'हल्की-फुल्की फ़िल्म है कुकिंग विद स्टेला'

प्रोड्यूसर हैमिल्टन के साथ दिलीप मेहता
Image caption फ़िल्म का प्रदर्शन टोरंटो फेस्टिवल में हुआ.

कनाडा के टोरंटो में चल रहे फ़िल्म समारोह में दिलीप और दीपा मेहता की फ़िल्म 'कुकिंग विद स्टेला' दिखाई गई. फ़िल्म को दोनों ने मिलकर लिखा है लेकिन निर्देशन किया है दिलीप मेहता ने.

'कुकिंग विद स्टेला' कनाडा और दिल्ली में फ़िल्माई गई है. कहानी भारत में कनाडा की राजदूत और उनके पति के इर्द-गिर्द घूमती है. वो दिल्ली आकर स्टेला नाम की एक औरत को अपने घर खाना बनाने के लिये रखते हैं और इस सबके अनुभवों को ही इस फ़िल्म में दर्शाया गया है.

पिछले तीस साल से कनाडा में रहने वाले दिलीप मेहता अक्सर भारत आते हैं और दोनों ही देशों की सभ्यताओं को समझते हैं.

दिलीप मेहता कहते हैं, "ये एक हल्की-फुल्की फ़िल्म है लेकिन इसमें सामाजिक असमानताओं को भी दर्शाया गया है."

दिलीप कहते हैं कि वो अपनी बहन दीपा को एक बहुत बढ़िया फ़िल्मकार मानते हैं और उनके साथ फिर काम करना चाहेंगे. वैसे दिलीप एक फोटो पत्रकार और डॉक्यूमेंट्री निर्माता रह चुके हैं.

Image caption श्रेया की भूमिका की तारीफ़ हो रही है.

कुकिंग विद स्टेला में कनाडा की राजनयिक का रोल लीज़ा रे ने किया है जबकि उनके पति का रोल किया है कनाडा के अभिनेता डॉन मेककेलर ने. खाना बनाने वाली स्टेला के रोल में दिखेंगी सीमा बिस्वास.

सीमा कहती हैं, "बहुत कम लोग जानते हैं कि मैं अच्छी कॉमेडी भी कर सकती हूं. शेखर कपूर ने मुझे एक कॉमेडी नाटक में देखकर ही बैंडिट क्वीन के लिये साइन किया था. मैं कॉमेडी रोल करना पसंद करती हूं इसलिये मुझे इस फ़िल्म में काम करना अच्छा लगा."

फ़िल्म के लिए सीमा ने करीब सात से आठ किलो वज़न बढ़ाया क्योंकि ये उनके किरदार की मांग थी.

इस फ़िल्म में श्रेया सरन और वंश भारद्वाज ने भी भूमिकाएं निभाई हैं.

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