बीबीसी टेक वन

मनोरंजन की दुनिया से सप्ताह भर की चटपटी ख़बरें समेटे बीबीसी हिंदी एफ़ एम का विशेष कार्यक्रम बीबीसी टेक वन.

बीबीसी टेक वन के इस अंक में हम बताएँगे भारत में इस सप्ताह रिलीज़ हो रही फ़िल्मों के बारे में और हमारे साथ होंगे बीबीसी टेक वन के फ़िल्म क्रिटिक सुभाष के झा.

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एडवांस बुकिंग

निर्देशक आशुतोष गोवारीकर की फ़िल्म 'व्हाट्स योर राशि' रिलीज़ हो रही है इस हफ्ते औऱ आशुतोष ने बताया कि ये एक ऐसे लड़के की कहानी है जिसे दस दिन में एक लड़की चुन कर शादी करनी है और इसी वजह से वो हर राशि की एक लड़की से मिलता है.

फ़िल्म में 12 किरदार निभा रहीं ऐक्ट्रैस प्रियंका चोपड़ा कहती है कि ये उनके लिए बहुत ख़ुशक़िस्मती की बात है कि इतनी कम उम्र में उन्हें ऐसा रोल करने का मौक़ा मिला.

प्रियंका ने कहा कि इन सबमें से 15 वर्ष की एक लड़की का किरदार निभाना उन्हें सबसे ज़्यादा मुश्किल लगा.

टिंसल टॉक

दक्षिण कोरिया में अक्तूबर में होने वाले पूसान अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में फ़िल्ममेकर यश चोपड़ा को फ़िल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान के लिये सम्मानित किया जाएगा और यश चोपड़ा ने कहा कि ये सम्मान सिर्फ़ उनका ही नहीं बल्कि भारत देश का सम्मान है.

अगले साल होने वाले 'ऑस्कर' के लिए भारत की ओर से भेजी गई है मराठी फ़िल्म 'हरिश्चंद्राची फ़ैक्टरी'.

इस फ़िल्म का निर्देशन किया है परेश मोकाशी ने जिनकी ये पहली फ़ीचर फ़िल्म है और उन्होंने बीबीसी से कहा कि इस ख़बर से उन्हें आश्चर्युक्त आनंद हो रहा है और अब उन्हें अपनी आगे की ज़िम्मेदारी को भी निभाना है इस फ़िल्म को 'जूरी' तक पहुंचाकर.

परेश मोकाशी ने फ़िल्म की कहानी के बारे में पूछे जाने पर कहा कि ये दादा साहब फ़ाल्के पर बनी पहली फ़िल्म है. दादा साहब फ़ाल्के ने पहली भारतीय फ़िल्म बनाई थी 'राजा हरिश्चंद्र' जिसकी शुरुआत उन्होंने की थी 1911 में और जो रिलीज़ हुई 1913 में.ये मराठी फ़िल्म उन्ही की साहस कथा पर आधारित है यानी किस प्रकार दादा साहब फ़ाल्के पहली भारतीय फ़िल्म बनाने में क़ामयाब हुए.

प्रकाश झा की फ़िल्म राजनीति में ऐक्ट्रैस कटरीना कैफ़ एक अहम किरदार निभा रही हैं और उन्होंने बताया कि हालांकि वो फ़िल्म में राजनीति का हिस्सा है पर उनका किरदार बिल्कुल भी 'सोनिया गांधी' पर आधारित नहीं है.

ब्रैड पिट प्रोडक्शन की फ़िल्म 'ईट प्रे लव' की शूटिंग आश्रम हरिमंदिर में चल रही है और हॉलीवुड ऐक्ट्रैस जूलिया रॉबर्टस अपनी पूरी टीम के साथ मौजूद हैं.

जूलिया अपने तीनों बच्चों के साथ रह रही हैं पटौदी पैलेस में और कुछ इसी वजह से जब शर्मिला टैगोर से पूछा गया कि क्या वो जूलिया से मिलने गई हैं तो उन्होंने कहा- नहीं मैं नहीं मिलने गई क्योंकि मैं शूटिंग में व्यस्त हूँ और मैं भी काम करती हूँ इसलिये जानती हूँ कि ऐसे में किसी को जाकर मिलना ठीक नही हैं.'

क्रिकेट की फ़िल्में क्यों बॉलीवुड में अक्सर होती हैं फ़्लाप?

बीबीसी टेक वन में इस बार हमने जानने की कोशिश की, कि आख़िर ऐसा क्यों होता है कि बॉलीवुड में क्रिकेट की पृष्ठभूमि को लेकर बनी फ़िल्में ज़्यादातर हिट नहीं हो पातीं जैसे 'अव्वल नंबर', 'विक्टरी', 'मीराबाई नॉट आउट' औऱ 'हैट्रिक'. हाँ कुछ फ़िल्में जैसे 'इक़बाल' औऱ 'लगान' को ज़रूर सराहा गया.

फ़िल्म 'हैट्रिक' के निर्देशक मिलन लूथरिया का कहना है भारत में बॉलीवुड और क्रिकेट दोनों का ही बहुत बोलबाला है और अक्सर फ़िल्म निर्माता यही सोचते हैं कि इनके संगम से वो दोगुना लाभ उठा सकेंगे पर एसा होता नहीं है.

इसकी एक वजह ये भी है कि असल क्रिकेट से जुड़े स्टेडियम में शूटिंग करने की इजाज़त मिलना भी काफ़ी मुश्किल होता है औऱ फ़िल्मेकर क्रिकेट को उसके मूल रुप में दिखा पाने में असमर्थ हो जाते हैं.

विज्ञापन निर्माता एलिक पद्मशी तो मानते हैं कि अगर कहानी अच्छी है तो फ़िल्म ज़रुर चलेगी. फ़िल्म के चलने या न चलने का ताल्लुक क्रिकेट से बिलकुल भी नहीं हैं.

उन्होंने फ़िल्म 'चक दे' का उदाहरण देते हुए कहा कि बिना गानों की हॉकी के खेल को लेकर बनी फ़िल्म होने के बावजूद ये फ़िल्म हिट हुई क्योंकि इसका निर्देशन बहुत ही बेहतरीन अंदाज़ से किया गया.

फ़िल्म क्रिटिक इंदू मिरानी का मानना है कि यदि कोइ क्रिकेट की थीम को लेकर फ़िल्म बनाए पर उसकी न कोई कहानी हो और न ही अच्छी पटकथा तो फिर उसके हिट होने की कोई संभावना ही नहीं है.

वैसे क्रिकेट की फ़िल्मों से थोड़ा हटकर ये भी देखा गया है कि वो खिलाड़ी जो क्रिकेट की पिच पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं वो अगर बड़े पर्दे का रुख़ करते हैं तो अक्सर नाकाम ही रहते हैं.

इस पर एक्टिंग में हाथ आज़मा चुके पूर्व क्रिकेटर संदीप पाटिल का मानना है कि दो नाव में पांव रखना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्होंने भी कुछ एसी ही ग़लती की थी और वो नहीं चाहते कि कोई और ऐसी ग़लती करे.

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