एकता का 'क' से मोहभंग

एकता कपूर
Image caption एकता का नया धारावाहिक छह अक्तूबर से शुरू हो रहा है

मशहूर टेलीविज़न निर्माता एकता कपूर बदल रही हैं. उनका ‘क’ अक्षर से मोह भी ख़त्म हो रहा है.

क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कहानी घर-घर की, कसौटी ज़िंदगी की, कुसुम, किस देश में है मेरा दिल, कितनी मोहब्बत है, क्या दिल में है....ये एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस बालाजी टेलीफ़िल्म्स के कुछ टीवी सीरियल हैं

लेकिन अब ये बदल रहा है. शुरुआत बंदिनी और पवित्र रिश्ता आदि नाम के धारावाहिकों से पहले ही हो चुकी है.

छह अक्तूबर से एकता कपूर का नया सीरियल ‘बेताब दिल की तमन्ना है’ शुरु हो रहा है. और इस बार भी सीरियल का शीर्षक ‘क’ से शुरु नहीं हो रहा. साथ ही धीरे-धीरे उनके धारावाहिकों से सास-बहू भी ग़ायब होतीं जा रही हैं

एकता कपूर इसका कारण बताती हैं, "पिछले दो-एक महीनों से सभी लोग मुझे बता रहे थे कि दर्शकों को तुम्हारा ब्रैंड ख़ुद को दोहराता हुआ नज़र आ रहा है. लोग सीरियल देखने आते हैं, वो ‘के’ शब्द देखते हैं और समझ जाते हैं कि किस तरह का सीरियल होगा."

एकता कपूर बताती हैं कि ‘बेताब दिल की तमन्ना है’ तीन महिलाओं की महत्त्वाकांक्षाओं के बारे में है.

आसान नहीं

भारत में कुछ सबसे कामयाब टीवी सीरियल बनाने वाली एकता कपूर कहती हैं कि एक सफल धारावाहिक बनाना आसान काम नहीं है.

एकता कपूर कहती हैं, "देखिए समस्या ये है कि कुछ भी बनाना आसान नहीं होता. क्योंकि आपको ऐसा धारावाहिक बनाना होता है जो चल सके. फ़िल्म बनाना सीरियल बनाने की तुलना में थोड़ा आसान है क्योंकि आपको तीन घंटे का कंसेप्ट सोचना है लेकिन टीवी के लिए आपको कई कंसेप्ट के बारे में सोचना पड़ता है."

एकता कपूर के धारावाहिकों के केंद्र में हमेशा महिला किरदार रहते हैं और ज़ाहिर है महिलाओं का झुकाव इनकी ओर ज़्यादा होता है.

तो क्या कभी एकता कपूर पुरुषों के लिए कुछ कार्यक्रम बनाने के बारे सोचतीं हैं?

इस सवाल का जवाब काफ़ी दिलचस्प था, "काश क्रिकेट की स्पेलिंग ‘सी’ की बजाय ‘के’ से होती क्योंकि पुरुषों को तो सिर्फ़ क्रिकेट पसंद है या फिर समाचार. बस. सॉरी लेकिन जब तक रिमोट महिलाओं के हाथ में है और वो धारावाहिक देखना पसंद कर रहीं हैं, तब तक तो हम पुरुषों के लिए शो नहीं बना सकते."

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