मुश्किलों से नही डरती: कंगना रानावत

कंगना रानावत
Image caption कंगना की फ़िल्म 'काइट्स' की काफ़ी चर्चा हो रही है

इसी हफ़्ते मधुर भंडारकर की फ़िल्म फ़ैशन के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार कंगना रानावत ने जीता है.

उनके करियर के केवल तीन साल में ही उनके पास एक तमिल फ़िल्म समेत नौ फ़िल्में हैं.

फ़िल्मी पंडितों का मानना है कि रंगमच से आई और अपने संवादों को फुसफुसाहट के साथ बोलने वाली कंगना की अभिनय प्रतिभा को अब केवल पुरस्कारों की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए.

अपनी हालिया फ़िल्मों से उन्होंने साबित कर दिया कि महेश भट्ट ने उन्हें अपनी फिल्म गैंगस्टर में मोनिका बेदी सरीखे चरित्र के लिए चुनकर कोई ग़लती नहीं की थी.

उनस रामकिशोर पारचा की हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

फ़ैशन में आपका मुकाबला प्रियंका चोपड़ा से था यानी, अब आप नंबर एक मानी जाने वाली अभिनेत्रियों को टक्कर देने वाली बन गई हैं?

नहीं. मैं तो मुंबई से चार साल पहले घर वापस चली गई थी. मुझे लगता था कि यह जगह मेरे लिए नही है. मैं रंगमच के साथ फ़िल्में करना चाहती थी. फिर मैंने आशा चंद्रा के यहाँ दाखिला ले लिया और दो साल तक संघर्ष करती रही. गैंगस्टर तो उसके दो साल बाद मिली. तब नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी लोगों को लगने लगेगा कि मैं सचमुच कुछ अलग करना चाहती हूँ. मैं यहाँ किसी को टक्कर देने नहीं सिर्फ अपना काम करने आई हूँ.

राज़-टू के बाद अब आपकी चर्चा ऋतिक रोशन के साथ आने वाली फ़िल्म काइट्स के लिए हो रही है, आप अनुराग बासु की पसंदीदा अभिनेत्री बन गई हैं?

पता नहीं. मुंबई में मेरी मुलाक़ात उनसे एक कॉफ़ी शॉप में हुई थी. लेकिन उसके बाद भी मुझे अपनी पहली फिल्म गैंगस्टर के लिए ऑडिशन और स्क्रीनिंग का कड़ा मुकाबला करना पड़ा था.

दो अभिनेत्रियों वाली फ़िल्म में फ़ुटेज और भूमिका को लेकर जद्दोजहद रहती है और इसमें आपके सामने मैक्सिकन अभिनेत्री बारबरा मोरी हैं?

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. हर कलाकार की भूमिका का अपना अर्थ और विस्तार होता है. उसमें प्रतिभा होगी तो वो साबित कर देगा. फ़ैशन में मेरे सामने प्रियंका और मुग्धा गोडसे जैसी अभिनेत्रियाँ थीं.

आपने अभी तक जो भूमिकाएँ की उनमें ज्यादातर एक जैसी और वास्तविक चरित्रों पर आधारित थी. गैंगस्टर, वो लम्हें और फ़ैशन में भी. एक कलाकार के लिए ये कैसी चुनौती होती है?

कई बार चरित्रों और कलाकार की शारीरिक भाषा और उसकी सूरत का आपस में संतुलन बन जाता है. हालांकि कहा गया कि मेरी गैंगस्टर, वो लम्हें और फ़ैशन की भूमिकाएं मोनिका बेदी, गीतांजलि नागपाल या परवीन बॉबी के जीवन से जुड़ी थी लेकिन यदि यह सच है तो मैंने एक अभिनेत्री कि पात्रों और चरित्रों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और उसकी वास्तविकता को साबित करने में सचमुच मेहनत की.

अब काइट्स में आपकी भूमिका क्या है?

लास वेगास में बन रही इस फ़िल्म में मेरी भूमिका एक ऐसी अमीर लड़की की है जो डांस टीचर बने ऋतिक से साल्सा सीखना चाहती है लेकिन उसके साथ प्रेम में पड़ जाती है. लेकिन इसके बात घटनाएँ बदलती हैं तो फ़िल्म का कैनवास भी बदल जाता है.

शेखर सुमन के बेटे अध्ययन को लेकर आपके बारे में काफ़ी बातें हो रही हैं और आपने उनके साथ ही राज़-टू की है?

इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिस पर बातें की जाएँ. लोगों ने कहा कि मैं उनके लिए निर्देशकों से बात कर रही हूँ. वे एक काबिल अभिनेता और बेहतर इंसान हैं. उनके माता-पिता को भी हमारे रिश्ते पर कोई आपति नहीं है. लोगों इसके बारे में बातें नहीं करनी चाहिए.

यानी अब आप ऐसी अफ़वाहों पर जवाब देने वाली परिपक्व अभिनेत्री हो गई हैं?

मैं बता नहीं सकती. मैं तो डर गई थी कि मुंबई में मेरे जैसी लड़की का क्या होगा. बिना गॉडफ़ादर यहाँ कुछ नहीं होता. पर अब मैं ज़िंदगी और काम में फर्क करना सीख गई हूँ?

और महेश भटट?

वे मेरे लिए सब कुछ हैं, मैं आज जो कुछ हूँ सिर्फ उन्हीं की वजह से हूँ.

अपने साथ होने वाले विवादों के बारे में क्या कहेंगी, आदित्य पंचोली के साथ आपकी चर्चा रही और पिछले साल आप पर तेज़ाब फेंकने की धमकी भी दी गई?

जब हम सफल होते हैं और लोकप्रियता को छूने लगते हैं तो जाहिर तौर पर हम किसी न किसी की जगह ले रहे होते हैं. ऐसे में कुछ लोगों को लगता होगा कि वे असुरक्षित हो रहे हैं. शायद इसीलिए मेरी बहन रंगोली के ऊपर तेज़ाब भी फेंका गया. पर मैं इन मुश्किलों से डरती नहीं हूँ.

लोकप्रियता और स्वीकृति का जो सफ़र आपने इतनी जल्दी तय किया है उसके बारे में क्या कहती हैं?

हिमाचल के मंडी ज़िले के छोटे से गाँव भाम्बला से पहले शिमला और फिर चंडीगढ़ होते होते हुए दिल्ली के बाद मुंबई में जमना आसान नहीं था. जब मैंने पेरिस की एक एंजेसी एलीट के साथ काम करना शुरू किया और रैंप मॉडलिंग शुरू की तो अभिनय का इरादा नहीं था. लेकिन सीख लिया.

थिएटर से क्या सीखा?

आत्मविश्वास. मशहूर निर्देशक अरविंद गौड़ की संस्था अस्मिता से मैंने अभिनय के प्रतीक और बिंब सीखे. उनके साथ मैंने अपना पहला नाटक गिरीश कर्नाड का रक्त कल्याण किया था. इसमें मैंने ललिताम्बा और दामोदर भट्ट दोनों की भूमिका एक साथ की थी और इससे मुझे अपने कैरियर के लिए जरूरी पहचान मिली.

अब आप थियेटर नहीं कर रही?

नहीं, लेकिन वह मेरी जड़ों में शामिल है.

आने वाली फ़िल्मों के बारे में बताइए?

हाल ही में दक्षिण के निर्देशक जीवा के साथ एक तमिल फिल्म धूमधाम की है और राकेश रोशन की काइट्स, समीर कार्निक की रोशन और हैप्पी न्यू इयर आएगी.

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