जब पहली बार शाहरुख़ से मिलीं जूही..

यूँ तो किसी का स्वागत करने के कई तरीके होते हैं लेकिन कोई आपका स्वागत प्यारी सी मुस्कुराहट से करे तो बात ही दूसरी होती है और ये

Image caption अभिनेत्री जूही चावला इन दिनों गायिका के रूप में नए प्रशंसक बटोर रही हैं

मुस्कुराहट अगर जूही चावला जैसी अभिनेत्री की हो तो कहना ही क्या.

अपनी चुलबुली, हमेशा मुस्कुराती रहने वाली फ़िल्मी छवि के बिल्कुल करीब हैं जूही.

हाल ही में जूही चावला लंदन में बीबीसी स्टूडियो आईं और विशेष बातचीत की. बातचीत के दौरान एक बार भी मुस्कान उनके चेहरे से ग़ायब नहीं हुई.

नई फ़िल्म भूतनाथ, 'राजू बन गया जेन्टलमैन' के सेट पर शाहरुख़ से पहली मुलाकात, आमिर खान से दोस्ती और आईपीएल..हर सवाल के जवाब बेबाकी से दिया जूही चावला ने और अपना गाना भी सुनाया.

पेश है बीबीसी संवाददाता वंदना से बातचीत के मुख्य अंश:

लोग कहते हैं कि जूही से कभी भी मिलिए, कहीं भी मिलिए सुबह शाम दिन रात -आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट बनी रहती है. कैसे बनाए रखती हैं इस मुस्कुराहट को. कभी गु़स्सा नहीं आता आपको.

पहले तो शुक्रिया मुझे बीबीसी पर बुलाने के लिए. जब मैं लोगों के साथ होती हूँ तो ज़रूर बहुत हँसमुख लगती हूँ लेकिन आप प्लीज़ ये सवाल मेरे पति जय से करिए. वो आपको असल तस्वीर बता देंगे कि जब मैं घर पर होती हूँ या उनके साथ होती हूँ तो कैसे बात करती हूँ. जय से पूछेंगी तो काफ़ी अलग ही तस्वीर मिलेगी आपको.

आप, आपके पति जय और शाहरुख़ मिलकर आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स का काम देख रहे हैं. कैसे मैनेज कर रहे हैं आप लोग.

मैं तो मैनेज बहुत कम कर रही हूँ. ज़्यादातर मैनेजमेंट तो शाहरुख़ की रही है, एडमिनीस्ट्रेशन में थोड़ी बहुत मदद मेरे पति जय करते हैं. प्रायोजकों को जुटाना, मार्केटिंग, लोगो का डिज़ाइन, प्रोमो बनाना- शाहरुख़ ने दिन रात इसमें मेहनत की है. आईपीएल शुरू होने से पहले किसी को भी ये नहीं पता था कि लोगों की प्रतिक्रिया क्या होगी.

आईपीएल सबके लिए एक नया तजुर्बा है- खेल के लिए, लोगों के लिए और निवेशकों के लिए. अब तक तो सब अच्छा ही है.

शाहरुख़ से आपकी दोस्ती पुरानी है. 1992 में आपने राजू बन गया जेन्टलमैन में उनके साथ पहली बार काम किया था. उनका शुरुआती दौर था जबकि आप स्टार बन चुकी थीं. दोस्ती के इस सफ़र को कैसे देखती हैं. किस तरह बदले हैं वो इस दौरान.

बहुत पुराना सफ़र याद दिला दिया आपने. तब शाहरुख़ नए-नए थे, मैने भी चार-पाँच फ़िल्में ही की थीं. मैं तो अपने आपको कोई स्टार नहीं समझती थी, शाहरुख़ शायद समझते हों.

ये मेरा पसंदीदा किस्सा है- जब राजू बन गया जेन्टलमैन शुरू हुई तो निर्माता ने बताया कि फ़िल्म में नया लड़का है शाहरुख़- बिल्कुल आमिर ख़ान जैसे हैं. मैने उनका सीरियल फौजी नहीं देखा था. सोचा आमिर खान जैसे हैं तो अच्छे ही होंगे-गुड लुकिंग.

जब पहली बार सेट पर गई तो देखा कि दुबले-पतले से, आईब्रोज़ तक काले-काले बाल वाले हीरो हैं. मन में सोचा ये कौन है. लेकिन जब फ़िल्म शुरू हो गई तो पता चला कि वे कितने अच्छे कलाकार हैं. लगा ही नहीं कि किसी नए अभिनेता के साथ काम कर रही हूँ.

