नैय्यर का वो मोहक अंदाज़
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नैय्यर का वो मनमोहक अंदाज़

पचास और साठ के दशक में इन बेहतरीन संगीतमय फ़िल्मों के बहाने ओ. पी. नैय्यर ने एक नए सांगीतिक युग का सूत्रपात कर दिया था.

एक हद तक यह कहा जा सकता है कि ओ. पी. नैय्यर के आगमन से ही भारतीय फ़िल्म संगीत में उस पंजाबी फ़ोक का एक बिल्कुल नया दौर शुरू हुआ जिसकी शुरुआत उनके पहले मास्टर ग़ुलाम हैदर ने कर दी थी.

यह देखना भी दिलचस्प होगा कि जिस पंजाबी बीट व फ़ोक लोर को नैय्यर ने अपने संगीत का प्रमुख घटक बनाया, उसी को पहली बार ग़ुलाम हैदर, दलसुख पंचोली की फ़िल्म 'खजांची' में लेकर आए थे.

स्वयं नैय्यर को पहला महत्वपूर्ण ब्रेक भी पंचोली के ही बैनर की फ़िल्म 'आसमान' के लिए मिला था.

सिनेमा के सुनहरे आंचल में छिपे हुए हैं हज़ारों गीतों और उनका अद्भुत संगीत.

बीबीसी की ख़ास सिरीज़, 'संग-संग गुन-गुनाओगे'कला समीक्षक यतींद्र मिश्र की प्रस्तुति.

श्रृंखला की आठवीं कड़ी है संगीतकार ओपी नैय्यर पर. सिरीज़ के प्रस्तुतकर्ता हैं मोहन लाल शर्मा.

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