीत को शूट करने में लगे और उसके बाद जब ये गाना रिलीज़ हुआ तो इतिहास बन गया."

इस गीत को गाने वाली अनुराधा पौडवाल को भी याद है कि कैसे जल्दी-जल्दी में उनसे ये गाना गवाया गया था.

वो बताती हैं, "मुझे कोलकाता के लिए जाना था और फ्लाइट पकड़नी थी. मुझे बोला कि इस गीत को गाना ही पड़ेगा क्योंकि बहुत ज़रूरी है. मुझे गाने का ब्रीफ़ दिया गया कि एक पत्नी है जो अपने पति को रिझा रही है तो उस गीत में जो "आउच" शब्द है वो मैंने डाला पर्सनल टच देने के लिए. मुझे वो गाने की सिचुएशन के हिसाब से ठीक लगी, लेकिन मैं आज भी मानती हूं कि माधुरी ने जैसे इस गीत में अपने एक्सप्रेशन दिए थे उसकी वजह से ही ये गाना हिट हुआ."

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साल 1992 में फ़िल्म 'बेटा' के लिए बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवॉर्ड पाने वाली माधुरी के साथ-साथ इस गीत के लिए अनुराधा पौडवाल को बेस्ट प्लेबैक सिंगर और सरोज ख़ान को बेस्ट कोरियोग्राफर का अवॉर्ड मिला.

फ़िल्म के निर्माता अशोक ठाकरिया बताते हैं, "उस समय प्रमोशन मार्केटिंग का ज़माना नहीं था. फ़िल्म माउथ पब्लिसिटी से चलती थी. इस फ़िल्म में ये गाना इंजन की तरह था जो लोगों को पसंद आ रहा था. लोग गीत को देखने कई बार जा रहे थे."

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Image caption गीतकार समीर

गीतकार समीर बताते हैं, "माधुरी इस गाने से बहुत खुश थीं. वो सिटिंग में भी आती थीं और अपने सुझाव भी देती थीं. ये गाना सुन कर वो फ़िल्म के बाकी गीतों को भूल गई थीं. उनके सामने एक ही टारगेट था कि श्रीदेवी के 'मिस्टर इंडिया' के गीत को पीछे छोड़ना है, इसलिए उन्होंने भी खूब मेहनत की."

इस गीत की सफलता का आलम ये था कि फ़िल्म में माधुरी की पहनी साड़ी भी चैरिटी के लिए 80 हज़ार में नीलाम हुई.

बहुत कम लोग ये जानते हैं कि इस फ़िल्म में पहले श्रीदेवी थीं. अगर श्रीदेवी ने ये फ़िल्म की होती तो आज धक-धक गर्ल का टैग माधुरी का नहीं श्रीदेवी का होता.

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