रिहर्सल करते थे, बहुत ऊर्जावान थे जैसे आज भी हैं, तब तो इससे भी दोगुनी थी. कई वर्षों तक तो वे यूनिट का ही खाना खाते थे, उनके साथ. बाद में भी वे कभी स्टार की तरह पेश नहीं आते थे भले ही उनकी फ़िल्में सुपर-डुपर हिट हो गई थीं. शायद यही उनकी महानता है.

भूतनाथ आपकी नई फ़िल्म है. फ़िल्म में एक तरफ़ अमिताभ बच्चन है जो इंडस्ट्री के वरिष्ठ कलाकारों में से एक हैं और दूसरी तरफ़ नन्हे से अमन सिद्दकी जो आपके बेटे बने हैं- काफ़ी कॉन्ट्रास्ट है. दोनों के साथ करने में मज़ा आया?

जब निर्देशक विवेक शर्मा ने मुझे बताया कि फ़िल्म में भूत का रोल अमित जी करने वाले हैं तो मैं तो उछल ही पड़ी. ये तो सोने पर सुहागा था.फ़िल्म देखकर आपको लगेगा कि उनसे बेहतर भूत का रोल कोई कर ही नहीं सकता था.

पहली बार मैने फ़िल्म 'एक रिश्ता' में अमिताभ बच्चन जी के साथ काम किया था. तब मैं बहुत डरी हुई थी. उनके साथ खड़े होकर कुछ बोलना था- मतलब अंदर से प्रार्थना करना शुरू कर देती थी कि शॉट के अंदर कहीं कोई ग़लती न हो वरना अमित जी सोचेंगे कि इसे इतना भी नहीं आता.

भूतनाथ में उनके साथ बहुत मज़ा आया. बहुत अदब से पेश आते हैं वो.

दूसरी तरफ़ ये आठ साल का बच्चा है अमन. सेट पर क्रिकेट खेलता रहता था, कुछ भी करता रहता था, फ़िल्म की लाइन वो घर से याद करके आता था. मैं उससे पूछती थी कि भइया सुबह तुम स्कूल चले जाते हो, दोपहर को सेट पर आते, काम करते हो, फिर दस बजे वापस जाते हो..तो थकते नहीं. स्कूल का काम कैसे करते हो? तो बोलता है कि क्लास में फ़र्स्ट आता हूँ. मैं तो चक्कर में पड़ गई.

सेट्स पर आम तौर पर उसे पता रहता था कि क्या करना है. आता था, शॉट देता था और निकल जाता था.

मुझे भी थोड़ा वक़्त लगता है काम समझने में लेकिन ये बच्चा सब कर लेता था, तो काफ़ी रोचक रहा उसके साथ काम करना.

भूतनाथ की शूटिंग कई महीनों तक चली. इस दौरान कहीं आप भी भूत-वूत से डरने तो नहीं लगी?

जब रोशनी हो और आस-पास लोग हों तो ये सब बातें झूठ ही लगती हैं लेकिन आप अकेले हों, सन्नाटा हो और लाइट गुल हो जाए तो छोटी सी आवाज़ भी आपको डरा देती है. अगर रात को मैं घर पर अकेली हूँ, तो मुझे कभी-कभी डर लगता है..मैं तो लाइट-वाइट ऑन करके ही सोती हूँ.

अपनी एक्टिंग से तो आपने बेशुमार फ़ैन्स बनाए हैं, अब लगता है आप अपनी आवाज़ से नए फ़ैन्स बनाने जा रही हैं. भूतनाथ में आपने गाना भी गाया है. वो अनुभव कैसा रहा..स्टूडियो में माइक्रोफ़ोन के पीछे.

मैं गाना सीख रही हूँ. लेकिन क्लास में और बात होती है- बस गुरुजी होते हैं या एक दो जन और होते हैं. वहाँ लगता है कि मुझे आता न, क्या है इसमें. जब सीखना शुरू किया था तो मुझे लगा था कि बस छह महीने में सिंगर बन जाऊँगी. अरे साढ़े चार साल हो गए हैं.. सुर क्या होता है, कहाँ ग़लत गा रही हूँ ये अब जाकर समझ में आने लगा है.

