जीनिलिया हैं गोविंदा की प्रशंसक

जेनिलिया और फ़ारदीन

पिछले साल फ़िल्म 'जाने तू या जाने न' में अदिति बनकर जेनिलिया डिसूज़ा ने बहुत सारे लोगों को अपना मुरीद बनाया.

हालांकि शुरुआत उन्होंने 2003 में दो हिंदी फ़िल्मों से की थी- 'तुझे मेरी कसम' और 'मस्ती' लेकिन फिर जीनिलिया कुछ सालों के लिए दक्षिण की ओर चली गईं.

आज वहाँ उनका रुतबा किसी सुपरस्टार से कम नहीं है. वहीं जाने तू.. के बाद हिंदी फ़िल्मों में उन्होंने दोबारा अपनी जगह बनाई है.

कुछ दिन पहले ही जेनिलिया ने अपना जन्मदिन मनाया. उनकी नई फ़िल्म 'लाइफ़ पार्टनर' भी रिलीज़ होने वाली है. बीबीसी ने उनसे बात की.

जाने तू या जाने न रिलीज़ होने के करीब एक साल बाद आपकी कोई फ़िल्म रिलीज़ हो रही है- लाइफ़ पार्टनर. ज़ाहिर है कोई ख़ास वजह रही होगी इस फ़िल्म को साइन करने की.

हाँ इसकी स्क्रिप्ट. जब मैने इसकी कहानी सुनी थी तो हँस-हँस कर लोट-पोट हो गई थी. लोग जब फ़िल्म देखने जाते हैं तो मनोरंजन की उम्मीद करते हैं. मुझे लगा कि ऐसी फ़िल्म करने में मुझे अच्छा लगेगा.

आपने अपनी नई फ़िल्म में गोविंदा के साथ भी काम किया है. लोग कहते हैं उनके साथ करने का अलग ही मज़ा है.

गोविंदा एक ऐसे अभिनेता हैं जिन्हें मैं बेहद पसंद करती आई हूँ. थोड़ी सहमी हुई भी थी कि इतने बड़े ऐक्टर के साथ काम करना है. फ़िल्म की कहानी कुछ ऐसी है कि मेरी और गोंविदा की एकदम नहीं बनती, हम हमेशा लड़ते रहते हैं.

ये मेरे लिए एक अजीब सी स्थिति थी क्योंकि असल ज़िंदगी में मैं गोविंदा की फ़ैन हूँ लेकिन फ़िल्म में मुझे उनसे ख़ूब झगड़ा करना था.

आपने अपनी उलझन का ज़िक्र किया. तो ऐसे रोल किस तरह निभाती हैं जो असल ज़िदंगी में आपकी शख़्सियत से बिल्कुल मेल नहीं खाते हों.

दरअसल मैं ख़ुद को 'डाइरेक्टर्स ऐक्टर' समझती हूँ यानी निर्देशक जैसे किरदार को ढालता है वैसे ही मैं अभिनय करती रहती हूँ. मेरे लिए ये बहुत मायने रखता है कि निर्देशक मेरे साथ है, सही दिशा दे रहा है.

मैं किरदार को ध्यान से पढ़ती हूँ और ईमानदारी से उसे निभाने की कोशिश करती हूँ.

जैसे लाइफ़ पार्टनर में मैं संजना का रोल कर रही हूँ लेकिन वो मुझसे एकदम अलग है. पर रोल करने में मुझे बहुत मज़ा आया. मुझे अच्छा लगा कि अभिनय के ज़रिए मैने एक ऐसी लड़की को समझा जो मुझसे अलग है.

आपके हिसाब से एक अच्छे लाइफ़ पार्टनर में क्या तीन खूबियाँ होनी चाहिए.

वो ऐसा होना चाहिए कि मैं आसानी से उससे हर बात कर सकूँ...किसी भी रिश्ते के लिए कम्युनिकेशन बहुत ज़रूरी है.

दूसरी बात है ईमानदारी. चाहे कुछ भी हो जाए ईमानादरी रहनी चाहिए रिश्ते में. और तीसरा ये कि वो ऐसा हो कि मुझे संपूर्णता का एहसास दिलाए.

मैं नहीं चाहती कि वो बिल्कुल मेरे जैसा हो. वो ऐसा हो कि मैं उसकी उन अच्छाइयों की तरफ़ देखूँ जो मुझमें नहीं है. यानी दोनों एक दूसरे को पूरा करें.

आपने हिंदी फ़िल्मों में काम किया है, दक्षिण की फ़िल्म इंडस्ट्री में आप सुपरस्टार हैं. आपने तमिल, तेलगू और कन्नड तीनों भाषाओं में हिट फ़िल्में दी हैं. बहुत कम एक्टर ऐसा कर पाते हैं. कैसा लगता है.

ये बहुत अच्छा एहसास है. मुझे लगता है कि लोग मुझे ज़रूर बहुत-बहुत प्यार करते हैं, मैने कभी न कभी ज़रूर कोई अच्छा काम किया होगा तभी ऐसा हो पाया है कि बॉलीवुड से लेकर दक्षिण की फ़िल्म इंडस्ट्री में मुझे नाम और सफलता मिली है.

आप इतनी सारी भाषाओं में इतने निर्देशकों के साथ काम करती हैं. कभी कोई कहानी पंसद न आई हो- तो क्या ऐसे निर्देशक या निर्माता को न कहना मुश्किल होता है जो आपके दोस्त हों या वरिष्ठ हों.

हाँ थोड़ा मुश्किल ज़रूर लगता है. लेकिन ये बहुत ज़रूरी है कि आप ईमानदारी से अपनी बात रखें क्योकि इसमें निर्देशक का भी भला है और आपका भी.

आपने कमोबेश कम ही फ़िल्में साइन की हैं. क्या सोचकर फ़िल्म साइन करती हैं.

सबसे पहली चीज़ तो स्क्रिप्ट है मेरे लिए. ये सबसे अहम है. इसके बाद फिर कई चीज़ें आती हैं जिन पर आप ग़ौर करते हैं- सब पहलुओं पर विचार करने के बाद ही मैं तय करती हूँ कि फ़िल्म करनी चाहिए या नहीं.

फ़िल्मों में नहीं होती तो क्या करतीं?

मैं हमेशा से स्पोर्ट्स गर्ल रही हूं- खेल कूद में आगे. हो सकता है कि मैं खिलाड़ी होती या फिर मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही होती. लेकिन मैं ख़ुश हूँ कि मुझे फ़िल्मों में काम करने का मौका मिला और मैं अभिनेत्री बन गई.

क्या लोगों को आपको अगली फ़िल्मों के लिए इंतज़ार करना पड़ेगा?

इस साल मेरी कई फ़िल्में रिलीज़ हो रही हैं. जॉन अब्राहम के साथ, शाहिद कपूर के साथ है और फिर हरमन बवेजा के साथ इट्स माई लाइफ़.

ट्स माई लाइफ़ आपकी हिट तेलगू फ़िल्म की रीमेक है. क्या ऐसा रोल करना मुश्किल होता है जिसे आप पहले भी दूसरी भाषा में निभा चुकी हों और उसे लोगों ने पसंद भी किया हो. जैसे गजनी में आसिन ने किया.

ये काम बहुत ही मुश्किल होता है क्योंकि मूल फ़िल्म की सफलता हमेशा आपका पीछा करती रहती है. जब आप वही रोल दूसरी दफ़ा किसी और भाषा में करते हैं तो मूल फ़िल्म कहीं न कहीं दिमाग़ के किसी कोने में हमेशा रहती ही है. लोग सोचते हैं कि शायद वही रोल दोबारा करना है तो आसान होगा लेकिन होता इसका उलट है.

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