स्वर कोकिला लता मंगेशकर को आज भी है गुरु की तलाश

  • 21 मई 2017
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सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने फ़िल्म इंडस्ट्री में 75 साल पूरे कर लिए हैं. सिर्फ़ 13 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत करने वाली लता मंगेशकर ने 1942 में मराठी फ़िल्मों में एक्टिंग की थी. 'किती हासिल' नाम की मराठी फ़िल्म में उन्होंने मराठी गीत भी गाया था हालांकि गीत को फ़िल्म में शामिल नहीं किया गया, लेकिन गायकी का उनका सफ़र वहीं से शुरू हुआ.

इन 75 सालों में अपनी आवाज़ से लोगों के दिल पर राज करने वाली लता मंगेशकर ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, "मैं बहुत खुश हूँ कि मेरे 75 साल पूरे हुए. भगवान की कृपा से मैं यहाँ तक पहुँची. बहुत अच्छा लगता है कि इतने लोगों का प्यार मुझे मिला है इन सालों में."

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पुणे स्थित विश्वशांति कला अकादमी में लता मंगेशकर के हाथों गुरुकुल परंपरा वाली शिक्षा की शुरुआत की गई है. इस अकादमी में नौ से लेकर 35 साल की उम्र के लोग प्रवेश ले सकते हैं.

जब लता मंगेशकर बन गई थीं कोरस सिंगर

भारत रत्न लता मंगेशकर इस अकादमी के साथ बतौर चैयरमैन जुड़ी हैं. गुरु-शिष्य परंपरा से संगीत की शिक्षा को आज के समय के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए लता मंगेशकर ने बतौर शिष्य अपने बचपन को भी याद किया.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं बतौर शिष्या बहुत अच्छी थी. मेरे पहले गुरु मेरे पिता थे. शुरुआत में कभी-कभी उनसे डाँट पड़ी, लेकिन उनके बाद जो भी मेरे गुरु रहे उस्ताद अमानत अली ख़ान और फिर अमानत ख़ान जी उन दोनों से मुझे कभी डाँट नहीं पड़ी. इस मामले में मैं बहुत लक्की रही हूँ."

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Image caption स्टूडियो में गाना रिकॉर्ड करती लता मंगेशकर (Pic courtesy - Lata Mangeshkar...in her own voice conversation with Nasreen M Kabir @ Niyogi books)

फ़िल्मों में हज़ारों गीत गा चुकी लता ख़ुद को फ़िल्मी सिंगर बताती हैं. इन 75 सालों में उन्हें अगर किसी बात का दुख है तो सिर्फ़ यह कि उन्हें शास्त्रीय संगीत छोड़ना पड़ा.

लता कहती हैं, " मैंने फ़िल्मों में गाना शुरू किया और मैं फ़िल्मी सिंगर बन गई. शास्त्रीय संगीत से मेरा साथ छूट-सा गया, इस बात का मुझे हमेशा दुख रहेगा."

अपनी ज़िन्दगी में कई तरह के उतार-चढ़ाव का सामना करने वाली लता ने कई बार असफलताओं का स्वाद भी चखा.

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Image caption लता मंगेशकर पर लिखी किताब "लता मंगेशकर इन हर ओन वॉयस" (Pic courtesy - Lata Mangeshkar...in her own voice conversation with Nasreen M Kabir @ Niyogi books)

उन पर लिखी किताब "लता मंगेश्कर इन हर ओन वॉयस" में ख़ुद लता मंगेशकर ने एक किस्से का ज़िक्र किया है कि किस तरह दिलीप कुमार ने लता के मराठी होने की वजह से उनकी उर्दू अच्छी न होने पर टिप्पणी की थी. जिसके बाद लता ने अपनी उर्दू भाषा को ठीक करने के लिए एक टीचर भी रखा.

ऐसे ही कई उतार-चढ़ाव के बावजूद सफलता हासिल करने के बारे में पूछे जाने पर वो बताती हैं, "ये हर किसी की ज़िंदगी में होता हैं कि सफलता से पहले असफलता मिलती है. मैं विवेकानंद और संत ज्ञानेश्वर की भक्त हूँ. मैं तो बस लोगों से इतना कहना चाहूंगी कि कभी हार मत मानो. एक दिन आप जो चाहते है वो ज़रूर मिलेगा."

लगभग 36 भारतीय भाषाओं में गीत गाने वाली लता मंगेशकर ने विदेशों में भी कई शो किए हैं. संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें कई अवार्ड से भी नवाज़ा गया.

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Image caption अपनी जवानी के दिनों में लता मंगेशकर (Pic courtesy - Lata Mangeshkar...in her own voice conversation with Nasreen M Kabir @ Niyogi books)

87 साल की हो चुकी लता मंगेशकर आज के दौर से खुश नहीं.

वो बताती हैं, "हमारी भारतीय संस्कृति यही सिखाती है कि हमें भारतीय रहना हैं. बाकी चीज़ों के पीछे न पड़ें. आजकल जो कुछ चल रहा है वो बहुत ग़लत हो रहा है."

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Image caption लता मंगेशकर की एक पुरानी तस्वीर. (Pic courtesy - Lata Mangeshkar...in her own voice conversation with Nasreen M Kabir @ Niyogi books)

60 से 80 के दशक को भारतीय संगीत का सुनहरा दशक मानने वाली लताजी हालांकि संगीत में हुए परिवर्तन से नाराज़ ज़रूर हैं, लेकिन उनका ये भी मानना है कि एक बार वो दौर फिर लौट कर ज़रूर आएगा.

लताजी बताती हैं, "परिवर्तन संसार का नियम है. जो लोगों को पसंद है वो पसंद है. पहले के गीत, उसके संगीत और बोल बहुत अच्छे होते थे, इसलिए वो आज भी लोगों को याद हैं. लेकिन दुनिया गोल है एक ना एक दिन लौट कर हम वापस आ ही जाएंगे."

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विश्वशांति गुरुकुल से पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित हृदयनाथ मंगेशकर, श्यामाताई भाटे और देवकी पंडित जैसे गुरु जुड़े हैं.

पुणे में स्थित इस गुरुकुल की ख़ास बात ये है कि यहाँ एक गुरु के पास 10 ही शिष्य होंगे. साथ ही ज़रूरतमंदो को यहाँ संगीत की शिक्षा मुफ़्त में दी जाएगी.

इस अनोखे गुरुकुल से जुड़ी लता मंगेशकर से ये पूछे जाने पर कि क्या वो भी संगीत की शिक्षा देंगी.

उनका जवाब था, "मुझे लगता है कि मैं किसी को क्या शिक्षा दूंगी. मुझे ख़ुद ही एक गुरु की ज़रूरत हैं."

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