'काम के प्रति उत्साह कम नहीं होना चाहिए'

अक्षय खन्ना की गिनती आज की पीढ़ी के बेहतरीन अभिनेताओं में होती है. अपनी पहली फ़िल्म 'हिमालयपुत्र' से लेकर 'गांधी

अक्षय खन्ना

अक्षय खन्ना गांधी माई फ़ादर में गांधी जी के पुत्र हरीलाल का रोल कर रहे हैं

माई फ़ादर' तक का उनका सफ़र उतार-चढ़ाव भरा रहा है.

ताल, दिल चाहता है, बॉर्डर और हमराज़ जैसी हिट फ़िल्में रहीं तो कुदरत, दहक और 'शादी से पहले' जैसी कई फ़िल्में भी रहीं जो कब आई और कब गई पता भी नहीं चला.

अक्षय खन्ना ने अपने करियर, पिता विनोद खन्ना के साथ काम करने और कई अन्य पहलुओं पर बीबीसी संवाददाता वंदना से विशेष बातचीत की, पेश हैं मु्ख्य अंश:

'गांधी माई फ़ादर' में आपने हरिलाल गांधी का किरदार निभाया है. बहुत काम जानकारी है लोगों को उनके बारे में. तो किरदान निभाने के लिए आपने कुछ ख़ास अध्ययन किया, किन्हीं लोगों से मिले?

हाँ कस्तूरबा गांधी के बारे में लोग जानते हैं, गांधीजी को तो पूरी दुनिया जानती है लेकिन उनके बेटों का क्या हुआ ये हम जानते ही नहीं है. हरिलाल गांधी के बारे में बहुत कम सामग्री है. तो अध्ययन के लिए मुझे बहुत कम सामग्री मिली. हरिलाल के बारे में सबसे ज़्यादा सीखने को उनके पत्रों से मिला जो उन्होंने गांधीजी और कस्तूरबा जी को लिखे थे. उससे एक झलक मिली कि हरिलाल गांधी कैसे थे.

बहुत कम उम्र में हरिलाल गांधीजी के राइट हैंड मैन बन गए थे. दक्षिण अफ़्रीका में कई बार वो जेल गए. हरिलाल गांधी वो आदमी थे जिन्होंने बापू को सिखाया कि अनशन को इस्तेमाल किया जा सकता है एक हथियार बनाकर अन्याय के ख़िलाफ़. ये उन्होंने पहली बार किया जब वो जेल में थे. तो बहुत महान इंसान थे हरिलाल लेकिन तक़दीर का मारा था. फ़िल्म में एक संवाद है जहाँ कस्तूरबा जी बापू से कहती हैं, हरिलाल ख़राब नहीं है, वो तक़दीर का मारा है.

हरिलाल गांधी वो आदमी थे जिन्होंने बापू को सिखाया कि अनशन को इस्तेमाल किया जा सकता है एक हथियार बनाकर अन्याय के ख़िलाफ़. ये उन्होंने पहली बार किया जब वो जेल में थे. तो बहुत महान इनसान थे हरिलाल लेकिन तक़दीर का मारा था. फ़िल्म में एक संवाद है जहाँ कस्तूरबा जी बापू से कहती हैं, हरिलाल ख़राब नहीं है, वो तक़दीर का मारा है

अक्षय खन्ना

ये पिता-पुत्र संबंध की कहानी है. क्या आपके पिताजी विनोद खन्ना ने फ़िल्म देखी है?

हाँ उन्होंने देखी है. फ़िल्म देखने के बाद वो बहुत भावुक हो गए थे. कुछ समय के लिए वे बात ही नहीं कर पाए. उन्होंने मुझे गले से लगाया और अनिल कपूर को भी पकड़ लिया, छोड़ा ही नहीं पाँच-दस मिनट के लिए.

अनिल कपूर के साथ आपकी केमिस्ट्री काफ़ी अच्छी रही है. ताल और सलाम-ए-इश्क में भी आपने साथ काम किया. कैसा अनुभव रहा है उनके साथ.

अनिल कपूर मेरे सीनियर हैं लेकिन बहुत अच्छे दोस्त भी हैं. बड़े भाई जैसे हैं. ज़िंदगी और काम के प्रति उनकी जो निष्ठा है, उसकी मैं बहुत इज़्ज़त करता हूँ. बहुत प्यार करता हूँ मैं उनसे.

हमने सुना है आपके साथ एक प्रैंक किया गया, आपको बताया गया कि था आपको हरिलाल का नहीं बल्कि गांधीजी का रोल करना है.

हाँ. बहुत घबरा गया था मैं. दो-तीन दिन बाद फिर मुझे बताया कि गांधीजी का नहीं हरिलाल का रोल करना है.

आपको लोग इस पीढ़ी के बेहतरीन अभिनेताओं में से गिनते हैं- दिल चाहता है, हमराज़ कई अच्छी फ़िल्में की हैं आपने. लेकिन फिर एक के बाद ऐसी फ़िल्में भी आईं जो ज़्यादा नहीं चल पाईं. तो एक तरह से अनप्रडिक्टेबल सा रहा है आपका करियर ग्राफ़. आपको लगता है कि कहीं न कहीं चूक हुई आपसे?

ग़लती तो होती रहेगी और वो हर अभिनेता की ज़िंदगी में होती रहेगी. ये फ़िल्म बनाने का बिज़नेस ही बहुत अनप्रडिक्टेबल है. मेरे जितने फ़ैसले हैं काम के प्रति- उस समय मुझे जो सही लगता है मैं वो करता हूँ- कभी-कभी सही जाता हूँ कभी ग़लत.

लेकिन जहाँ तक मेरा काम है, तो मुझे उत्साह महसूस होना चाहिए अपने काम को लेकर, निष्ठा रहनी चाहिए काम के प्रति- वो कभी नहीं हटना चाहिए. कभी-कभी वो काम ग़लत जाएगा, कभी सही जाएगा. ये तो हिस्सा है हमारे काम का.

आप दूसरों अभिनेताओं के मुकाबले कम फ़िल्में करते हैं. ऐसा क्यों?

दरअसल ऐसा नहीं है. बस एक धारणा बन गई है.मैं इसी साल की मिसाल दे सकता हूँ. मेरी चार फ़िल्में हैं- दो आ चुकी हैं(नक़ाब और सलाम-ए-इश्क), तीसरी गांधी माई फ़ादर है और चौथी साल के अंत तक आएगी रेस.

अक्षय  खन्ना

अक्षय ने कई थ्रिलर फ़िल्मों में काम किया है

फ़िल्म नक़ाब की बात की आपने. आपको थ्रिलर से कुछ ख़ास लगाव है- हमराज़, 36 चाइना टाउन, नक़ाब.. कई थ्रिलर फ़िल्मों में काम किया है आपने.

नहीं मुझे निर्देशक अब्बास-मस्तान से लगाव हैं. अगर उनकी कहानी में मेरे लिए जगह है तो वो मेरे पास आते हैं और मैं उनको ना नहीं बोल सकता हूँ.

वो मेरे बहुत ही पसंदीदा हैं. वे बेहद करीबी हैं मेरे. वो ज़्यादातर थ्रिलर बनाते हैं, इसलिए शायद आपको लगता है कि मुझे थ्रिलर से लगाव है, असल में मुझे अब्बास मस्तान से लगाव है.

हमने हाल ही में फ़िल्मों में पिता-पुत्र की कई जोड़ियाँ देखीं- अमिताभ बच्चन-अभिषेक बच्चन, फिर देयोल परिवार एक साथ आया.. क्या लोग आपको, आपके पिता विनोद खन्ना या भाई राहुल खन्ना को एक साथ देख सकेंगे?.

कुछ दिन पहले मुझे किसी ने ये बात पूछी थी. मैने उससे पूछा कि सनी देयोल कितने सालों से फ़िल्मों में हैं. तो उन्होंने कहा कि कुछ 26-27 साल से. तो मैने कहा कि सनी देयोल को 27 साल लगे सही स्क्रिप्ट ढूँढने में, मुझे तो दस साल ही हुए हैं. थोड़ा सा और वक़्त दें मुझे. सही स्क्रिप्ट ढूँढनी है मुझे.

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