राशि के सहारे प्रियतमा की तलाश

   लगान, स्वदेस और जोधा अकबर जैसी गंभीर फ़िल्में बनाने के बाद अब आशुतोष गोवारिकर एक रोमेंटिक कॉमेडी लेकर आ रहे हैं. फ़िल्म का नाम है ‘वट इज़ योर राशि’  इस फ़िल्म को पिछले हफ़्ते टोरंटो फ़िल्म समारोह में भी दिखाया गया.  आशुतोष गोवारिकर जोधा अकबर के बाद सोचा कि अब क्यों ना रोमेंटिक कॉमेडी बनाई जाये. आशुतोष गोवरिकर ने टोरंटो में बीबीसी को बताया ‘ जब मैंने ये तय कर लिया कि कॉमेडी बनाऊंगा, तब मैं कहानी तलाशने लगा और मुझे याद आया मधु राय का उपन्यास किंबल रेवंसवुड.’   फ़िल्म की कहानी कुछ यूं है. हीरो अपने लिए दुल्हन की तलाश कर रहा है और वो इस सिलसिले में बारह राशियों की बारह अलग-अलग लड़कियों से मिलता है. ये हीरो है हरमन बावेजा और बारह लड़कियों का रोल किया है अकेली प्रियंका चोपड़ा ने.    कंसेप्ट ये पहली बार नहीं है कि इस उपन्यास का रुपांतरण किया गया हो. मिस्टर योगी नाम के टीवी सीरियल में मोहन गोखले ने भी यही किया था लेकिन इस सीरियल में बारह राशियों वाली लड़कियों का रोल अलग-अलग अभनेत्रियों ने किया था.   आशुतोष गोवारिकर कहते हैं कि उन्हें ये पूरा कंसेप्ट बहुत ही दिलचस्प लगता है. उन्होंने बीबीसी को बताया ‘ आज भी भारत में एरेंज्ड मैरिज में दस मिनट के अंदर लोगों को अपने जीवन साथी के बारे में फ़ैसला करना होता है. इस तरह अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फ़ैसला लोग उन मिनट में ले लेते हैं.’   फ़िल्म में प्रियंका चोपड़ा बारह अलग-अलग किरदार निभा रही हैं. इससे पहले प्रसिद्ध अभिनेता संजीव कुमार ‘नया दिन नई रात’ में और कमल हसन ‘दसावतार’ में एक साथ कई-कई किरदान निभा चुके हैं. लेकिन ये दोनों ही मंजे हुए अभिनेता के रुप में जाने जाते रहे हैं.          तो आशुतोष गोवारिकर ने प्रियंका चोपड़ा को इतनी चुनौती भरी पटकथा के लिए कैसे चुना?   आशुतोष ने बीबीसी को बताया  ‘प्रियंका को मैं उनकी पहली फ़िल्म से ही पसंद करता रहा हूं. उन्होंने शुरुआती दौर में ही एतराज जैसी फ़िल्म की जिसमें उनका किरदार नेगेटिव था. मुझे लगा कि ये एक हिम्मत वाला क़दम था. इससे ये भी साबित हो गया कि वो हमेशा कुछ नया करना चाहतीं हैं. जब मैं ‘वट इज़ योर राशि’ बनाने लगा तो मुझे यक़ीन था कि प्रियंका ही ये बारह अलग-अलग किरदार निभा सकतीं हैं’   इतनी तारीफ़ करने के बाद गोवारिकर कहते हैं कि अब उनकी इच्छा है दर्शक भी प्रियंका का काम देखकर यही महसूस करें जो वो कह रहे हैं.   ख़ुशकिस्मत प्रियंका चोपड़ा ने भी माना कि बारह किरदार करना उनके लिए ख़ुशकिस्मती की बात है क्योंकि ऐसा दुनिया में किसी भी महिला अभिनेत्री ने आज तक नहीं किया है.   उन्होंने टोरंटो में बीबीसी को बताया कि इस फ़िल्म को लेकर वो काफ़ी जोश में हैं क्योंकि ये एक ज़बरदस्त कॉमेडी है जिसमें एरेंज्ड मैरिज पर कटाक्ष किया गया है.   प्रियंका चोपड़ा ने कहा कि उन्होंने अपनी तरफ़ हर किरदार को एक अलग पहचान देने की कोशिश की है, हांलाकि ये काम आसान नहीं था.  प्रियंका ने कहा ‘ मैंने विभिन्न किरदारों को आवाज़ से, चाल-ढाल से, बात करने के तरीके से अलग पहचान देने की कोशिश की है’  प्रियंका चोपड़ा कहती हैं कि उनके लिए सबसे चुनौती-भरा रोल पंद्रह साल की एक लड़की का था क्योंकि उस रोल के लिए उन्हें पंद्रह साल का लगना था जो काफ़ी मुश्किल था. चोपड़ा कहती हैं ‘ इस फ़िल्म में स्पेशल इफ़ेक्ट्स का इस्तेमाल नहीं है जिससे आप को कोई सहायता मिल पाती, इसलिए सब कुछ ख़ुद ही करना था.’       प्रियंका चोपड़ा इस बात से बहुत ख़ुश हैं कि ये फ़िल्म टोरंटो फ़िल्म समारोह में दिखाई गई. उन्होंने टोरंटो में बीबीसी को बताया ‘टोरंटो फ़िल्म समारोह में हमारी फ़िल्म का आना एक सम्मान की बात है क्योंकि यहां भारतीय मूल के कई दर्शक हैं जिन्हें हिंदी फ़िल्में पसंद हैं.’

लगान, स्वदेस और जोधा अकबर जैसी गंभीर फ़िल्में बनाने के बाद अब आशुतोष गोवारीकर एक रोमेंटिक कॉमेडी लेकर आ रहे हैं. फ़िल्म का नाम है ‘व्हॉट्स योर राशि’.

इस फ़िल्म को पिछले हफ़्ते टोरंटो फ़िल्म समारोह में भी दिखाया गया.

आशुतोष गोवारीकर जोधा अकबर के बाद सोचा कि अब क्यों ना रोमेंटिक कॉमेडी बनाई जाए. आशुतोष गोवरीकर ने टोरंटो में बीबीसी को बताया, "जब मैंने ये तय कर लिया कि कॉमेडी बनाऊंगा, तब मैं कहानी तलाशने लगा और मुझे याद आया मधु राय का उपन्यास किंबल रेवंसवुड."

फ़िल्म की कहानी कुछ यूं है. हीरो योगेश पटेल यानी हरमन बावेजा अपने लिए दुल्हन की तलाश कर रहे हैं और वो इस सिलसिले में 12 राशियों की 12 अलग-अलग लड़कियों से मिलते है. इन 12 लड़कियों का रोल किया है अकेली प्रियंका चोपड़ा ने.

कंसेप्ट

ये पहली बार नहीं है कि इस उपन्यास का रुपांतरण किया गया हो. मिस्टर योगी नाम के टीवी सीरियल में मोहन गोखले ने भी यही किया था लेकिन इस सीरियल में बारह राशियों वाली लड़कियों का रोल अलग-अलग अभिनेत्रियों ने किया था.

आशुतोष गोवारीकर कहते हैं कि उन्हें ये पूरा कंसेप्ट बहुत ही दिलचस्प लगता है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "आज भी भारत में अरेंज्ड मैरिज में 10 मिनट के अंदर लोगों को अपने जीवन साथी के बारे में फ़ैसला करना होता है. इस तरह अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फ़ैसला लोग उन 10 मिनटों में ले लेते हैं."

फ़िल्म में प्रियंका चोपड़ा बारह अलग-अलग किरदार निभा रही हैं. इससे पहले प्रसिद्ध अभिनेता संजीव कुमार ‘नया दिन नई रात’ में और कमल हसन ‘दसावतार’ में एक साथ कई-कई किरदान निभा चुके हैं. लेकिन ये दोनों ही मंझे हुए अभिनेता के रूप में जाने जाते रहे हैं.

Image caption तीन गंभीर फ़िल्मों के बाद गोवारिकर पहली बार कॉमेडी में हाथ आजमा रहे हैं

तो आशुतोष गोवारीकर ने प्रियंका चोपड़ा को इतनी चुनौती भरी पटकथा के लिए कैसे चुना?

आशुतोष ने बीबीसी को बताया, "प्रियंका को मैं उनकी पहली फ़िल्म से ही पसंद करता रहा हूं. उन्होंने शुरुआती दौर में ही ऐतराज़ जैसी फ़िल्म की जिसमें उनका किरदार निगेटिव था. मुझे लगा कि ये एक हिम्मत वाला क़दम था. इससे ये भी साबित हो गया कि वो हमेशा कुछ नया करना चाहतीं हैं. जब मैं ‘व्हाट्स योर राशि’ बनाने लगा तो मुझे यक़ीन था कि प्रियंका ही ये 12 अलग-अलग किरदार निभा सकतीं हैं."

इतनी तारीफ़ करने के बाद गोवारीकर कहते हैं कि अब उनकी इच्छा है दर्शक भी प्रियंका का काम देखकर यही महसूस करें जो वो कह रहे हैं.

ख़ुशकिस्मत

प्रियंका चोपड़ा ने भी माना कि 12 किरदार करना उनके लिए ख़ुशकिस्मती की बात है क्योंकि ऐसा दुनिया में किसी भी महिला अभिनेत्री ने आज तक नहीं किया है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि इस फ़िल्म को लेकर वो काफ़ी जोश में हैं. क्योंकि ये एक ज़बरदस्त कॉमेडी है जिसमें अरेंज्ड मैरिज पर कटाक्ष किया गया है.

Image caption प्रियंका चोपड़ा की काबिलियत पर भरोसा है गोवारिकर को

प्रियंका चोपड़ा ने कहा कि उन्होंने अपनी तरफ़ हर किरदार को एक अलग पहचान देने की कोशिश की है, हालांकि ये काम आसान नहीं था.

प्रियंका ने कहा, "मैंने विभिन्न किरदारों को आवाज़ से, चाल-ढाल से, बात करने के तरीक़े से अलग पहचान देने की कोशिश की है."

प्रियंका चोपड़ा कहती हैं कि उनके लिए सबसे चुनौती-भरा रोल 15 साल की एक लड़की का था क्योंकि उस रोल के लिए उन्हें पंद्रह साल का लगना था जो काफ़ी मुश्किल था.

प्रियंका चोपड़ा कहती हैं कि इस फ़िल्म में स्पेशल इफ़ेक्ट्स का इस्तेमाल नहीं है जिससे आप को कोई सहायता मिल पाती, इसलिए सब कुछ ख़ुद ही करना था.

प्रियंका चोपड़ा इस बात से बहुत ख़ुश हैं कि ये फ़िल्म टोरंटो फ़िल्म समारोह में दिखाई गई.

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