फ़्रूट ऐंड नट का पागलपन

कुनाल विजयकर

कुणाल विजयकर को आपने बतौर ऐक्टर और टीवी पर फ़ूड शो के अलावा भी बहुत कुछ करते देखा है लेकिन अब उन्होंने नई हिंदी फ़िल्म ‘फ़्रूट ऐंड नट’ का निर्देशन किया है.

कुणाल विजयकर से बात करना अपने आप में एक अनुभव है. वो हर बात का जवाब अपने ख़ास कॉमिक अंदाज़ में देते हैं. बीबीसी ने उनसे पूछा कि कैमरे के आगे-आगे रहते रहते ये ख़्याल क्यूं आया कि अब कैमरे के पीछे जाया जाए?

कुनाल विजयकर का जवाब था, “मैंने सोचा सभी कर रहे हैं...जो फ़िल्में में है या फ़िल्मों से नहीं जुड़े हैं...बावर्ची कर रहे हैं, दर्जी कर रहे हैं...मुझे लगा कि मुझ में भी तो हुनर है तो क्यूं ना मैं भी कर लूं.”

विजयकर अरसे से फ़िल्मों और टीवी से जुड़े हुए हैं और कहते हैं कि वो हर काम सोच-समझ कर करते हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया कि फ़्रूट ऐंड नट की कहानी को लेकर वो पहले भी फ़िल्म बनाने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन कामयाबी उन्हें अब जा कर मिली है.

विजयकर ने ये कहानी तीन साल पहले लिखी थी और तब से एक निर्माता की तलाश कर रहे थे. और आख़िरकार फ़िल्म प्रोडक्शन हाउस स्टूडियो-18 ने ‘फ़्रूट ऐंड नट’ बनाने की हामी भरी.

सभी अपनी फ़िल्म को कुछ अलग कहते हैं, कुणाल विजयकर भी यही कहते हैं लेकिन साफ़गोई से, “देखिए इस फ़िल्म के किरदार अवास्तविक हैं, ये सारी फिल्म ही वास्तविकता से दूर है. ये कहानी है एक पागल आदमी की है जो ख़ुद को मुंबई का महाराजा कहता है.”

फ़िल्म

‘फ़्रूट ऐंड नट’ के केंद्र में है जॉली मेकर नाम का किरदार, जिसे पैसा, प्यार और दोस्ती की तलाश है. अचानक इस किरदार की ज़िंदगी में कुछ ऐसा होता जो उसे हीरो बनने का मौक़ा देता है.

जॉली मेकर की भूमिका में हैं टीवी के जाने-पहचाने चेहरे साइरस भरुचा.

साइरस भरुचा के अलावा इस फ़िल्म में बमन ईरानी, दीया मिर्ज़ा और महेश मंजेरकर मुख्य भूमिकाएं निभा रहे हैं

टीवी पर दर्शकों को गुदगुदाने वाले साइरस भरुचा ने बीबीसी को बताया कि उन्हें तो अब तक समझ नहीं आया है कि फ़िल्म की कहानी क्या है.

भरुचा कहते हैं, “ये बहुत ही ख़तरनाक और अज़ीबोग़रीब कहानी है. कुणाल विजयकर को ही ये कहानी मालूम है और सवाल तो उन्हीं से पूछना पड़ेगा. फ़िल्म तो दिलचस्प और मंनोरंजक है लेकिन कहानी और प्लॉट क्या है, मेरे ख़याल से ये जानने के लिए 10-15 साल तक इंतज़ार करना पड़ेगा.”

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