श्रेया घोषाल 'चिकनी चमेली' जैसे गाने क्यों नहीं गाएंगी?

इमेज कॉपीरइट Agnipath PR

ऋतिक रोशन की फ़िल्म 'अग्निपथ' का हिट गाना 'चिकनी चमेली' जिसमें कटरीना कैफ़ अपने जलवे बिखेरती नज़र आई थी, उस गाने को श्रेया घोषाल ने गाया था पर उस गाने के बाद उन्होंने तय किया कि वो ऐसे गानों से दूर रहेंगी.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में श्रेया घोषाल ने कहा कि 'चिकनी चमेली' उनके लिए एक संगीतात्मक प्रयोग था जो फूहड़पन की सीमारेखा पर था. उन्हें गाने के दो अंतरे के बोलों से ऐतराज़ था और फ़िल्म के निर्माता करण जौहर भी उनसे सहमत हुए और उसे हटाया गया.

'चिकनी चमेली' था चुनौती - कटरीना कैफ

'अग्निपथ' रीमेक, लेकिन अलग !

श्रेया कहती है कि, "एक हद और मर्यादा होनी चाहिए. चिकनी के बाद मुझे कई ऐसे गाने आए जिसके बोल सुनते ही मुझे लगा कि मैं ये नहीं गा पाऊँगी और मैंने कई गानों को ना कह दिया."

इमेज कॉपीरइट Kasso Media

वो आगे कहती है कि, "हमारा देश अभी भी प्रगति कर रहा है और महिलाओं से जुड़ी कई समस्याएं है. प्राथमिक आदर और अधिकार बिलकुल ना के बराबर है. मेरे गाने 16 उम्र से छोटे बच्चे भी सुनते है, अगर ऐसे गाने को मैंने आवाज़ दे दी तो वो भी ये गीत गाएंगे. उन्हें ठीक लगेगा महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करना. कहीं ना कहीं ये बच्चों के ज़हन में रह जायेगा. मैं बतौर आर्टिस्ट एक ज़िम्मेदारी महसूस करती हूँ इसलिए ऐसे गानों से दूर रहती हूँ."

मज़ाकिया था वो गाना

श्रेया घोषाल ने अपने करियर में सिर्फ़ ऐसे दो गाने ही गाए हैं. 'चिकनी चमेली' और डर्टी पिक्चर फ़िल्म का "ऊ ला ला". पर इन गानों को वो मज़ाकिया मानती हैं.

जहाँ रियलिटी शो पर बच्चों को लेकर फ़िल्म इंडस्ट्री बंटी हुई है, वहीं संगीत से जुड़े रियलिटी शो का हिस्सा रह चुकी श्रेया रियलिटी शो का बचाव करते हुए कहती हैं, "रियलिटी शो बहुत बेहतर मंच हैं. यहां लोग अपना हुनर दिखा सकते हैं और टीवी के ज़रिए करोड़ों लोगों तक पहुंच सकते हैं."

इमेज कॉपीरइट Kasso Media

भारत में अब म्यूज़िक इंडस्ट्री फ़िल्म इंडस्ट्री पर निर्भर है जिसे श्रेया अफ़सोसजनक मानती हैं. उनका कहना है कि अगर सारी कोशिश और मेहनत एक ही इंडस्ट्री पर लगा देंगे तो दूसरी इंडस्ट्री का विकास कैसे होगा?

श्रेया घोषाल 'धड़कनें आज़ाद हैं' से बतौर निर्माता कदम रख रही हैं.

उनका मानना है कि लोग संगीतकार और गायक को देखना चाहते हैं पर उन्हें वो मौका नहीं मिल पता. उन्हें यकीन है कि उनके इस पहल से दूसरे लोग भी प्रेरित होंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे