बीबीसी टेक वन: चटपटी फ़िल्मी गपशप

मनोरंजन की दुनिया से सप्ताह भर की चटपटी ख़बरें समेटे बीबीसी हिंदी एफ़ एम का विशेष कार्यक्रम 'बीबीसी टेक वन' मोहित चौहन

इस बार शो में हैं एक ख़ास मेहमान भी जिनकी आवाज़ कुछ एसी है जैसे ताज़ी हवा का एक मीठा सा झोंका औऱ जिनके गाने लोगो को भाव विभोर कर देते हैं. एसा लगता है मानों हिमाचल में पले बढ़े इस सिंगर ने वहाँ की सुरीली पहाड़ियों का संगीत अपनी आवाज़ में समेट लिया हो. जी हाँ ये सिंगर हैं मसक्कली, तुमसे ही, ये दूरीयाँ, डूबा डूबा रहता हूँ, तूने जो न कहा, कुछ ख़ास है जैसे हिट गाने गा चुके मोहित चौहान.

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प्रस्तुत है मोहित चौहन से बातचीत के मुख्य अंश

मोहित एम एस सी करने के बाद गायकी का पेशा कैसे चुन लिया आपने?

म्यूज़िक को कभी पेशे के रुप में नहीं लिया था मैने. सिर्फ़ अपने शौक के लिये गाता था पर फिर एक एसा मोड़ आया जीवन में कि मैने इसको अपना पेशा बना लिया. मेरे माता पिता कहते थे कि बहुत हो गया घूमना फिरना, ट्रेकिंग करना, एम एस सी करने के बाद अब कुछ काम भी करना चाहिये. तो फिर मैं दिल्ली आया और यहाँ मेरा एक दोस्त है, उसने और उसके भाई ने मुझे सुझाव दिया कि मैं म्यूज़िक बनाऊ क्योंकि मेरी आवाज़ उन्हें अच्छी लगी औऱ बस फिर मैने यहीं करने का सोचा.

संगीत के आपके लिये क्या मायने हैं मोहित?

म्यूज़िक वो है जिसमें मैं ख़ुद को खो सकता हूँ. एक तरह का मेडिटेशन है मेरे लिये क्योंकि जब मैं गाता हूँ स्टूडियो में भी तब भी मैं बिलकुल दूसरी दुनिया में पहुँच जाता हूँ.

फ़िल्मों में पहली बार आपने रामगोपाल वर्मा की फ़िल्म ‘रोड’ के लिये गाया था पर बड़ा ब्रेक आपको मिला फ़िल्म रंग दे बसंती से जब आपको गाना के लिये ख़ुद ए आर रहमाना ने कहा.

मेरी मुलाक़ात हुई थी रहमान साहब के साथ 1998 की जाड़े में जब दिल्ली में चैनल वी अवार्डस हुए थे और ‘सिल्क रुट’ की एलबम को चार अवार्ड मिले. इसी मौके पर रहमान साहब ने मुझसे कहा कि उन्हें मेरे गाने का अंदाज़ पसंद है औऱ उसके लगभग सात महीने बाद फ़ोन आया कि वो एक हिंदी फ़िल्म के लिये मुझसे गाना गवाना चाहते हैं.

फ़िल्म ‘जब वि मेट’ के गाने ‘तुम से ही’ की बात करें तो क्या आपने सोचा था कि ये इतना बड़ा हिट होगा?

जब भी मैं कोई गाना स्टूडियों में गाता हूँ, कभी मुझे अंदाज़ा नहीं होता कि ये गाना हिट होगा कि नहीं और न ही मैं इस बारे में सोचता हूँ. इस गाने को रिकार्ड करने के दो तीन दिन बाद मुझे इम्तियाज़ अली का फ़ोन आया कि गाना तो बहुत अच्छा है पर कुछ लोग कह रहे हैं कि थोड़ा उदास लग रहा है तो इसको शायद दोबारा रिकार्ड करेंगे मगर फिर दोबारा फ़ोन ही नहीं आया औऱ इसे बदला नहीं गया.

मोहित जब लोग आपका गाना सुनते हैं तो कई बार एसा लगता है कि बिलकुल किसी दूसरी दुनिया में पहुँच गये हों, ख़ूबसूरत झरने, नीला आसमान, पहाड़ औऱ ठ़डी हवाएँ पर जब आप गाते हो तो क्या आप भी कुछ एसा ही सोच रहे होते हैं?

जब मैं एसी जगह पर होता हूँ तो वो मुझे प्रभावित बहुत करती है औऱ प्रेरित करती है पर जब मैं गाता हूँ तब एक तरह से मैं शून्य में होता हूँ जहाँ कुछ नज़र नहीं आ रहा होता.

ये कहना ग़लत नहीं होगा कि आज आप बहुत से भावी गायकों के लिये एक प्रेरणा स्रोत हैं पर मोहित गायकी की दुनिया से आप सबसे ज्यादा किससे प्रेरित हैं?

कई लोगों से....जैसे किशोर कुमार साहब की गायकी से मुझे बहुत प्रेरणा मिलती है. वेस्टर्न कलाकार जैसे पॉल साइमन, लेड ज़ैपलिन, जैटरोथल जैसों न मुझे बहुत प्रेरित किया है.

मोहित हाल ही में आपकी हिंदी एलबम रिलीज़ हुई है इसके बारे में कुछ बताइये?

हाँ ये लगभग एक हफ्ते पहले रिलीज़ हुई है औऱ एलबम का नाम फ़ितूर है. हर एक शक्स की ज़िन्दगी में कोइ न कोइ फ़ितूर होता है और इसीलिये ये नाम रखा मैंने इसका. इसमें सभी गाने मैंनें ही कम्पोज़ किए हैं औऱ सात गाने लिखे भी हैं.

एडवांस बुकिंग

इस हफ्ते रिलीज़ हो रही फ़िल्मों में शामिल है पंकज शर्मा द्वारा निर्देशित एनिमेशिन फ़िल्म 'बाल गणेश 2'. ये फ़िल्म 'बाल गणेश' का सीक्विल है और पंकज कहते हैं कि उन्होंने ये फ़िल्म बनाने का निर्णय पहली फ़िल्म को मिली ज़बरदस्त वाहवाही के बाद लिया. इस फ़िल्म में ख़ास ये है कि पौराणिक कथा को और आधुनिक समय का एक तरह का मेल देखने को मिलेगा इसमें.

ईसी हफ्ते की फ़िल्म है निर्देशक कुनाल विजेकर की 'फ़्रूट एंड नट' औऱ कुनाल ने बतायी फ़िल्म की कहानी. फ़िल्म में बमन ईरानी एक नब्बे साल के बूढ़े व्यक्ति का रोल कर रहे हैं जो ख़ुद को मुंबई का महाराजा समझता है औऱ मंत्रालय में चिट्ठी लिखकर अपना शहर वापस मांगता है. जब सब उसे पागल समझते हैं तब वो मंत्रालय में बम लगाने की धमकी देता है और एसे में शहर को बचाने आता है एक मामूली आदमी. यही है इस फ़िल्म की कहानी.

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