एक दिन निर्देशक विवेक शर्मा ने कहा कि तुम बड़ा गाना-वाना गाती हो चलो ज़रा फ़िल्म में ख़ुद के लिए गाओ. मैं भी काफ़ी उत्साहित हो गई. मैं गई स्टूडियो में लेकिन वहाँ का माहौल अलग ही होता है.

जैसे आपका स्टूडियो है- स्टूडियो निर्देशक आप लोगों को निर्देश देते रहते हैं. वैसे ही रिकॉर्डिंग के वक़्त भी म्यूज़िक डाइरेक्टर कान में कुछ-कुछ बोल रहे थे.

आप अकेले ठंडे स्टूडियो में खड़े होकर गाना गाने की कोशिश कर रहे होते हैं. मुझे वो समय याद आया जब पहले-पहले एक्टिंग करने आई थी. घर में आइने के सामने तो ख़ूब एक्टिंग कर सकते हैं लेकिन जब कैमरे के सामने खड़े होते हैं तो दिमाग़ से सब उड़ जाता है. पहली बार गाने का अनुभव भी वैसा ही था.

भूतनाथ के निर्देशक विवेक ने बातचीत में बताया कि अमिताभ जी ने काफ़ी ज़ोर डाला था कि आपसे गाना गवाया जाए. आपने फ़िल्म में उनके साथ गाना गाया है.

गाना गाने के बाद मेरे मन में यही बात आई थी कि मैं और अच्छा कर सकती थी-पहली बार कोई काम करो तो ऐसा ही लगता है.

लेकिन हाँ ये ज़रूर है कि कई सारी अभिनेत्रियों कह सकती हैं कि उन्होंने अमित जी के साथ एक्टिंग की है लेकिन शायद ये नहीं कह सकती कि अमिताभ जी ने गाना गाया और मैने साथ में गाया.

वैसे ये गाना हमने अलग-अलग रिकॉर्ड करवाया था. उनकी रिकॉर्डिंग पहले हो गई थी.

आपने पहले आमिर खान का ज़िक्र किया था. 'क़यामत से क़यामत तक' आप दोनों की सुपरहिट फ़िल्म थी. उसके बाद भी कई हिट फ़िल्में आईं. आपकी जोड़ी को बहुत पसंद किया गया. लेकिन अचानक आपकी एक साथ फ़िल्में आना बंद हो गईं.

आख़िरी बार हम लोगों ने 'इश्क' में काम किया था. उसी दौरान दोनों के बीच छोटी सी अनबन हो गई. दोनों ने झगड़ा कर लिया-मैने ही कर लिया और वो भी रूठ गए. किसी भी ने आगे हाथ नहीं बढ़ाया.

उसके बाद से आमिर ने शायद दो साल में एक फ़िल्म ही की होगी और मैं उन भूमिकाओं में फिट नहीं होती थी.

ख़ैर अब दोनों के बीच सुलह-सफ़ाई हो गई है, हम फ़ोन पर बात भी करते हैं. मैने कई बार सुना है कि जब आमिर से कोई पूछता है कि बेहतरीन अभिनेत्रियां कौन सी हैं तो वे मेरा नाम ज़रूर लेते हैं. मुझे बहुत अच्छा लगता है. मुझे यकीन है कि अगर मौक़ा आएगा तो हम साथ में कोई फ़िल्म ज़रूर करेंगे.

1988 में आई थी क़यामत से क़मायत तक. मतलब करीब 20 साल से आप बनीं हुई है फ़िल्म इंडस्ट्री में. जब शुरुआत की थी तो कभी सोचा था कि 20 साल बाद भी आप काम करती रहेंगी, लोग आपको पहचानेंगे.

बिल्कुल नहीं. 20 दिन का ठिकाना नहीं था. अब 20 साल गुज़र गए हैं- सब कुछ एक सपना सा लगता है. उतार चढ़ाव, हिट-फ़्लॉप, रोना धोना सब कुछ हुआ इस बीस साल में. कभी-कभी लगता था कि पता नहीं यहाँ रहूँगी या नहीं. एक साल बाद क्या होने वाला है नहीं पता था.

कहीं न कहीं ये भी लगता था कि लड़की हूँ- शादी भी करनी है, सेटल करना है पर काम न निकले हाथ से. असुरक्षा की भावना भी होती थी. बाहर से लोगों को सब कुछ अच्छा ही लगता है लेकिन इतना आसान भी नहीं होता.

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