नहीं रहे बॉलीवुड के रोमांटिक हीरो शशि कपूर

शशि कपूर
Image caption बीबीसी स्टूडियो में शशि कपूर

जाने-माने फ़िल्म अभिनेता, निर्माता और निर्देशक शशि कपूर नहीं रहे. वे 79 बरस के थे. बीते कुछ समय से वे किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे. मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में सोमवार शाम पांच बजकर 20 मिनट पर उनका निधन हुआ.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
बीबीसी के ख़ज़ाने से फ़िल्म अभिनेता शशि कपूर का आर्काइव इंटरव्यू.

सत्तर और अस्सी के दशक में उन्हें बड़े पर्दे पर रोमांस के स्क्रीन आयकन के तौर पर देखा जाता था.

उन्होंने कई हिंदी और अंग्रेज़ी फिल्मों में काम किया था. हालांकि शशि कपूर फ़िल्म उद्योग में लंबे समय सक्रिय नहीं थे. लेकिन जब जब फूल खिले (1965), वक्त (1964), अभिनेत्री (1970), दीवार (1975), त्रिशूल (1978), हसीना मान जाएगी (1968) जैसी फ़िल्में आज भी पसंद के साथ देखी जाती हैं.

तस्वीरों में शशि कपूर को फाल्के अवॉर्ड

'छड़ी के बल पर काम कराते थे शशि कपूर'

इमेज कॉपीरइट PUNIT PARANJPE/AFP/Getty Images

कपूर खानदान

शशि कपूर के भतीजे रणधीर कपूर ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "उन्हें कुछ सालों से किडनी की समस्या थी. बीते कुछ सालों से वे डायलसिस पर थे. मंगलवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा."

बतौर निर्माता भी शशि कपूर ने बॉलीवुड की कुछ बेहतरीन फ़िल्मों का निर्माण किया था. इनमें जुनून (1978), कलियुग (1980), 36 चौरंगी लेन (1981), विजेता (1982), उत्सव (1984) जैसी फिल्मों का नाम लिया जाता है.

थिएटर और फिल्म जगत के बड़े नाम पृथ्वीराज कपूर के यहां शशि कपूर का जन्म 18 मार्च, 1938 को हुआ था. पिता के मार्गदर्शन में शशि चार साल की उम्र में रंगमंच पर आ गए थे. चालीस के दशक के आख़िर में शशि कपूर ने बतौर बाल कलाकार काम करना शुरू कर दिया था.

शशि कपूर को दादा साहब फाल्के पुरस्कार

शशि कपूर को 'टैक्सी' क्यों कहते थे राज कपूर

इमेज कॉपीरइट Junoon Film Poster

फिल्म करियर

इनमें राज कपूर अभिनीत आग (1948) और आवारा (1951) उल्लेखनीय नाम हैं. इन फिल्मों में शशि कपूर ने राज कपूर के बचपन का रोल निभाया था. पचास के दशक में शशि कपूर ने बतौर सहायक अभिनेता काम करना शुरू कर दिया.

बतौर मुख्य अभिनेता शशि कपूर ने 1961 में धर्मपुत्र से बड़े पर्दे पर कदम रखा. उन्होंने अपने करियर में 116 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया. उन्हें 2011 में पद्म भूषण से और 2015 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे