मशहूर लोगों की गांधीगिरी

गांधी जयंती के मौक़े पर बीबीसी ने कुछ जानी-मानी हस्तियों से बात की और ये जानने की कोशिश की क्या कभी उन्होंने गांधीगिरी की है या उनके जीवन में कोई ऐसी घटना हुई है जो उन्हें गांधीजी के आदर्शों की याद दिलाती हो?

सलमान ख़ान, फ़िल्म अभिनेता

मेरे पिताजी की तनख़्वाह करीब 750 रुपए थी. दिवाली के समय था और लोग पटाखे छोड़ रहे थे. मैं कुछ काग़ज़ जला रहा था. मेरे काग़ज़ ख़त्म हो गए और मैं और पेपर ढ़ूंढने लगा. अचानक मुझे पिता जी बटुआ दिखा. मुझे कुछ नोट दिखाई दिए. मैंने उन्हें जलाना शुरु कर दिया. पिताजी ने मुझे ये करते हुए देखा और पूछा कि क्या कर रहे हो? मैंने कहा - पेपर नहीं था. उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा....वो पैसे जलाने की आदत मुझे आजतक है.

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अजय जडेजा, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी

मैं कोई एक घटना तो नहीं बता पाऊंगा लेकिन अधिकतर भारतीयों की तरह मैं ख़ुद को ख़ुशकिस्मत मानता हूं कि यहां शांति है और लोग दयालू हैं. मेरे स्कूल के दिनों में भी मुझे शांतिप्रिय और दयालू अध्यापक मिले. जीवन में एकाध बुरे अनुभव होते ही रहते हैं लेकिन ऐसी घटनाएं हमें ये याद दिलाती हैं कि हमें शांति और सदभाव से रहना चाहिए.

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विजेंदर सिंह, मुक्केबाज़

हमारा काम गांधीगिरी का नहीं है, हमारा काम पंच का है. मैंने मुन्नाभाई फ़िल्म देखी है जो मुझे बहुत पसंद आई थी. लेकिन हमारा पेशा कुछ और है. यहां अगर कोई एक मारे तो उसे दो मारने पड़ते हैं.

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सुनिधि चौहान, गायिका

अभी हाल ही में नेपाल में मानव तस्करी पर रोक के लिए एक शो था, मैं वहां पीड़ितों के डेरे पर भी गई. मैंने वहां सभी लोगों से बात की. मैं जिस भी तरह से लोगों की सहायता कर सकती हूं, करना चाहती हूं.

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शिबानी कश्यप, गायिका

आप लोगों के प्रति जितना दयालू होते हैं लोग आपके प्रति भी उतने ही दयालू होते हैं. मैं चाहे दुनिया में कहीं भी गई हूं, मुझे हमेशा बहुत प्यार मिला है. मैं हाल ही में टोरंटो में गई थी वहां लोग मेरे कंपोज़ किए ऐसे ऐसे गाने भी जानते हैं जिनके बारे में भारत में कईयों को पता भी नहीं होगा. मैं जो अपने संगीत से प्यार बांटती हूं ये उसी का नतीजा है.

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मिनी माथुर, टीवी होस्ट

मैं गांधीगिरी की कोई एक घटना बताऊंगी तो ग़लत होगा क्योंकि मुझे लगता है कि जब भी मुझ पर मुश्किल आन पड़ी है तो मुझे हमेशा किसी न किसी ने राह दिखाई है. मैं इसे गांधीजी की विरासत ही मानती हूं. क्योंकि जो भी लोग गांधी के आदर्शों पर चल रहे हैं, वही लोग मुझे मिल जाते हैं और मेरी सहायता करते हैं. एक बार विदेश में अपने दोस्तों के साथ भटक गई. अचानक एक लड़का आया और रास्ता ही नहीं दिखाया बल्कि साथ चलकर हमें हमारी मंज़िल तक भी छोड़ा.

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