मोहित को है संगीत का 'फ़ितूर'

मोहित चौहान

अपनी मधुर और सुरीली आवाज़ के लिए चर्चित गायक मोहित चौहान अब ले कर आए हैं अपना पहला हिंदी एलबम ''फ़ितूर''.

मोहित पहले हिस्सा थे म्यूज़िक बैंड सिल्क रूट का, और उन्हें पहचान मिली इसी बैंड की पहली एलबम 'बूँदें' में गाए उनके गीत 'डूबा-डूबा रहता हूँ' से.

सिल्क रूट की दूसरी एलबम थी 'पहचान', जिसमें अपने गीतों से एक बार फिर मोहित ने लोगों का दिल जीत लिया, मगर 2008 में ये बैंड बिखर गया और उसके बाद पूर्व राष्ट्रपति डॉ ऐपीजे अब्दुल कलाम की कविताओं को संगीत में ढाल, मोहित ले कर आए एक सोलो एलबम 'कलाम'.

बीबीसी से बातचीत करते हुए मोहित ने कहा कि उन्हें शुरू से ही संगीत का फि़तूर रहा है, इसीलिए उन्होंने अपनी इस एलबम का नाम 'फ़ितूर' रखा और साथ ही इसमें एक गाना भी है जिसका संबंध इश्क के फ़ितूर से है.

मोहित कहते हैं 'फ़ितूर के ज़्यादातर गीत मैंने खुद ही लिखे हैं और उनके बोल बहुत ही साधारण मगर दिल को छू लेने वाले हैं, मेरा ये मानना है कि संगीत का आत्मा के साथ सीधा संबंध होता है.''

ये पूछे जाने पर कि उन्हें अपनी पहली सोलो हिंदी एलबम लाने में इतना समय क्यों लगा, मोहित ने कहा '' आपको लगता है कि ज़िंदगी में कुछ चीज़ें जल्द ही हो जाएँ, मगर ऐसा होता नहीं है, ऐसे में संयम बरतना चाहिए और मुझे लगता है कि चीज़ें अपने वक़्त पर ही होती हैं और उनका इंतज़ार करना भी ज़रूरी होता है.''

विज्ञान का छात्र होने के बावजूद मोहित कि रुचि संगीत में ही रही है, और मोहित ये मानते हैं कि कलाकार होने के नाते वे हिंदी फ़िल्म संगीत, पाश्चात्य संगीत और हिमाचल के लोक संगीत से बहुत प्रभावित रहे हैं, जिसकी झलक उनकी इस एलबम 'फि़तूर' में भी मिलेगी.

जहाँ तक मोहित के बॉलीवुड सफ़र का सवाल है तो, रंग दे बसंती, जब वी मेट, फैशन, दिल्ली 6, न्यूयार्क, लव आजकल और कमीने जैसी फिल्मों में गाए अपने गीतों से वो सभी संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी जगह पहले ही बना चुके हैं.

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